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संत पापा ने पूर्वी असीरियाई कलीसिया के संवाद आयोग से मुलाकात की

काथलिक कलीसिया और पूर्वी असीरियाई कलीसिया के ईशशास्त्रीय संवाद के संयुक्त आयोग के सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस - AFP

25/11/2017 13:43

वाटिकन सिटी, शनिवार 25 नवम्बर 2017(वीआर, रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 24 नवम्बर को काथलिक कलीसिया और पूर्वी असीरियाई कलीसिया के ईशशास्त्रीय संवाद के संयुक्त आयोग के सदस्यों से मुलाकात की।

संत पापा ने वाटिकन में महाधर्माध्यक्ष मीलिस जाइया और प्रतिनिधियों का अभिवादन कर उन्हें "संयुक्त घोषणा में हस्ताक्षर के लिए" ईश्वर को धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कहा, ″आज की सभा में मैं 1994 में सामान्य ख्रीस्टोलोजी घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के बाद से संयुक्त आयोग द्वारा की गई लम्बी यात्रा के फलस्वरुप उनके संयुक्त प्रयास की याद करता हूँ। देह धारण के रहस्य में एक ही विश्वास को प्रकट करने के बाद, आयोग ने संवाद के दो चरणों की योजना बनाई : एक संस्कार संबंधी धर्मशास्त्र पर और एक कलीसिया के संविधान पर। आज हमने संस्कार संबंधी धर्मशास्त्र पर संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किया है।, ″अब हम अधिक आत्मविश्वास के साथ भविष्य को देख सकते हैं और प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि आपके निरंतर प्रयास द्वारा लम्बे समय से प्रतीक्षा की गई वह घड़ी आ जाये जब हम एक ही बलि वेदी पर येसु ख्रीस्त की कलीसिया के रुप में यूखारिस्तीय बलिदान समारोह मना सकेंगे।″ 

संत पापा ने कहा,″मैं नए संयुक्त घोषणा के एक पहलू पर बल देना चाहूँगा, जहाँ क्रूस का संकेत "सभी पवित्र समारोहों में एकता का एक स्पष्ट प्रतीक" कहा गया है। पूर्वी असीरियाई कलीसिया के कुछ लेखकों ने क्रूस के चिह्न को पवित्र रहस्यों के बीच शामिल किया है। उनका विश्वास है कि प्रत्येक धर्म-संस्कार उत्सव प्रभु की मृत्यु और पुनरुत्थान के रहस्य पर निर्भर करता है। यह एक सुंदर अंतर्दृष्टि है, क्योंकि क्रूस पर चढ़ाया गया और जी उठने वाले प्रभु ही हमारे उद्धारकर्ता और हमारे जीवनदाता हैं। आशा और शांति अपने गौरवशाली क्रूस से आती है और इसी क्रूस के कारण हमारी एकता संभव है क्योंकि हमने उनकी मृत्यु का बपतिस्मा ग्रहण कर उनके साथ इसलिए दफनाये गये हैं कि जिस तरह मसीह पिता के सामर्थ्य से मृतकों में से जी उठे हैं, उसी तरह हम भी एक नया जीवन जीयें। ( रोमियों 6:4)

संत पापा ने कहा कि जब कभी हम क्रूस का चिन्ह बनाते हैं तो क्रूसित प्रभु येसु के बलिदान की याद करते हैं। तथा उनकी भी याद करते हैं जो प्रतिदिन अपने कंधों पर भारी क्रूस उठाते हुए अपने विश्वास की गवाही दे रहे हैं। असीरियाई कलीसिया और दूसरी कलीसिया के भाई-बहनों को कट्टरपंथी उग्रवादियों के क्रूर कृत्यों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह के दुखद परिस्थिति गरीबी, अन्याय और सामाजिक बहिष्कार और अस्थिरता, सूखा, अकाल और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी होती है। क्रूस का चिन्ह हमेशा यह याद दिलाता है कि करुणमय प्रभु हमें कभी भी अकेला नहीं छोड़ते। दुख तकलीफों में वे हमारे साथ हैं और हमारे साथ दुख सहते हैं।

संत पापा ने कहा, ″सीरियाई परम्परा में, क्रूसित मसीह को अच्छे चिकित्सक और जीवन की दवा के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। मेरी प्रार्थना हैं कि वे हमारे अतीत के घावों को और कई ऐसे घावों को जो हिंसा और युद्ध के कहर की वजह से जारी है, उन सभी को पूर्णतः चंगा कर देंगे। आइए हम सामंजस्य और शांति की तीर्थ यात्रा पर एक साथ आगे बढें  जिसे ईश्वर ने हमारे लिए स्थापित किया है!″

अंत में संत पापा ने उनकी प्रतिबद्धता के लिए आभार के साथ उन्हें प्रेममयी माता मरियम के संरक्षण में सिपूर्द किया।  


(Margaret Sumita Minj)

25/11/2017 13:43