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भारतीय महाधर्मप्रांत कंधमाल के शहीदों के सबूत इकट्ठा करने को तैयार

कंधमाल के शहीदों के स्मारक के पास प्रार्थना करते हुए कटक-मुनेशवर के महाधर्माध्य7 जोन बरवा - RV

06/12/2017 16:01

कटक भुनेश्वर, बुधवार 6 दिसम्बर 2017 (मैटर्स इंडिया) : कटक-भुनेश्वर महाधर्मप्रांत हिंदू चरमपंथियों द्वारा 2008 में ईसाई-विरोधी हिंसा के शिकार कंधमाल के शहीदों के संत प्रकरण हेतु सबूत इकट्ठा करने को तैयार है। कटक-भुनेश्वर महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष जोन बरवा ने 3 दिसम्बर को फादर पुरुषोत्तम नायक को कंधमाल के लगभग 100 शहीदों के सबूत इकट्ठा करने और दस्तावेजों को तैयार करने के लिए मनोनीत किया।

महाधर्माध्यक्ष बरवा ने कहा कि हिंसा के शिकार 100 लोगों को शहीद घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए याचिका पेश करने का यह उपयुक्त समय है। फादर नायक 1 जनवरी 2018 से अपना काम शुरु करेंगे। महाधर्माध्यक्ष बरवा ने इसे महाधर्मप्रांत का "महत्वपूर्ण और पवित्र कार्य" कहा। फादर नायक ओडिशा धरमाध्यक्षीय क्षेत्रीय परिषद के उप सचिव और महाधर्माध्यक्ष के निजी सचिव हैं। फादर नायक का जन्मस्थान कंधमाल है।

महाधर्माध्यक्ष के अनुसार फादर नायक,"हिंसा में मारे गये लोगों के नामों की सूची, प्रस्तावित व्यक्तियों की जीवनी, महत्वपूर्ण गुणों का एक रिपोर्ट, उनकी पवित्रता की प्रतिष्ठा, उनकी मध्यस्ता से यदि किसी भी तरह की कृपा मिली हो, या संत प्रकरण के मार्ग में आने वाले  किसी भी तरह की संभावित बाधायें तथा उनकी मौत के प्रत्यक्ष दर्शियों की सूची एकत्र करेंगे।

पिछले जनवरी मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष और एफएबीसी के अध्यक्ष कार्डिनल ग्रेसियस ओसवाल्ड ने मैटर्स इंडिया को बताया कि संत प्रकरण हेतु गठित परमधर्मपीठ के अध्यक्ष कार्डिनल अंजेलो अमातो ने कंधमाल के शहीदों के संत प्रकरण की प्रक्रिया हेतु विशेष जिज्ञासा ओर रुचि दिखलाई थी। कार्डिनल ग्रेसियस जो संत पापा के 9 विशेष सलाहकारों में से एक हैं, ने महाधर्माध्यक्ष बरवा को प्रक्रिया शुरु करने के लिए कह चुके हैं।

ओडिशा के कंधमाल क्षेत्र में दलित और ईसाई आदिवासियों के बीच हुए हिंसा में लगभग सौ से अधिक मौतें हुई. ये हिंसा पहले दिसंबर 2007 में हुई और उसके बाद ज्यादा भयावह तौर पर अगस्त 2008 में हुई. अगस्त 2008 की हिंसा के पीछे स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या को ज़िम्मेवार ठहराया गया, जिसकी हक़ीक़त यह है कि पूरी प्रशासनिक रिपोर्ट ये बताती है कि स्वामी की हत्या की जिम्मेवारी नक्सलवादियों ने अपने उपर लिया था। लेकिन हिंदुत्ववादी शक्तियों ने ख्रीस्तीयों के विरुद्ध अपने ज़हरीले अभियान से पूरे मसले को इसाई विरोधी हिंसा में तब्दील कर दिया।

 स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले मानवाधिकार संगठनों ने इस हिंसा में मरने वालों की संख्या सौ से ऊपर बताई है। 600 से अधिक गाँवों को ध्वस्त किया गया और 5600 घरों को लूटा और जलाया गया, जिसमें लगभग 54000 लोग बेघर हो गए. 295 गिरजाघर और अन्य पूजास्थल तोड़ डाले गए। लगभग 30 हज़ार लोग रिलीफ़ कैम्पों में रह रहे हैं और अभी तक विस्थापित ही हैं।  13 स्कूल, कालेज, स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यालय, लेप्रोसी सेंटर आदि भी नष्ट कर दिए गए। लगभग 2000 लोगों को ख्रीस्तीय धर्म छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। भय और विस्थापन के चलते 10 हज़ार बच्चे स्कूल छोड़ने पर मजबूर हो गए थे।


(Margaret Sumita Minj)

06/12/2017 16:01