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हिन्दू नेता द्वारा मदर तेरेसा पर टिप्पणी की महाधर्माध्यक्ष ने कड़ी निंदा की

संत मदर तेरेसा - AP

12/10/2017 16:06

हैदराबाद, बृहस्पतिवार, 12 अक्टूबर 2017 (ऊकान): हैदराबाद के महाधर्माध्यक्ष थुम्बा बाला ने हाल ही में एक टेलीविजन वाद-विवाद में संत मदर तेरेसा के खिलाफ, हिंदू नेता स्वामी पारिपोरनन्द सरस्वती द्वारा किए गए झूठे आरोपों और अपमानजनक टिप्पणियों की निंदा की है।

हैदराबाद में 22 सितंबर को एक तेलगु चैनल ने आंध्रप्रदेश के काकीनाडा के मुखिया श्री पारिपोरनन्द सरस्वती और दलित अधिकार कार्यकर्ता प्रोफेसर कांचा इलियाह के बीच वाद-विवाद और विरोध का प्रसारण किया था।

स्वामी सरस्वती ने यह कहते हुए प्रोफेसर एलियाह को विषय से भटकाने का प्रयास किया था कि यह एक ″विदेशी मुद्दा है″ तथा बहस में ख्रीस्तीयों एवं मदर तेरेसा को घसीटने का प्रयास किया था। उसने आरोप लागाया था कि मदर तेरेसा ने गैरकानूनी तरीके से 50,000 महिलाओं की तस्करी की है तथा उन्हें ईसाई बनाकर एक धर्मबहन की तरह काम कराया है।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि पारिपोरनन्द सरस्वती की टिप्पणी उस वाद-विवाद के लिए पूरी तरह निरर्थक था क्योंकि "चर्चा का विषय कुछ अलग था। उसे वहाँ संत पापा और मदर तेरेसा की बात करने की आवश्यकता ही नहीं थी।″

आंध्रप्रदेश के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को न दोहराया जाए।

समाज में विभाजन लाने का प्रयास करने वालों के कार्यों की निंदा करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने सरकार से मांग की कि वे धर्मों और राष्ट्रों के सम्मानित व्यक्तियों के खिलाफ इस तरह आक्रामक टिप्पणी के प्रति उदासीन न रहे।

उन्होंने गौर किया कि सरस्वती जी की टिप्पणी न केवल काथलिक कलीसिया एवं ख्रीस्तीय समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है किन्तु अन्य धर्मों के उन लोगों को भी चोट देता है जो मदर तेरेसा को गरीबों एवं पीड़ितों की माता मानते हुए संत के रूप में उनका सम्मान करते हैं।

वाद–विवाद के दौरान स्वामी जी ने यह भी कहा कि मदर तेरेसा ने 1980 में भारत सरकार द्वारा अनुपयुक्त तरीके से देश का महान पुरस्कार ‘भारत रत्न’ प्राप्त किया था।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा, ″क्या यह भारत देश और उसके राष्ट्रपति का अपमान नहीं है जिन्होंने ग़रीबों, जरूरतमंद लोगों, बीमारों, बुजुर्गों, परित्यक्त और पीड़ित लोगों की सेवाओं के लिए उन्हें मान्यता दी थी।″

"संत मदर तेरेसा का काम पूरे विश्व में मान्यता प्राप्त है और उन्हें 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्तमान में मदर तेरेसा की कुल 5,161 बहनें हैं जो 139 देशों के 758 केंद्रों में काम कर रही हैं।"

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि येसु के उदाहरणों पर चलकर, "हम पारिपोरनन्द स्वामीजी को माफ करते हैं।″ उन्होंने कहा कि हमारे संविधान के अनुसार हर धार्मिक नेता का प्राथमिक कर्तव्य है हमारे बहुलवादी राष्ट्र के समुदायों में सामंजस्य और शांति को बढ़ावा देना तथा धर्मनिरपेक्षता एवं धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना।"


(Usha Tirkey)

12/10/2017 16:06