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धर्म की बहन है शांति, कार्डिनल कोच

ख्रीस्तीय एकता को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल कूर्ट कोच - L'Osservatore Romano

30/12/2017 15:12

वाटिकन सिटी, शनिवार, 30 दिसम्बर 2017 (रेई): "ख्रीस्त जयन्ती का संदेश यह निश्चित रूप से कहता है कि धर्म की बहन है शांति तथा हिंसा को किसी भी तरह से न्याय संगत ठहराया नहीं जा सकता। यही संदेश है जिसको पूरी दुनिया में फैलाया जाना चाहिए।" यह बात ख्रीस्तीय एकता को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल कूर्ट कोच ने कही।

एस आई आर को दिए एक साक्षात्कार में कार्डिनल ने कहा, "विश्वभर में ख्रीस्तीय अत्याचार एवं मौत के शिकार हो रहे हैं। इसलिए कि वे काथलिक अथवा ऑर्थोडॉक्स, प्रोटेस्टंट या लुथेरन हैं बल्कि इसलिए कि वे ख्रीस्तीय हैं। उनका रक्त हमें एक साथ लाता तथा शहीदों ने स्वर्ग में उस एकता को पा लिया है जिसकी खोज हम पृथ्वी पर कर रहे हैं।"    

वर्ष 2017 का अवलोकन करते हुए कार्डिनल कोच ने कहा कि ख्रीस्तीय एकता के दृष्टिकोण से यह वर्ष संबंधों, मुलाक़ातों एवं ऐतिहासिक पड़ाव में धनी रहा जिसने नये दृष्टिकोणों को खोल दिया किन्तु दूसरी ओर यह एक आसान वर्ष नहीं था, जिनमें दुर्भाग्य से धार्मिक चरमपंथियों द्वारा विश्व के विभिन्न हिस्सों में ख्रीस्तीयों पर कई आक्रमण हुए। जिससे मिली पीड़ा ने सभी ख्रीस्तीयों को एकता में लाया।

यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान के क्वेटा स्थित एक मेथोडिस्ट गिरजाघर में 17 दिसम्बर को हुए हमले की घटना सुन उनके मन में क्या विचार आया तो उन्होंने कहा कि उन्हें भारी दुःख हुआ। यह हमला आईएसआईएस के आतंकवादियों द्वारा किया गया था जब लोग ईश्वर के सामने धर्मविधि में भाग ले रहे थे। "हम क्रिसमस काल में हैं और यह काल हमें संदेश देते हैं कि धर्म की बहन शांति है तथा किसी भी तरह से हिंसा को न्याय संगत ठहराया नहीं जा सकता। यही संदेश है जिसे हमें पूरी दुनिया में फैलाये जाने की आवश्यकता है।"   

ख्रीस्तीयों पर ही आक्रमण क्यों हो रहा है इसके जवाब में कार्डिनल ने कहा कि विश्व में ख्रीस्तीय अत्याचार एवं मौत के शिकार हो रहे हैं इसलिए नहीं कि वे काथलिक अथवा ऑर्थोडॉक्स हैं, प्रोटेस्टेंट अथवा लुथेरन हैं या अंगलिकन कलीसिया से हैं बल्कि इसलिए क्योंकि वे ख्रीस्तीय हैं। उन शहीदों का रक्त हमें एक साथ लाता है जो शहीद स्वर्ग में एक हो चुके हैं जिस की खोज हम पृथ्वी पर करते हैं। संत पापा जोन पौल द्वितीय के परमाध्यक्षीय काल में ख्रीस्तीय एकता की विषयवस्तु का महत्व काफी प्रबल था जो प्रेरितिक विश्व पत्र उत उन्नुम सिंत में प्रकट हुआ है तथा आज भी संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तीय एकता पर जोर देते हैं। धर्म के नाम पर अत्याचार के शिकार लोगों में 80 प्रतिशत संख्या ख्रीस्तीयों की है। कार्डिनल ने कहा कि उन लोगों के लिए प्रार्थना करने के साथ-साथ उनके जीवन को समर्थन दिये जाने भी आवश्यकता है।

शांति निर्माण हेतु ख्रीस्तीय धर्मगुरूओं के बीच मित्रता कितना महत्वपूर्ण है खासकर, जहाँ शांति हमेशा दाँव पर रहती है इसके उत्तर में कार्डिनल कोच ने कहा कि आज की दुनिया में जहाँ एक दूसरे के प्रति हिंसा को भड़काया जाता है, धार्मिक नेताओं के लिए यह कहना आवश्यक है कि ईश्वर के नाम पर की गयी हिंसा धर्म का दुरुपयोग है। 

2017 ही वह साल था जिसमें लुथेरन सुधार की 5 शतवर्षीय जयन्ती मनायी गयी इसे भविष्य की कौन सी आशा दिखाई देती है?  

कार्डिनल कोच ने कहा कि ख्रीस्तीय एकता युग में यह सुधार की पहली यादगारी है। इससे पहले सुधार के हर यादगार विवादास्पद थे। इस वर्ष लुथेरनों ने सुधार की इस याद को सिर्फ अपने बीच नहीं मनाने का निश्चय किया बल्कि अन्य लोगों को भी शामिल किया जैसे संत पापा फ्राँसिस एवं लुंड में लुथेरन वर्ड फेडेरेशन के अध्यक्ष से मुलाकात, जो ख्रीस्तीय एकता वर्धक वार्ता का परिणाम है। 2017 ही वह वर्ष था जब संत निकोलास के अवशेष को बरी से मोस्को एवं सेंट पीटर्सबर्ग लाया गया था।

उन्होंने कहा कि कलीसियाओं के अधिकारियों का एक साथ मिलना अच्छा है किन्तु यदि लोग उसमें शामिल न हों तो हम आगे नहीं बढ़ सकते। अतः उन्होंने आशा व्यक्त की कि ख्रीस्तीय एकता के इस रास्ते पर बढ़ते हुए हम एकता की ओर आगे कदम बढ़ा पायेंगे। जैसा कि प्राधिधर्माध्यक्ष अथनागोरास ने कहा है कि हम काथलिक और ऑर्थोडॉक्स एक-दूसरे को प्यार करते हैं, हम एक ही विश्वास को प्रकट करते हैं। अब वह समय आ गया है जब हम एक ही यूखरिस्तीय मेज पर आयेंगे, यही ख्रीस्तीय एकता का अंतिम लक्ष्य है।


(Usha Tirkey)

30/12/2017 15:12