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संत पापा फ्राँसिस \ आमदर्शन व धर्मशिक्षा

आशा पर संत पापा की धर्मशिक्षा

संत पापा फ्राँसिस, बुधवारीय आमदर्शन समारोह - AP

20/09/2017 19:21

वाटिकन सिटी, बुधवार 20 सितम्बर 2017, (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को आशा पर अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात,

आज हमारी धर्मशिक्षा की विषयवस्तु “आशा की शिक्षा है” और मैं आप सभों को एक शिक्षक, एक पिता की भाँति संबोधित करना चाहता हूँ जो कि एक नवयुवक को खुले रूप में संबोधित करने की चाह रखता है जिससे वह अपने जीवन में शिक्षा ग्रहण कर सकें।

आप इस बात पर विचार करें कि ईश्वर ने आप को जिस स्थान पर व्यवस्थित किया है वह आप से हमेशा आशा करते हैं। आप अपने में इस बात से वाकिफ हो कि आप का शत्रु आप के बाहर नहीं बल्कि आप के भीतर निवास करता है और इस कारण आप अपने में विषाद, एक धुँधली भावना को हावी होने न दें। यह दुनिया एक चमत्कार के समान है जिसे ईश्वर ने आप को अपनी कृपाओं से भरते हुए आपके हाथों में सौंपा है। संत पापा ने कहा कि आशा और विश्वास एक साथ चलते हैं। आप दुनिया की अति सुन्दर विश्वास से भरी सच्ची चीजों में विश्वास करें। आप सच्चे ईश्वर में विश्वास करें जो पवित्र आत्मा के द्वारा सारी अच्छी चीजों में व्याप्त रहते और सभी चीजों को संचालित करते हुए येसु ख्रीस्त में सारी मानव जाति का इंतजार करते हैं। आप इस बात पर विश्वास करें कि वे आप की प्रतीक्षा करते हैं। आज दुनिया उन लोगों के द्वारा आगे बढ़ रही है जो अपना हृदय खुला रहते हुए सेतुओं का निर्माण करते हैं, कठिन बातों और परिस्थिति के बावजूद वे अपने दिल में अपने सपनों को संजोये रखते और उन पर विश्वास करते हैं।

आप अपने जीवन में यह कभी न सोचें कि जिन कठिनाइयों का सामना आप को रोज दिन के जीवन में करना पड़ता है वह सब व्यर्थ चला जायेगा। आप यह न सोचें जीवन के अंत में सारी चीजें समाप्त हो जायेंगी। संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमें कभी निराश और हताश होने नहीं देते हैं यदि वे हमारे हृदयों में अपनी आशा को संचारित करते तो वे इसे व्यर्थ होने नहीं देते हैं। हमारे जीवन में सारी चीजें अनंत वसंत में जन्म लेती हैं। ईश्वर हमें अपने जीवन में पुलकित करते हैं।

उन्होंने कहा कि आप जहाँ कहीं भी हैं अपनी आशा में बनाये रखें। यदि आप अपने जीवन में गिर गये हैं तो ऊपर उठें। आप गिरे नहीं वरन आप की आशा आप को खड़ा होने में मदद करे। यदि आप अपने जीवन में बैठे हैं तो आप उठ कर आगे बढें। यदि उबाव आप को पंगु बना देती है तो आप अपने जीवन में अच्छे कार्यों को पूरा करें। यदि आप अपने में निराशा का अनुभव करते हैं तो आप पवित्र आत्मा से निवेदन करें कि वे आप में नये जीवन का संचार करें।

शांति हमारे मन में निवास करती है आप अतः उन लोगों की बातों को न सुनें जो अपने में घृणा और विभाजन के बीज बोते हैं। आप अपने को उन बातों से दूर रखें, उन्हें न सुनें। मानव अपनी विभिन्नता में एक साथ रहने हेतु बनाया गया है। इसके विपरीत धैर्य में हम अपने को एक दिन, सत्य में ईश्वर के यहाँ जमा होता हुआ पायेंगे।

संत पापा ने कहा कि हम एक दूसरे को प्रेम करें। हम एक दूसरे की राहों का सम्मान करें चाहे वह सीधे या कठिनाइयों से भरा हुआ क्यों न हो क्योंकि हर एक की कहानी अगल-अलग है। हममें से प्रत्येक का एक अलग इतिहास है। हर बच्चा जीवन का एक स्रोत है जो हमारे सामने मृत्यु की तुलना में जीवन को एक शक्तिशाली निशानी के रुप में पेश करता है। हर प्रेम में एक शक्ति है जो खुशी के रुप में सारी चीजों को परिवर्तित करती है।

येसु हमें वह चमकती ज्योति प्रदान करते हैं जिसके द्वारा हम अपने जीवन में अंधकार का सामना करते हैं, इसके द्वारा हम अपने को सुरक्षित रखते हैं। यह हमारे लिए जीवन में सबसे बड़ी शक्ति के रूप में दी गई है।

