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रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

फलप्रद होना ईश्वर के आशीर्वाद का चिन्ह

संत मर्था में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा

19/12/2017 16:45

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 19 दिसम्बर 2017 (रेई): ईश्वर फलदाता हैं तथा वे चाहते हैं हम दूसरों के लिए जीयें एवं उन्हें अपना जीवन अर्पित करें। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

संत पापा ने खाली चरनी पर नजर डालने को कहा जो बालक येसु के आगमन का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा कि हम अपने हृदय रूपी चरनी को भी झाँक कर देखें, कहीं यह संग्रहालय की वस्तु के समान बंद पड़ा तो नहीं हैं?

प्रवचन में संत पापा ने संत लूकस रचित सुसमाचार से लिए गये उस पाठ पर चिंतन किया जहाँ योहन बपतिस्ता के जन्म की घोषणा स्वर्ग दूत द्वारा उस महिला को की गयी जो बूढ़ी हो चली थी।

संत पापा ने कहा, "उन दिनों बांझपन एक लज्जा की बात थी बल्कि एक बच्चे के जन्म को ईश्वर का आशीर्वाद एवं वरदान माना जाता था।" बाईबिल में कई बाँझ महिलाओं का जिक्र मिलता है जो बच्चे को जन्म देने की प्रबल अभिलाषा रखती थीं अथवा माताएँ जिन्होंने अपने पुत्रों की मृत्यु पर शोक मनाया क्योंकि वे बिना उतराधिकारी के रह गयी थीं, उदाहरण के लिए सारा, नोएमी, अन्ना एवं एलिजाबेथ। 

संत पापा ने याद किया कि "पृथ्वी को भर दो और फल उत्पन्न करो" यह पहला आदेश है जिसको ईश्वर ने हमारे पूर्वजों को दिया है। उन्होंने कहा, जहाँ ईश्वर हैं वहाँ परिपूर्णता है।"

संत पापा ने उन देशों की भी याद की जिन्होंने बाँझपन को अपनाया है। उन्होंने कहा कि वे एक गंभीर बीमार से जूझ रहे हैं, जनसंख्या की कमी की बीमारी। हम जानते हैं कि उनके बच्चे नहीं हैं। बच्चों से रहित देश आशीर्वाद से रहित है बल्कि पार हो जाना है। फलप्रद होना हमेशा एक आशीर्वाद होता है।   

संत पापा ने कहा कि मातृत्व एवं आध्यात्मिक परिपूर्णता जीवन देता है। एक व्यक्ति पुरोहितों अथवा समर्पित व्यक्ति की तरह शादी न भी करे फिर भी वह दूसरों को जीवन देते हुए जी सकता है। धिक्कार हमें यदि हम भले कार्यों द्वारा फल उत्पन्न नहीं कर सकते हैं। फलप्रद होना ईश्वर का चिन्ह है।

संत पापा ने याद किया कि नबियों ने प्रतीक के रूप में बंजर भूमि को चुना। बंजर भूमि से अधिक निष्फल और क्या हो सकता है फिर भी वे कहते हैं कि बंजर भूमि में पौधे लहलहायेंगे। यह निश्चय ही ईश्वर की प्रतिज्ञा है क्योंकि ईश्वर फलदाता हैं।

संत पापा ने शैतान से चौकस रहने की सलाह देते हुए कहा, "यह सच है कि शैतान बाँझपन पसंद करता है। वह नहीं चाहता कि हम आध्यात्मिक और शारीरिक दोनों तरह के जीवन देने के लिए जीयें। वह चाहता है कि हम केवल अपने आप के लिए जीयें, स्वार्थ, घमंड और अभिमान का जीवन व्यतीत करें। शैतान वह है जो अहम का बीज बोता है तथा फल लाने नहीं देता।"  

संत पापा ने संतान को जन्म देना आशीर्वाद बतलाते हुए कहा कि बच्चों का होना एक कृपा है जो हमारे मर जाने पर हमारी आँखों को बंद कर देते हैं।

संत पापा ने चरनी की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि यहाँ एक खाली चरनी है। यह आशा का प्रतीक है क्योंकि इसमें बालक येसु का आगमन होगा। हमारा हृदय भी एक चरनी के समान है। उन्होंने चिंतन हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि मेरा हृदय कैसा है? क्या यह हमेशा खाली रहता है या जीवन देने एवं ग्रहण करने के लिए सदा खुला? अन्यथा यह एक संग्रहालय की वस्तु के समान हो जाएगा जो जीवन के लिए कभी खुला नहीं होता और न ही जीवन देता है।

अंततः संत पापा ने खाली चरनी की ओर देखते हुए येसु से प्रार्थना की, प्रभु आइये, चरनी को भर दीजिए, मेरे हृदय को तथा मुझे जीवन को, मुझे देने और फल दायक बनने हेतु बल प्रदान कर।


(Usha Tirkey)

19/12/2017 16:45