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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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महत्त्वपूर्ण लेख \ मानवाधिकार

हर बच्चे का जीवन अद्वितीय, अर्थपूर्ण और मूल्यवान है

प्रतीकात्मक तस्वीर - AFP

07/10/2017 16:04

वाटिकन सिटी, शनिवार, 7 अक्तूबर 2017 (रेई): संत पापा ने कहा कि एक समाज का मूल्यांकन, उसके बच्चों के साथ किये गये व्यवहार द्वारा किया जा सकता है।  

डिजिटल दुनिया में बाल प्रतिष्ठा के मुद्दे पर रोम स्थित परमधर्मपीठीय ग्रेगोरियन विश्व विद्यालय में 3 से 6 अक्टूबर तक आयोजित विश्व सम्मेलन के 140 प्रतिभागियों ने इंटरनेट के कारण बच्चों और युवाओं की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्होंने वाटिकन में शुक्रवार को संत पापा से मुलाकात भी की।

इस अवसर पर संकट में पड़े बच्चों के लिए प्रथम इताली हेल्पलाइन चालू किया गया।

संत पापा ने शुक्रवार को सम्मेलन के प्रतिभागियों से मुलाकात की जहाँ उन्हें लाखों बालक-बालिकाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए एक बालिका द्वारा ‘रोम की घोषणा' सौंपा गया जिन्हें इंटरनेट पर जानकारी एवं यौन तथा अन्य तरह के शोषण से रक्षा की आवश्यकता है।   

संत पापा ने कहा, ″हर बच्चे का जीवन अद्वितीय, अर्थपूर्ण और मूल्यवान है तथा प्रत्येक बच्चे को अपनी प्रतिष्ठा एवं सुरक्षा का अधिकार है किन्तु आज वैश्विक समाज अपने बच्चों को यह हक दिलाने में असफल है। दुनिया भर में बड़े पैमाने पर लाखों बच्चे दुखद और अकथ्य तरीके से शोषण के शिकार हो रहे हैं।″

हमारे रोज़मर्रा के जीवन में प्रौद्योगिकी की अत्यधिक वृद्धि और एकीकरण का प्रभाव, न केवल हम जो कर रहे है और किस तरह कर रहे हैं उस पर प्रभाव डाल रहा है बल्कि हमारे व्यक्तित्व पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। इन में से कई सकारात्मक प्रभाव हैं, फिर भी हम इस नई दुनिया के अंधकार पक्ष को अनदेखा नहीं कर सकते। एक ऐसी दुनिया को जो समाज की बुराइयों की समर्थक है और जो हमारे समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर हानि पहुँचा रहा है।   

संत पापा ने कहा कि निश्चय ही इंटरनेट सामाजिक समावेश एवं शिक्षा प्राप्ति हेतु अवसर एवं लाभ प्रदान कर रहा है किन्तु इसे सोशल मीडिया के प्रसार के साधनों द्वारा साइबर धमकी, उत्पीड़न और यौन संबंध जैसे घातक कृत्य, सामान्य हो रहे हैं।

संत पापा ने कहा कि यह एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान एक देश, एक संगठन अथवा एक धर्म की कर्रवाई द्वारा सम्भव नहीं है। यह एक वैश्विक समस्या है जिसके लिए वैश्विक समाधान की आवश्यकता है। यह मांग कर रही है कि हम जागरूकता लायें, सरकार, धर्म, संगठन और संस्था सभी एकजुट होकर इसके लिए कार्य करें।


(Usha Tirkey)

07/10/2017 16:04