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रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

कलीसिया नाबालिकों के प्रति दुराचार करने वालों पर कड़ा रूख अपनायेगी

नाबालिकों की सुरक्षा के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति के सदस्यों के साथ संत पापा - ANSA

21/09/2017 17:13

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 21 सितम्बर 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने याजकों द्वारा यौन दुराचार का हर स्तर पर मुकाबला करने हेतु अपनी प्रतिज्ञा दोहराई तथा कहा कि कलीसिया उन लोगों के प्रति सभी उपायों को दृढ़ता से लागू करेगी जिन्होंने अपनी बुलाहट के प्रति धोखा देकर ईश्वर के पुत्र-पुत्रियों के साथ दुर्व्यवहार किया है।

संत पापा बृहस्पतिवार 21 सितम्बर को नाबालिकों की सुरक्षा के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति के सदस्यों को सम्बोधित कर रहे थे जो एक आम सभा में भाग ले रही है। यह एक ऐसी समिति है जो याजकों द्वारा बच्चों पर हो रहे यौन दुराचार को रोकने हेतु संत पापा के द्वारा स्थापित की गयी है।

संत पापा ने समिति के सदस्यों को सम्बोधित कर कहा, ″मैं आप लोगों के साथ गहरे दुःख को बांटना चाहता हूँ जो दुर्व्यवहार के शिकार बच्चों लिए मेरे दिल में है जैसा कि मैंने हाल के दिनों में कई बार किया है। 

यौन दुराचार को समस्त मानवता के लिए भयंकर बुराई बतलाते हुए संत पापा ने कहा कि यह कलीसिया के लिए भी एक दुखद अनुभव है, ″हम पवित्र याजकों के द्वारा किये गये इस दुर्व्यवहार के लिए लज्जित हैं जिन्हें सबसे अधिक भरोसामंद होना चाहिए।″

उन्होंने कहा, ″मैं स्पष्ट शब्दों में कहता हूँ कि यौन दुराचार भयंकर पाप है तथा ख्रीस्त एवं कलीसिया की शिक्षा के बिलकुल विपरीत है।″ यौन दुराचार से पीड़ित लोगों द्वारा सुनी गयी आपबीती की याद कर संत पापा ने समिति के सदस्यों से कहा कि वे इस बुराई से लड़ने एवं उसे दूर करने हेतु हर संभव प्रयास करें।

उन्होंने कहा कि कलीसिया हर स्तर पर अपनी बुलाहट को धोखा देने एवं ईश्वर के पुत्र-पुत्रियों के साथ दुराचार करने वालों के विरूद्ध सख्त उपायों का इस्तेमाल करेगी।

संत पापा ने जोर दिया कि जो लोग कलीसिया की संस्थाओं में काम करते है उनके लिए अनुशासनात्मक उपायों को लागू किया जाए। संत पापा ने इस बात को भी सामने रखा कि इसके लिए पहली जिम्मेदारी है धर्माध्यक्षों, पुरोहितों एवं धर्मसमाजियों का, जिन्होंने कलीसिया की सेवा हेतु अपना जीवन अर्पित करने के लिए बुलाहट प्राप्त की है उन्हें कमजोर बच्चों, युवाओं और प्रौढ़ लोगों की सुरक्षा के प्रति चौकस रहना चाहिए यही कारण है कि कलीसिया नाबालिकों के प्रति यौन दुराचार के लिए अपरिवर्तनीय एवं हर स्तर पर ″शून्य सहनशक्ति″ का सिद्धांत लागू करेगी।


(Usha Tirkey)

21/09/2017 17:13