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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ प्रेरितिक यात्रा

संत पापा ने धर्माध्यक्षों से नबी की आवाज बने रहने का आग्रह किया

म्यानमार के धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा फ्राँसिस - ANSA

29/11/2017 16:09

यांगोन, बुधवार, 29 नवम्बर 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने यांगून में म्यानमार के 22 धर्माध्यक्षों से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्हें संदेश देते हुए कहा, "मैं अपने विचारों को तीन शब्दों में व्यक्त करना चाहता हूँ- चंगाई, साहचर्य और भविष्यवाणी।

चंगाई - सुसमाचार जिस पर हम शिक्षा देते हैं वह सबसे बढ़कर चंगाई, मेल-मिलाप एवं शांति का संदेश है। क्रूसित येसु के लोहू द्वारा ईश्वर ने संसार के साथ मेल-मिलाप कर लिया है तथा हमें उस चंगाई की कृपा के संदेशवाहक बनने भेजा है। यहाँ म्यानमार में उस संदेश की गूँज खास हैं जब यह देश विभाजन की खाई को पाटने का प्रयास कर रही है तथा राष्ट्रीय एकता का निर्माण करने हेतु प्रयत्नशील है। उन्होंने कहा कि आपकी भेड़ें जो अपने आप में संघर्ष के चिन्ह धारण किये हुए हैं तथा अपने विश्वास एवं प्राचीन परम्परा के साक्ष्य में हिंसा का सामना किया है उनके लिए सुसमाचार की शिक्षा सांत्वना एवं बल का स्रोत बने और यह देश के जीवन में एकता, प्रेम एवं चंगाई को प्रोत्साहन दे क्योंकि एकता की उत्पति जो विविधता से होता है लोगों की पृथकता को आपसी समृद्धि एवं विकास के रूप में महत्व देती है। यह लोगों को मुलाकात एवं एकात्मता की संस्कृति के लिए निमंत्रण देती है।   

संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्षीय कार्य में वे प्रभु के मार्गदर्शन से प्रेरित हों तथा अपने प्रयासों में चंगाई और कलीसियाई जीवन के हर स्तर पर एकता को बढ़ावा देने का प्रयास करें ताकि क्षमाशीलता के उदाहरण एवं मेल-मिलाप के स्नेह द्वारा ईश्वर की पवित्र प्रजा उन हृदयों के लिए नमक और ज्योति बन सकें जो उस शांति की खोज कर रही है जिसे दुनिया नहीं दे सकती। म्यानमार की काथलिक कलीसिया ईश्वर एवं पड़ोसी के प्रति प्रेम के साक्ष्य के लिए गर्व महसूस कर सकती है जिसको वह ग़रीबों, नागरिकता से वंचित लोगों तथा खासकर, इन दिनों विस्थापितों की मदद द्वारा व्यक्त कर रही है।

संत पापा ने उन सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट किया जो भले समारितानी की तरह बड़ी उदारता से अपने जरूरतमंद भाई-बहनों पर जाति और धर्म का भेदभाव किये बिना चंगाई की मरहम पट्टी लगाते हैं।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता एवं अंतरधार्मिक वार्ता हेतु प्रोत्साहन देते हुए कहा कि उनका चंगाई कार्य विशेष रूप से ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता एवं अंतरधार्मिक वार्ता के प्रति समर्पण में व्यक्त होता है। 

मैं प्रार्थना करता हूँ कि वार्ता हेतु सेतु निर्माण के आपके निरंतर प्रयास तथा अन्य धर्मावलम्बियों के साथ सहयोग द्वारा शांतिपूर्ण संबंध से, राष्ट्र के जीवन में मेल-मिलाप का महान फल उत्पन्न हो। यांगून में पिछले साल हुए अंतरधार्मिक सम्मेलन की याद कर संत पापा ने कहा कि इसके द्वारा विश्व को एक शक्तिशाली संदेश मिला कि विभिन्न धर्मों के लोग शांति के साथ रह सकते हैं एवं हर तरह के हिंसक कृत्य एवं धर्म के नाम पर घृणा के भाव को त्यागा जा सकता है।

साहचर्य - संत पापा ने अपने दूसरे शब्द पर प्रकाश डालते हुए कहा, "एक भला चरवाहा अपने झुण्ड के बीच हमेशा उपस्थित रहता है, उनके बगल में चलते हुए उनका मार्गदर्शन करता है। उन्हें अपनी भेड़ों की गंध पहचाननी चाहिए। हमारे समय में हम ऐसा कलीसिया में बुलाये गये हैं जो बाहर जाती है जिससे कि ख्रीस्त के प्रकाश को सुदूर क्षेत्रों में पहुँचा सके। एक धर्माध्यक्ष रूप में आपका जीवन एवं कार्य मिशनरी भावना का आदर्श हो, सबसे बढ़कर, पल्लियों एवं अपने धर्मप्रांत के धर्मसंघी समुदायों में नियमित प्रेरितिक दौरा द्वारा। एक प्रेमी पिता के रूप में यह आपका विशेषाधिकार प्राप्त माध्यम है कि आप अपने पल्लियों का साथ, पवित्रता, निष्ठा और सेवा की भावना में उनके दैनिक प्रयासों में दें।"

