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कारितास इंडिया अन्य धर्मों के स्वयंसेवकों को अपने साथ मिलाना चाहती है

कारितास इंडिया का प्रतीक - RV

15/11/2017 15:48

नई दिल्ली, बुधवार,15 नवम्बर 2017 (उकान) : भारतीय काथलिक कलीसिया की उदारवादी संस्था ‘कारितास इंडिया’ देश के सामाजिक विकास हेतु कार्य करने के लिए अन्य धर्मों के स्वयंसेवकों का खोज कर रही है।

कारितास इंडिया के कार्यकारी निदेशक फादर फ्रेडरिक डिसूजा ने कहा, "कुछ गैर-सरकारी संगठन केवल आवश्यक समय में अल्पकालिक सहायता प्रदान करते हैं,जैसे प्राकृतिक आपदाओं के समय  भोजन और आवश्यक सामग्री बांटते है जो लोगों को दीर्घकालिक परिवर्तन के लिए सशक्त नहीं करता है।"

कारितास इंडिया ने 9-10 नवम्बर को दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया था। इस सम्मेलन में देश के सामाजिक विकास में स्वयंसेवको की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला गया। विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से करीब 300 स्वयंसेवकों ने सम्मेलन में भाग लिया।  हिंदू और मुस्लिम नेतागण भी सम्मेलन में उपस्थित थे।

फादर डिसूजा ने कहा, उदार कार्य अस्थायी तौर पर लोगों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है लेकिन यह उन्हें दूसरों पर आश्रित बना देता है। "हम सामाजिक परिवर्तन चाहते हैं, लोगों को दूसरों पर आश्रित बनाना नहीं चाहते।"

कारितास इंडिया के जनसंपर्क अधिकारी अमृत संगमा ने ऊकान्यूज को बताया कि कारितास इंडिया ने अपने स्वयंसेवक की संख्या बढ़ाने के लिए एक विशेष योजना शुरू की है

वर्तमान में 20,000 स्वयंसेवक हैं जो स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, और मानव तस्करी से लड़ने हेतु अपनी सेवा दे रहे हैं। अगले पाँच वर्षों में स्वयंसेवकों की संख्या 1 लाख बढ़ाने की योजना है।

 ‘ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस’ में सह-संस्थापक स्वामी चितानंदा सरस्वती ने कहा, "सेवा जरूरत के आधार पर होना चाहिए न कि धर्म के आधार पर नही।" भारत में उचित स्वच्छता की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "हमें मंदिर निर्माण की आवश्यकता से कहीं ज्यादा अधिक शौचालय बनाने की जरूरत है।"

जमात-ए-इस्लामी हिंद के महासचिव मुस्लिम नेता मोहम्मद सलीम अभियंता ने कहा, इस्लाम शांति का पक्ष लेता है और अपने अनुयायियों को शांति के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।एक सच्चा मुस्लिम समाज में दूसरों के साथ मिलकर जरुरत मंद लोगों की मदद में हाथ बटाएगा।

कारितास इंडिया के अध्यक्ष अगरताला के धर्माध्यक्ष लुमेन मोंटेरो ने कहा कि स्वयंसेवावाद सभी धर्मों से पाया जाता है। ख्रीस्तीय होने के नाते हमारा भी फर्ज बनता है कि हम समाज को अपना योगदान दें।

अंतरराष्ट्रीय कारितास में आय विकास के निदेशक निगेल वालेस ने कहा कि सभी कोई दया के कामों के लिए आर्थिक मदद नहीं दे सकते पर अपना कुछ समय जरुर दे सकते हैं। "सभी का थोड़ा योगदान दुनिया को बदल सकता है।"


(Margaret Sumita Minj)

15/11/2017 15:48