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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

1 जनवरी, देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा का संदेश

संत पापा फ्राँसिस - AFP

01/01/2018 14:55

वाटिकन सिटी, सोमवार, 1 जनवरी 2018 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में 1 जनवरी, ईश माता मरियम के महापर्व पर संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात।

नव वर्ष के कैलेंडर जिसे प्रभु हमें प्रदान करते हैं उसके प्रथम पृष्ठ पर ईश्वर की माता संत मरियम के महापर्व की धर्मविधि है जिसे कलीसिया एक सुन्दर चित्र के समान प्रस्तुत करती है। सौर वर्ष के प्रथम दिन हम अपनी निगाहें उनपर लगाते हैं, ताकि हम उनके ममतामय संरक्षण प्राप्त करते हुए इस समय के रास्ते पर लम्बी यात्रा की पुनः शुरूआत कर सकें।  

संत पापा ने संत लूकस के सुसमाचार से लिए गये पाठ की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, "आज का सुसमाचार हमें पुनः बेतलेहेम की चरनी में वापस लाता है। ‘चरवाहे शीघ्रता से चल पड़े और उन्होंने मरियम, यूसुफ और चरनी में लेटे हुए बालक को पाया। उसे देखने के बाद उन्होंने बताया कि इस बालक के विषय में उन से क्या-क्या कहा गया है। सभी सुनने वाले चरवाहों की बातों से चकित हो जाते थे। मरियम ने इन सब बातों को अपने हृदय में संचित रखा।’ (लूक.2.16-19)

संत पापा ने कहा कि मरियम हमें यह समझने में मदद देती हैं कि ख्रीस्त जयन्ती की महान घटना को किस तरह से स्वीकार करना चाहिए, सतही रूप में नहीं किन्तु हृदय से। वे हमें ईश्वर के उपहार को स्वीकार करने के सच्चे तरीके को प्रकट करती हैं कि उसे हृदय में रख कर उस पर चिंतन करना चाहिए। यह हम प्रत्येक के लिए निमंत्रण है कि हम चिंतन करते हुए येसु के इस उपहार का रसास्वादन करें।

माता मरियम की महानता प्रकट करते हुए संत पापा ने कहा, "माता मरियम ही वह मध्यस्थ हैं जिनके द्वारा ईश पुत्र ने शरीरधारण किया, बल्कि मरियम का मातृत्व इसी तक सीमित नहीं है वे येसु की प्रथम शिष्य भी हैं एवं इसके द्वारा वे अपनी मातृत्व का विस्तार करती हैं। वह माता मरियम का ही विश्वास था जिसके द्वारा काना में पहला चमत्कार सम्पन्न हुआ, जो चेलों के विश्वास को बढ़ाया। उसी विश्वास से मरियम क्रूस के नीचे खड़ी रहीं तथा प्रेरित योहन को पुत्र के रूप में स्वीकारा एवं अंततः पुनरुत्थान के उपरांत, वह कलीसिया की प्रार्थनामय माता बन गयीं जिनपर पेंतेकोस्त के दिन सामर्थ्य के रूप पवित्र आत्मा उतरा।

एक माता के रूप में मरियम ने एक विशेष कार्य का सम्पादन किया, उन्होंने अपने को अपने पुत्र येसु एवं पीड़ित लोगों के बीच रखा। वे मध्यस्थ प्रार्थना करती हैं एवं इस बात के प्रति सचेत हैं कि एक माता के रूप में वे निश्चय ही अपने पुत्र-पुत्रियों की अवश्यकताओं को ईश्वर के समक्ष रख सकती हैं, खासकर, जो सबसे कमजोर एवं वंचित हैं। ऐसे ही लोगों के लिए विश्व शांति दिवस की विषयवस्तु विशेष रूप से समर्पित है- "विस्थापित एवं शरणार्थी : पुरूष एवं स्त्री शांति की खोज में।"

संत पापा ने शांति की तलाश करने वाले लोगों के लिए अपील करते हुए कहा, "मैं इन भाई-बहनों के लिए पुनः एक बार आवाज देना चाहता हूँ जो अपने भविष्य में शांति की क्षितिज की कामना करते हैं। वह शांति जिसपर सभी का अधिकार है जिसके लिए अनेक लोग लम्बी यात्रा की जोखिम उठा रहे हैं जो बहुधा दूर एवं खतरों से पूर्ण होती है।

हम उनके हृदय में आशा को बुझने न दें, उनकी शांति की आशा को न कुचलें। यह आवश्यक है कि सिविल संस्थान, शैक्षिक, कल्याण और कलीसियाई संस्थआएँ, शरणार्थियों, विस्थापितों एवं सभी के भविष्य को शांतिपूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हों। संत पापा ने प्रार्थना की कि प्रभु इस वर्ष हमें समर्थक एवं स्वीकृति पूर्ण विश्व के निर्माण में अधिक उदारता पूर्वक काम करने की शक्ति प्रदान करे।

उन्होंने सभी को प्रार्थना हेतु निमंत्रण देते हुए कहा, "मैं इसके लिए प्रार्थना करने हेतु आपको निमंत्रण देता हूँ तथा आपके साथ ईश्वर एवं हमारी माता मरियम से प्रार्थना करता हूँ, कि 2018 की शुरूआत में आपका संरक्षण हमें प्राप्त हो। ईश माता मरियम, हमारी प्रार्थना अस्वीकार न करे किन्तु हमें हर जोखिम से बचाये।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत उन्होंने सभी को नये वर्ष 2018 की शुभकामनाएं अर्पित की। उन्होंने सभी के लिए शांति, प्रभु के आशीष एवं माता मरियम के ममतामय संरक्षण की कामना की। अंत में उन्होंने प्रार्थना का आग्रह करते हुए पुनः नये वर्ष की मंगलकामनाएं अर्पित की।


(Usha Tirkey)

01/01/2018 14:55