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क्रिसमस के अवसर पर गरीब एवं आदिवासी बच्चों की मदद करते काथलिक स्वयंसेवक

वियेतनाम की कलीसिया के एक प्रतीकात्मक तस्वीर - REUTERS

28/12/2017 15:52

हानोई, बृहस्पतिवार, 28 दिसम्बर 17 (एशियान्यूज़): वियेतनाम के खा क्वे काथलिक परिवार दल जिसकी स्थापना 16 दिसम्बर को, संत मार्टिन के पर्व दिवस पर की गयी है उसका उद्देश्य है क्रिसमस अवकाश के दौरान गरीब जनजातीय अल्पसंख्यकों की सहायता एवं समर्थन करना।

खा क्वे काथलिक परिवार दल के आध्यात्मिक संचालक फादर जोसेफ त्रान हू ओवान ने सदस्यों को निमंत्रण दिया है कि वे अपने दैनिक जीवन में संत मार्टिन के आदर्शों का पालन करें जो विनम्रता के आदर्श एवं ग़रीबों के प्रेमी थे।

एशियान्यूज़ से बातें करते हुए खा क्वे दल के एक सदस्य ने कहा, "वर्तमान में करीब 25 प्रतिशत लोग गरीब अथवा गरीबी की स्थिति में पड़ने की जोखिम में हैं।" 

फिर भी यहाँ हानोई में कई कार हैं अनेक इमारतें हैं एवं लाखों डॉलर खर्च किये जाते हैं तथा सरकारी अधिकारी एवं बड़े पूंजीपति फिजूल और विलासिता का जीवन व्यतीत करते हैं। जबकि, सघन जंगलों एवं सुदूर क्षेत्रों में बहुत सारे बच्चों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वे बिना जूते एवं कमीज के स्कूल जाते हैं।

ऐसी स्थिति में काथलिक लोग ग़रीबों एवं दुर्भाग्य पूर्ण बच्चों की मदद करना चाहते हैं, खासकर, क्रिसमस की छुट्टियों में।

एशियान्यूज़ के अनुसार हानोई परिवार दल के 26 सदस्यों ने ना फाक पल्ली एवं बाक कैन समुदाय के जनजातीय अल्पसंख्यकों से मुलाकात की। स्वयंसेवकों ने कहा, "जब हम पल्ली पहुँचे, तो हम विस्मित थे, पहले महीनों में वहाँ न तो कोई गिरजाघर था और न ही कोई पल्ली समिति। तब हमने विश्वास एवं माता मरियम से प्रार्थना के माध्यम से स्नेह एवं समर्थन प्राप्त किया। आज ना फाक पल्ली के विश्वासी आशा के साथ जी सकते हैं तथा यह एक मिशन स्थल बन गया है।

इस वर्ष की ख्रीस्त जयन्ती के अवसर पर कई युवा स्वयंसेवकों ने बान मैक, कुंग नहा और लुंग पु के सैंकड़ों आदिवासी दलों के साथ सहयोग, समर्थन एवं कार्य किया।

अन्य स्वयंसेवकों ने हानोई के गरीबों से मुलाकात की एवं उन्हें क्रिसमस के उपहार भेंट किये। उन्होंने काओ बंग-लांग सों धर्मप्रांत में सामाजिक और प्रेरितिक पहुँच की गतिविधियों का भी आयोजन किया।

विगत 30 सालों में वियेतनाम में गरीबी आश्चर्यपूर्ण ढंग से कम हुई है। 1993 में देश की आधी आबादी 1.90 डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से जीवन यापन करती थी जो आज बढ़कर 3 डॉलर हो गयी है। 1993 में करीब 60 प्रतिशत जनता गरीब थी जो 2014 में घटकर 13.5 प्रतिशत हो गयी है। 


(Usha Tirkey)

28/12/2017 15:52