Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

संत पापा फ्राँसिस \ प्रेरितिक यात्रा

उड़ान में संत पापा के साथ पत्रकारों का सम्मेलन

उड़ान में संत पापा के साथ पत्रकारों का साक्षात्कार - AFP

04/12/2017 15:38

विमान, सोमवार,4 दिसम्बर 2017 (वीआर,रेई) : शनिवार 2 दिसम्बर को संत पापा फ्राँसिस ने म्यांमार और बांग्लादेश की प्रेरितिक यात्रा के बाद रोम वापस लौटने के लिए विमान की उड़ान भरने के दौरान संवाददाताओं से बातचीत की।

पत्रकारों के साथ साक्षात्कार में रोहिंग्या, परमाणु हथियार, वैश्वीकरण और भविष्य की यात्रा योजनाएं आदि विषयों पर चर्चा की गई थीं।

वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक और वाटिकन प्रवक्ता ग्रेग बर्क ने संत पापा को इन दो देशों को अपनी प्रेरितिक यात्रा के चुनाव हेतु धन्यवाद दिया। दो बहुत ही भिन्न देश है पर कुछ बातें एक सी हैं जैसे दोनों देशों में काथलिक कलीसिया बहुत ही सक्रिय है। वहाँ के युवाओं में जोश,आनंद और समाज सेवा की भावना देखने की मिली। हमने बहुत कुछ देखा और सीखा। हमें बहुत खुशी होगी अगर आप हमसे साझा करेंगे जो आपने देखा और सीखा।

संत पापा ने सभी पत्रकारों का अभिवादन कर उनके कामें के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, ″जैसे कि ग्रेग ने कहा... दो भिन्न देश परंतु बहुत ही पारंपरिक, संजादा, समृद्ध संस्कृतियों वाले बहुत ही दिलचस्प देश हैं। इसके लिए, मुझे लगता है कि आपका काम बहुत ज्यादा रहा होगा। बहुत बहुत धन्यवाद।

 स्पेन के राष्ट्रीय रेडियो के सगरारियो रुइज ने कहा कि रोहिंग्यों संकट का असर इस यात्रा पर भी पड़ा है। कल, उन्हें बांग्लादेश में रोहिंग्या नाम से बुलाया गया था। क्या आपको बर्मा में भी इस नाम से उन्हें बुलाने की इच्छा थी और कल जब आपने माफी मांगी तो आपने क्या महसूस किया?

संत पापा ने कहा कि यह पहली बार नहीं है उन्होंने सबके सामने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में देव दूत प्रार्थना के उपरांत और आमदर्शन समारोह में उन्होंने कई बार कहा है। ″मेरे लिए महत्वपूर्ण है कि मैं जो कहना चाहता हूँ मेरा संदेश उनलोगों तक पहुँचे और इसके लिए मैं एक एक करके चीजों को कहना चाहता हूँ और उनका उत्तर सुनना चाहता हूँ। मुझे दिलचस्पी थी कि यह संदेश उन तक पहुँच जाए। मैंने देखा कि यदि आधिकारिक भाषण में मैं उस शब्द को कहा होता, तो शाएद मैं मेरे और उनके बीच दरवाजा बंद कर देता और मेरा संदेश उन तक नहीं पहुँच पाता। लेकिन मैंने उन्हें बिना चोट पहुंचाये इसे वर्णित किया, तथा निजी बातचीत में मैंने खुलकर बातें की और इससे मैं संतुष्ट हूँ। मैंने सार्वजनिक रुप से उनकी निंदा या उनके चेहरे पर तमाचा मारने का आनंद नहीं लिया पर मैं उनके साथ वार्तालाप से संतुष्ट हूँ।

मुझे मालुम था कि मैं रोहिंग्या लोगों से मिलुँगा पर कब और कहाँ यह मैं नहीं जानता था। अंतरधार्मिक सभा सम्मेलन के बाद रोहिंग्यों से एक एक करके मेरी मुलाकात हुई। वे तुरंत बाहर निकलना चाहते थे, पर मुझसे उन्हें बिना कुछ कहे रहा नहीं गया, मैंने माइक हाथ में लिया और मुझे मालुम नहीं मैंने क्या कहा पर मैंने उनसे दो बार क्षमा मांगी। मेरी आँखों में आँसु थे उन्हें छिपाने की कोशिष की पर नाकाम रहा। मैं रोया और वे भी रोये।   मैंने अन्य धर्म के नेताओं को भी उनसे मिलने के लिए आमंत्रित किया। अंत में उनके लिए प्रार्थना करने हेतु आग्रह करने पर इमाम ने प्रार्थना की और हमारे साथ उन्होंने भी प्रार्थना की। मैं सोचता हूँ कि मैं जो संदेश देना चाहता था वह संदेश सभी तक पहुंच गया।

  भारतीय पत्रिका ‘दीपिका’ के संपादक जोर्ज काल्लिवायालिल ने कहा कि भारत यात्रा की इच्छा आपने प्रकट की थी  लाखों ख्रीस्तीय भारत में आपके आगमन की आस लगाये हुए हैं। पर हम जानना चाहेंगे कि वास्तव में न जाने का क्या कारण है और क्या हम 2018 में आपकी भारत यात्रा की आशा कर सकते हैं?

संत पापा ने कहा कि शुरु में भारत और बांग्लादेश जाने की योजना थी लेकिन तब भारत जाने की प्रक्रिया में देरी हो रही थी और समय आगे बढ़ रहा था इसलिए मैंने इन दोनों देशों को चुना,बांग्लादेश और उसी से लगा म्यान्मार। यह ईश्वर की ही योजना होगी क्योंकि भारत की यात्रा के लिए, एक अकेले ट्रिप की आवश्यकता है,  भारत के विभिन्न संस्कृतियों के बीच उत्तर दक्षिण, मध्य, पूर्व-पच्छिम में जाना होगा। अगर मैं जीवित रहूँगा तो मुझे 2018 में ऐसा करने की उम्मीद है! लेकिन पहले भारत और बांग्लादेश की यात्रा का विचार था, फिर समय ने हमें इस विकल्प को बनाने के लिए मजबूर किया। 


(Margaret Sumita Minj)

04/12/2017 15:38