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झारखंड में ख्रीस्तीयों को जेल में डालने के विरोध में प्रदर्शन

प्रतीकात्मक तस्वीर - EPA

27/09/2017 16:38

नई दिल्ली, बुधवार,27 सितम्बर 2017 (उकान) : पाँच हज़ार से अधिक ख्रीस्तीयों ने झारखंड राज्य के टुकुपानी गांव में छह ख्रीस्तीयों की रिहाई की मांग करते हुए मौन जुलूस किया जिन्हें पिछले सप्ताह ग्रामीणों को ख्रीस्तीय धर्म में आकर्षित करने के लिए पैसे देने की शिकायतों पर जेल भेजा गया था।

21 सितम्बर को एक स्थानीय अदालत ने छः पेन्टेकॉस्टल ख्रीस्तीयों के जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था जिन्हें सिमडेगा जिले के टुकुपानी गांव से 15 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद 25 सितंबर को "मौन विरोध" का आयोजन किया गया था।

टुकुपानी में विरोध प्रदर्शन हेतु आयोजन करने वाले नेताओं में से एक काथलिक नेता ग्लैडसन डुँगडुँग ने कहा,″ "हम चाहते हैं कि उन्हें छोड़ दिया जाए क्योंकि वे निर्दोष लोग हैं जो एक प्रार्थना के लिए एकत्र हुए थे।"

आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम करनेवाले डुँगडुँग ने कहा,″ऐसा प्रतीत होता है कि उपर से आने वाले दबाव की वजह से सिमडेगा जिले की अदालत ने छः ख्रीस्तीयों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पांच पुरुष और एक महिला है। हम उच्च न्यायालय में अपील कर रहे हैं।"

गांव के प्रमुख ने शिकायत की थी कि कुछ लोग इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों को ख्रीस्तीय बनने के लिए रुपये दे रहे थे। प्रमुख के शिकायत पर गिरफ्तारी की गई।  जिला पुलिस प्रमुख राजीव रंजन सिंह ने स्थानीय हिंदी मीडिया को बताया कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को परेशान करने का आरोप में गिरफ्तार किए गए।

सिमडेगा के धर्माध्यक्ष विंसेन्ट बरवा ने कहा,″ राज्य की हिंदू सरकार द्वारा 12 अगस्त को एक धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किए जाने के बाद से ही "संदेह का माहौल" है। कई क्षेत्रों में हिन्दू समूह "ऐसे कार्य करते हैं जैसे कि उन्हें दूसरों पर विशेष रूप से ख्रीस्तीयों पर नजर रखने और जांच करने का जनादेश मिला है।"

झारखंड विधान सभा ने 12 अगस्त को धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया। यह कानून किसी भी व्यक्ति को धर्म-परिवर्तन करने से रोकता है। नया धर्मांतरण विरोधी कानून किसी भी तरह के बल या प्रलोभन देकर या धोखाधड़ी से धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाता है। धर्माध्यक्ष बरवा ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी सेवाएं आसानी से हिंदू कट्टरपंथियों द्वारा कानून के उल्लंघन के रूप में व्याख्या की जा सकती हैं।

नये कानून में यह भी कहा गया है कि जो लोग अपने धर्म से दूसरे में बदलना चाहते हैं, उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी। यदि कोई जबरदस्ती किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन कराता है तो उसके लिए तीन साल की सज़ा और 50,000 रूपये तक का जुर्माना निश्चित किया गया है।

धर्माध्यक्ष ने कहा, "ऐसे झूठे मामले ख्रीस्तीयों को आतंकित करने की कोशिश का हिस्सा है, ताकि उन्हें अपने विश्वास से दूर कर सकें। हम सब ख्रीस्तीय विरोध मार्च में एकजुट होकर खड़े हैं।″

सिमडेगा जिले के पूर्व पार्षद और विरोध प्रदर्शन के आयोजक नील तिर्की ने कहा,″आदिवासियों और ख्रीस्तीयों पर उत्पीड़न हिन्दू समर्थक भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार की सहमति से उत्पन्न हुए हैं।


(Margaret Sumita Minj)

27/09/2017 16:38