Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

विश्व की घटनायें \ विश्व

यमन में नाकेबंदी के बाद भुखमरी के हालात

यमन की राजधानी साना में गैस की आपूर्ति के लिए खाली गैस सिलेंडरों की लाइन - AFP

15/11/2017 16:23

यमन, बुधवार,15 नवम्बर 2017 (रेई) : संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) 6 नवंबर से जमीन, समुद्र और वायु सीमाओं पर नाकेबंदी होने के बाद यमन में लोगों की स्थिति के बिगड़ने से चिंतित हैं। उन्होंने गम्भीर चिन्ता जताते हुए कहा है कि अगर यमन में हवाई, समुद्री और जमीनी रास्तों से मदद पहुँचाने की खुली इजाज़त और सुविधा नहीं मिली तो ऐसा अकाल पड़ सकता है जिसमें लाखों लोगों की भी जान जा सकती है।

सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबन्धन ने हूती विद्रोहियों द्वारा हाल ही में राजधानी रियाध पर एक मिसाइल हमले के बाद यमन जाने वाले सभी रास्ते बन्द कर दिए थे।

संयुक्त राष्ट्र के सहायता कार्यों के मुखिया मार्क लोकोक  ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सऊदी अरब द्वारा इस तरह की नाकेबन्दी करने से बहुत बुरे हालात पैदा हो जाएंगे। अगर यमन में सहायता राशि पहुँचाने के लिए तुरन्त इन्तजाम नहीं किए गए तो लाखों लोगों की ज़िन्दगी के लिए अकाल के हालात बन जाएंगे।

सीमाओं के बंद होने के कारण सहायता सामग्री पहुँचाने पर प्रभाव पड़ा। करीब 280,000 आंतरिक विस्थापित व्यक्तियों के लिए यूएनएचसीआर की आपातकालीन सहायता निधि अवरुद्ध कर दी गई है। परिवहन के लिए आवश्यक ईंधन की कमी के कारण यूएनएचसीआर के कर्मचारियों को भी देश के बाहर और अंदर भी गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

यमन अपने नागरिकों की रोजमर्रा की खाद्य और अन्य जरूरतें पूरी करने के लिए करीब 90 प्रतिशत सामान का आयात करता है।

यमन की करीब 70 लाख आबादी अन्तरराष्ट्रीय सहायता पर ही निर्भर है।

विदित हो कि यमन में सुन्नी और शिया मुसलमानों के झगड़े ने अकाल के हालात पैदा कर दिए हैं। वहाँ सरकार सुन्नी मुसलमानों की है जिसे सऊदी अरब की सरकार समर्थन दे रही है।

शिया विद्रोही यमन सरकार के खिलाफ बगावत कर रहे हैं और इन शिया विद्रोहियों को ईरान सरकार का समर्थन हासिल है।


(Margaret Sumita Minj)

15/11/2017 16:23