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रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

ईश्वर की कोमलता उनके प्रेम एवं दया में

संत मर्था में ख्रीस्याग अर्पित करते संत पापा

14/12/2017 16:49

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 14 दिसम्बर 2017 (रेई): ईश्वर की कोमलता, उनकी परिभाषात्मक विशेषता के रूप में है। यही संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए संत पापा फ्राँसिस के प्रवचन का केंद्र बिन्दु था।

संत पापा ने प्रवचन में नबी इसायस के ग्रंथ एवं स्तोत्र ग्रंथ से लिए गये पाठों पर चिंतन किया जहाँ ईश्वर की कोमलता का वर्णन किया गया हैं, "... उनकी कोमलता समस्त सृष्टि पर व्याप्त है।"

नबी इसायस द्वारा ईश्वर की जो छवि प्रस्तुत की गयी है उसमें वे हमारे साथ उसी तरह का व्यवहार करते हैं जिस तरह एक पिता अपने बच्चे के साथ करता है। सबसे पहले वे स्नेह से आश्वासन देते हैं, "डरो मत, मैं तुम्हारी सहायता करूँगा।"

संत पापा ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि ईश्वर हमें एक लोरी सुनाना चाहते हैं। उनकी कोमलता इस बात में प्रकट होती है कि वे एक पिता और एक माता है।" कई बार उन्होंने कहा है, "यदि एक माँ अपने दुधमुँहे बच्चे को भूला दे तो भी मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगा। वे हमें अपने अति करीब रखते हैं। वे एक ऐसे ईश्वर हैं जो अपनी बातचीत द्वारा अपने आप को हमारे लिए छोटा बनाते हैं ताकि हम उन्हें समझ सकें, उनपर विश्वास कर सकें तथा संत पौलुस के समान साहस के साथ कह सकें, "अब्बा पिता"। यही ईश्वर की कोमलता है।"

महानता में विनम्रता और विनम्रता में महानता

संत पापा ने कहा कि यह सच है कि ईश्वर अपने हाथों से सहलाते हैं। वे महान हैं किन्तु अपनी कोमलता के साथ वे हमारे पास आते और हमें बचाते हैं जो एक रहस्य है, एक अति सुन्दर बात। 

"वे महान ईश्वर हैं किन्तु अपने को विनम्र बनाते हैं तथा उनकी विनम्रता में वे महान बने रहना नहीं छोड़ते। उनकी महानता उन्हें विनम्र बनाता है तथा उनकी विनम्रता में दीन महान बनता है। ख्रीस्त जयन्ती हमें इसे समझने में मदद देता है। उस चरनी में ईश्वर बालक बनकर आते हैं। संत थोमस "दिव्य क्या है एवं सबसे दिव्य चीज क्या है" का उत्तर देते हुए कहते हैं, ‘बड़ी चीजों के प्रति भय नहीं रखना किन्तु छोटी चीजों को मन में रखना। दोनों एक साथ ईश्वरीय या दिव्य का निर्माण करते हैं।

किन्तु ईश्वर की कोमलता कहाँ परिलक्षित होती है? ईश्वर न केवल हमारी मदद करते किन्तु आनन्द, महान फसल तथा आगे बढ़ने का आश्वासन देते हैं। 

संत पापा ने विश्वासियों से प्रश्न किया कि क्या मैं उनके साथ पिता की तरह बात कर सकता हूँ अथवा भय खाता हूँ? ईश्वर की कोमलता का ईशशास्त्र में क्या स्थान है? ईश्वर की कोमलता कहाँ पायी जाती है? वह कौन सा स्थान है जहाँ ईश्वर की कोमलता स्पष्ट रूप से प्रकट होती है? उनके घावों में, जब मेरे घाव उनके घावों से मिल जाते हैं तब हम उनके घावों से चंगाई प्राप्त करते हैं।

संत पापा ने भले समारितानी के दृष्टांत की याद की जिसमें एक व्यक्ति घायल व्यक्ति के घावों पर मरहम पट्टी लगाता है तथा उसके स्वास्थ्य लाभ के लिए कीमत चुकाता है। उन्होंने कहा ईश्वर की कोमलता का ईशशास्त्री स्थल है हमारा घाव। संत पापा ने ईश्वर के उस निमंत्रण पर चिंतन करने की सलाह दी जिसमें वे लोगों से कहते हैं, आओ, अपने घावों को मुझे दिखाओ मैं उन्हें चंगा करना चाहता हूँ।  


(Usha Tirkey)

14/12/2017 16:49