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संत पापा ने कुरिया के कर्मचारियों को क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं

वाटिकन कर्मचारियों को क्रिसमस की शुभकामनाएं देते संत पापा - AFP

21/12/2017 16:46

वाटिकन सिटी, 21 दिसम्बर 17 (रेई): संत पापा ने बृहस्पतिवार को परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के सभी कर्मचारियों एवं उनके परिवार वालों से मुलाकात कर उन्हें ख्रीस्त जयन्ती की शुभकामनाएँ अर्पित की।

उन्होंने कहा, "क्रिसमस ईश्वर के पुत्र में विश्वास का त्योहार है जो मानव बन गये ताकि वे पुत्र होने की हमारी प्रतिष्ठा की रक्षा कर सकें जिसे पाप एवं अवज्ञ द्वारा खो दिया गया था। क्रिसमस हृदय में विश्वास का त्योहार है जो चरनी बन जाता है ताकि ईश्वर का स्वागत कर सके जो उनकी गरीबी में आशा, प्रेम एवं विश्वास के बीज अंकुरित करते हैं।"  

संत पापा ने कहा कि आज पुनः एक बार ख्रीस्त जयन्ती की शुभकामनाएँ देने का अवसर है। मैं आप लोगों को आनन्दमय ख्रीस्त जयन्ती पर्व एवं नये वर्ष की मंगलकामनाएँ अर्पित करता हूँ। यह क्रिसमस हमारी आँखों को खोल दे ताकि हम कृत्रिम, मिथ्या, दुर्भावनापूर्ण और नकली को त्याग सकें तथा महत्वपूर्ण, सच्चे, भले एवं वास्तविक चीजों को देख सकें।

संत पापा ने अपने संदेश में परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के बाह्य भाग पर प्रकाश डाला जिसमें उन्होंने उसके विभिन्न देशों के साथ संबंध, खासकर, विभिन्न कलीसियाओं (पूर्वी कलीसिया, ख्रीस्तीय एकता वर्धक वार्ता तथा अंतरधार्मिक वार्ता) के साथ संबंध रखने वाले विभागों पर गौर किया।

संत पापा ने सुधार कार्यों की ओर ध्यान आकृष्ट कर कहा कि यह आसान काम नहीं है इसके उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए धीरज, दृढ़ता और संवेदनशीलता की आवश्यकता है क्योंकि कुरिया एक प्राचीन, जटिल और सम्मान जनक संस्था है जिसकी रचना रोम के धर्माध्यक्ष की अध्यक्षता में ख्रीस्त की इच्छा पर सम्पूर्ण कलीसिया के हित विभिन्न संस्कृति, भाषा एवं सोच के लोगों से हुई है।

उन्होंने कहा कि इस तरह कुरिया की सेवा का विश्वव्यापी स्वभाव संत पेत्रुस की प्रेरिताई की व्यापकता से आरम्भ हुई है। अपने आप में बंद कुरिया अपने लोगों को धोखा दे सकती है और अंततः अपने आप को ही नष्ट कर सकती है। कलीसिया बहिर्मुखी है तथा संत पेत्रुस के मिशन में संलग्न है जो ईश वचन की सेवा है, सुसमाचार के प्रचार का कार्य। सुसमाचार यह है कि ईश्वर इम्मानुएल हैं जो हमारे बीच जन्में, हमारे समान बने ताकि हमें अपनी निकटता व्यक्त कर सकें। वे असीम प्रेम तथा सारी मानव जाति की मुक्ति की अपनी दिव्य अभिलाषा के कारण इस दुनिया में आये ताकि सभी लोग स्वर्ग राज्य का आनन्द प्राप्त कर सकें। वे ऐसे ईश्वर हैं जो अच्छे और बुरे सभी पर अपना सूर्य उगाते। वे सेवा कराने नहीं किन्तु सेवा करने आये। उन्होंने कलीसिया का निर्माण किया जो दुनिया में हो किन्तु दुनिया का न हो तथा मुक्ति एवं सेवा का माध्यम बने।

संत पापा ने कलीसिया का अन्य कलीसियाओं के साथ संबंध में समय के चिन्ह को पहचानने, सेवा में एक होने, सच्चाई के प्रति उदार, पवित्र आत्मा के प्रति आज्ञाकारी एवं अधिकारियों पर भरोसा रखने की आवश्यकता बतलायी।

संत पापा ने अंत में कहा कि ख्रीस्त जयन्ती विश्वास का त्योहार है। यह हमें स्मरण दिलाता है कि विश्वास जिसमें किसी तरह की परेशानी नहीं है वह सही विश्वास नहीं है और जो विश्वास हमें बढ़ने का अवसर नहीं देता उसे बढ़ने की आवश्यकता है। वह विश्वास जो प्रश्न नहीं करता उसे प्रश्न किये जाने की जरूरत है। जो विश्वास हमें नहीं झकझोरता उसे झकझोरे जाने की आवश्यकता है। संत पापा ने मानसिक स्तर के विश्वास को विश्वास का विचार मात्र कहा तथा बतलाया कि यह तभी वास्तविक हो सकता है जब यह हमारे हृदय, आत्मा, विचार एवं समस्त व्यक्तित्व का स्पर्श करता है। यह तभी संभव है जब यह हमारे हृदय रूपी चरनी में येसु को जन्म लेने दे, जब बेतलेहेम का तारा हमें उस स्थान तक ले चले, जहाँ ईश्वर के पुत्र लेटे हैं कोई राजा और धनी लोगों के बीच नहीं किन्तु गरीब एवं विनम्र लोगों के बीच।  


(Usha Tirkey)

21/12/2017 16:46