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मानव तस्करी के विरुद्ध कलीसियाई समूहों ने दिया आसियान संधि को समर्थन

म्यानमार से भागे रोहिन्गिया लोगों के मानव तस्करी के शिकार होने का ख़तरा, तस्वीरः 23.09.2017 - AFP

06/10/2017 12:01

जकार्ता, शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2017 (ऊका समाचार): कलीसियाई समूहों तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इंडोनेशिया से मांग की है कि वह मानव तस्करी के विरुद्ध आसियान (एएसइएएन) संधि को तुरंत मंजूरी दे दे, जो सीमा पार के मामलों के लिए कानूनी प्रक्रिया को सशक्त बनाएगी।

चार अक्टूबर को संसद ने मानव तस्करी के विरुद्ध सम्पन्न आसियान संधि को अनुसमर्थन देना आरम्भ किया था। इस संधि में, विशेष रूप से, महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी पर चिन्ता व्यक्त की गई है। नवम्बर 2015 में, क्वाला-लुम्पुर में आयोजित 27 वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान, संधि स्थापित की गई थी।   

संधि में एशियाई राष्ट्रों के लोगों की ज़रूरतों के मद्देनज़र अपराधी गुटों, मानव तस्करी से लिप्त अपराधियों, जाँचकर्त्ताओं, अभियोजन पक्षों एवं मानव तस्करी के शिकार लोगों के संग व्यवहार आदि गम्भीर तथ्यों को सम्बोधित करने के लिये सामान्य मानकों और दृष्टिकोणों पर बल दिया गया है।

दक्षिण एशियाई राष्ट्रों के संघ "आसियान" के 10 सदस्यीय राष्ट्रों में केवल इंडोनेशिया और ब्रुनेई ने इस संधि को अनुसमर्थन नहीं दिया है।

मानव तस्करी के शिकार लोगों की सहायता हेतु गठित "विवात इन्टरनेशनल फॉर इन्डोनेशिया"  के अध्यक्ष फादर पौलुस रहमत ने कहा, "मानव तस्करी बड़े पैमाने पर जारी रही है इसलिये इस संधि को अनुसमर्थन एवं अनुमोदन न देने का संसद के पास कोई कारण नहीं हो सकता।"

फादर रहमत ने कहा, "ख्रीस्तीय बहुल प्रान्तों से विदेश जानेवाले कई लोगों की रास्ते में ही मृत्यु हो जाती है और इनमें अधिकांश मलेशिया जानेवाली महिलाएँ एवं बच्चे शामिल हैं।"

ऊका समाचार.कॉम से उन्होंने कहा, "इनमें से कुछ मानव तस्करी के शिकार बनते हैं किन्तु अपराधियों के विदेशों में होने के कारण उनका पीछा नहीं किया जाता।" 

इन्डोनेशिया के मानवाधिकार एवं ग़ैरसरकारी संगठनों ने भी इन्डोशियाई सरकार से संधि को अनुमोदन देने का आह्वान किया है ताकि मानव तस्करी के विरुद्ध देश के कानून को सशक्त बनाया जा सके।


(Juliet Genevive Christopher)

06/10/2017 12:01