संत पापा ने कहा कि इन सभों से ऊपर हमारे लिए हमारे स्वप्न हैं। हमें अपने जीवन में स्वप्न देखने से नहीं डरना है। जब हम अपने जीवन में अपनी सोच, इच्छा को स्वप्न के रुप में सामने रखते हैं तो यह हमारे जीवन की हकीकत में तब्दील होता है। हमारी आशा हमें विश्वास के मार्ग में ले चलती है जहाँ ईश्वरीय इच्छा में हम सारी बातों को पूरा होता हुआ पाते हैं। मानव की सोच ने विज्ञान और तकनीकी असंभव बातों की खोज की है। अपने सोच में मानव ने समुद्र की यात्रा की, वह वहाँ तक पहुंच गया जहाँ कोई कभी नहीं पहुंचा था। मानव जो अपने में आशों को सजीव बनाये रखा गुलामी से छुटकारा पाया और एक नये तथा अच्छे जीवन की शुरूआत की। हम उन लोगों के बारे में सोचें।

संत पापा ने कहा कि हमें इस दुनिया के प्रति और हर मानव के जीवन हेतु उत्तरदायी होने की जरूरत है। हमें अपने में यह विचार करने की जरूरत है कि एक गरीब के प्रति किया गया अन्याय खुले घाव के समान है जो हमारे स्वयं के सम्मान का हनन करता है। जीवन हमारे इस जीवन के बाद समाप्त नहीं होता वरन इस धरा पर और भी हमारी पीढियाँ आयेंगी और यह चलता रहेगा। इस तरह हमें प्रति दिन ईश्वर से साहस के उपहार की माँग करनी है। हम इस बात को याद रखने की जरूरत है कि येसु ख्रीस्त ने हमारे लिए इस संसार में भय पर विजय पाई है। भय जो हमारा सबसे बड़ा शत्रु है हमारे विश्वास के विरूद्ध हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। यदि हम अपने जीवन की कुछ कठिनाइयों से भयभीत हो जाते तो हमें यह याद करने की जरूरत है कि हम अपने जीवन में अकेले नहीं हैं। संत पापा ने कहा कि बपतिस्मा के समय ही आप का जीवन पवित्र आत्मा के रहस्य में सराबोर हो गया है जिसके द्वारा हम अपने को येसु ख्रीस्त में सम्मिलित पाते हैं। जब कभी हम अपने जीवन से भयभीत हो जाते या हम अपने में यह अनुभव करते कि बुराई हम से बड़ी है जिसका हम सामना नहीं कर सकते तो हमें ऐसी परिस्थिति में यह याद करने की जरूरत है कि येसु हम सभों में निवास करते हैं। वे हमारे द्वारा अपनी नम्रता में मानव के सभी शत्रुओं, पाप, घृणा, अपराध, हिंसा इत्यादि का दमन करने की कोशिश करते हैं।

संत पापा ने कहा कि हमें अपने में सदैव सच्चाई को धारण करने की जरूरत है लेकिन हमें यह याद करने की जरूरत है  कि आप अपने में अन्यों से बड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आप अपने में सदा इस बात को याद रखें कि आप किसी के अधिकारी नहीं हैं। यदि आप अपने में सच्चाई पर विश्वास करने हेतु असहज महसूस करते हैं तो आप अपने समुदाय में लज्जा की अनुभव न करें। यद्यपि आप अपने जीवन में मठवासी की भांति जीवन यापन करते हैं और यह आप के जीवन में अन्यों के दुःख दर्द की अनुभूति लाता तो एक ख्रीस्तीय के रुप में आप अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा सारी चीजों को ईश्वर हेतु सुपुर्द करें।

यह हमारे जीवन में एक आदर्श को जन्म देता है। आप अपने जीवन में उस आदर्श हेतु जीये जो आप को एक मानव से परे ले जाता है। यदि किसी दिन यह आदर्श आप को कोई कड़वी कीमत चुकाने की मांग करता है तो आप इससे पीछे न हटें। निष्ठा के द्वारा हम अपने जीवन में सारी चीजों को प्राप्त कर सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि यदि आप अपने जीवन में गलती करते तो उस गलती से ऊपर उठें। गलती मानव जीवन का एक अंग है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन की गलतियाँ हमें जीवन में गुलाम न बनाये। आप अपनी गलतियों से शर्मिंदगी का अनुभव न करें क्योंकि ईश्वर का पुत्र निरोगों के लिए नहीं वरन कमज़ोरों के लिए आये, वे हम जैसों के लिए आये। और यदि आप पुनः गलतियों में गिर जाते तो आप भयभीत न हों, वरन उठें। आप जाने हैं क्योंॽ संत पापा ने कहा, “क्योंकि ईश्वर आप के मित्र है। वे हमारे मित्र हैं।”  

यदि आप अपने में कटु हैं तो हमें दृढ़ता पूर्वक उन लोगों में विश्वास करें जो अच्छाई हेतु कार्य करते हैं क्योंकि उनकी नम्रता में हम नये संसार के बीज को पाते हैं। हम उनके निकट आयें जो अपने हृदय को छोटे बच्चों से समान बनाये रखते हैं। हम आश्चर्य से सीखें, यह हममें विस्मय को जन्म देती है। संत पापा ने अपनी धर्म शिक्षा के अंत में कहा कि हम जीवन जीयें, प्रेम करें, स्वप्न देखें और ईश्वरीय कृपा में कभी हताश न हो।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्म शिक्षा माला समाप्त की और विश्व के विभिन्न देशों से आये सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया तथा उन पर ईश्वरीय खुशी और शांति की कामना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

20/09/2017 19:21