ईश्वर की कृपा द्वारा म्यानमार की कलीसिया ने एक मजबूत विश्वास तथा सजीव मिशनरी भावना प्राप्त किया है उनके द्वारा जिन्होंने इस धरती पर सुसमाचार को लाया। इस दृढ़ नींव पर और अपने पुरोहितों, धर्मसमाजी समुदायों एवं लोकधर्मियों के साथ सुसमाचार के संदेश का दैनिक जीवन और स्थानीय परम्परा में विवेकी आचरण की खोज करें। इस संबंध में प्रचारकों का योगदान महत्वपूर्ण है अतः उनके प्रशिक्षण एवं विकास पर ध्यान देना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। 

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को परामर्श दिया कि वे युवाओं का साथ देने हेतु विशेष प्रयास करें। नैतिक सिद्धांतों में उनके विकास हेतु उनसे जुड़े रहें जो उन्हें तेजी से बदलते विश्व की चुनौतियों का सामना करने में मार्गदर्शन प्रदान करेगा। आगामी सिनॉड में धर्माध्यक्ष न केवल इन मुद्दों पर विचार करेंगे किन्तु वे सीधे युवाओं से जुड़ेंगे, उनकी बातों को सुनेंगे तथा उन्हें आम विचार-विमर्श में शामिल करेंगे कि आने वाले दिनों में सुसमाचार का प्रचार बेहतर रूप में किया जा सके। युवा म्यानमार की कलीसिया का एक महान वरदान है, विशेषकर, गुरूकुल छात्र एवं युवा धर्मसमाजियों की बड़ी संख्या इसका प्रमाण है। सिनॉड की भावना में उनकी विश्वास यात्रा में उनका साथ एवं समर्थन दिया जाए। वे अपनी विचारधारा और जूनून के कारण समकालीन निष्ठापूर्ण सुसमाचार प्रचार के द्वारा वे आनन्द के लिए बुलाये गये हैं। 

भविष्यवाणी – संत पापा ने तीसरे शब्द भविष्यवाणी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि म्यानमार की कलीसिया शिक्षा, उदार कार्यों, मानव अधिकारों की रक्षा एवं प्रजातांत्रिक नियमों के समर्थन द्वारा सुसमाचार का साक्ष्य दैनिक जीवन में दे रही है। 

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को प्रोत्साहन दिया कि वे काथलिक समुदाय को, राष्ट्र के हित संबंधी मामलों में उनकी आवाज बनकर समाज के जीवन में रचनात्मक भूमिका अदा करने में सहयोग देने हेतु प्रेरित करें, खासकर, सभी की मानव प्रतिष्ठा एवं अधिकार के सम्मान को दृढ़ता प्रदान करने के द्वारा। संत पापा ने आशा व्यक्त की कि पांच साल की प्रेरितिक रणनीति जिसको कलीसिया ने बृहद पृष्टभूमि पर राष्ट्र-निर्माण हेतु बनाया है वह भविष्य में अत्यधिक फल उत्पन्न करेगा, न केवल स्थानीय समुदायों में किन्तु पूरे देश में। उन्होंने कहा कि मैं यहाँ पर्यावरण की सुरक्षा तथा देश के समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के सही प्रयोग की विशेष आवश्यकता महसूस करता हूँ ताकि भावी पीढ़ी को भी इसका लाभ मिल सके। ईश्वर प्रदत्त सृष्टि के वरदान की सुरक्षा को स्वस्थ मानव और सामाजिक पारिस्थितिकी से अलग नहीं किया जा सकता। वास्तव में, प्रकृति के साथ हमारे संबंधों की सच्ची देखभाल जो भाईचारा, न्याय एवं दूसरों के साथ निष्ठावान बनें रहने के द्वारा प्रकट होता है उसे अलग नहीं किया जा सकता।

संत पापा ने सभी धर्माध्यक्षों के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हुए प्रार्थना की कि उनकी एकतापूर्ण उपस्थिति उन्हें निष्ठावान चरवाहे बने रहने तथा ख्रीस्त प्रदत्त झुण्ड की सेवा में उनके समर्पण को बल प्रदान करे।

संत पापा ने उन्हें आध्यात्मिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य की भी चिंता करने की सलाह दी तथा पुरोहितों के स्वास्थ्य का ख्याल रखने का प्रोत्साहन दिया। उन्हें दैनिक प्रार्थना में बढ़ने और ईश्वर के क्षमाशील प्रेम का अनुभव करने की प्रेरणा दी क्योंकि एक पुरोहित की पहचान, उसके प्रवचन और प्रेरितिक उदारता का स्रोत इसी पर आधारित है जिसके द्वारा वे पवित्रता एवं सच्चाई के रास्ते पर ईश प्रजा का संचालन करते हैं।  

 संत पापा ने म्यानमार के सभी विश्वासियों, धर्मसमाजियों एवं याजकों पर ईश्वर की आशीष की कामना की तथा उनसे प्रार्थना का आग्रह किया।

 


(Usha Tirkey)

29/11/2017 16:09