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झारखंड में नफरत फैलाने को रोकने हेतु प्रधानमंत्री से अपील

प्रतीकात्मक तस्वीर - RV

16/09/2017 16:04

नई दिल्ली, शनिवार, 16 सितम्बर 2017 (मैट्रर्स इंडिया): भारत की काथलिक कलीसिया के सर्वोच्च निकाय ने भारत के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से अपील की है कि वे झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा राज्य में नफरत फैलाये जाने पर रोक लगायें।

झारखंड विधान सभा ने 12 अगस्त को धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया। यह कानून किसी भी  व्यक्ति को धर्म-परिवर्तन करने से रोकता है। यदि कोई जबरदस्ती किसी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन कराता है तो उसके लिए तीन साल की सज़ा और 50,000 से 1 लाख रूपये तक का जुर्माना निश्चित किया गया है।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष देओदोर मसकरेनहास ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र प्रेषित कर कहा कि झारखंड में नफरत फैलाने की राजनीति से परेशान होने के कारण उन्हें पत्र लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा।

धर्माध्यक्ष थेओदोर ने कहा, ″मोदी ने 2014 में झारखंड में चुनाव के पूर्व समावेशी मुद्दा उठाते हुए स्वयं अभियान जारी किया था, ″सबका साथ सबका विकास″ इसी के कारण राज्य में रघुवरदास को मुख्यमंत्री बनाया गया किन्तु दास ने ईसाई समुदाय के खिलाफ व्यंग्यपूर्ण हमले किये हैं।

उन्होंने कहा, ″यदि मुख्यमंत्री इस वैचारिक नफरत को नियंत्रित नहीं कर सकता तो उसके जाने का समय आ गया है।″   

हिन्दू जागरण मंच द्वारा राँची के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल तेलेस्फोर पी. टोप्पो के पुतला जलाये जाने पर, उन्होंने इस बात का डर व्यक्त किया कि ख्रीस्तीयों के विरूद्ध फैलाये जाने वाला नफरत कहीं जल्द ही हिंसा का रूप न ले ले।

उन्होंने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूरे देश ने उनकी सराहना की जब उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर हिंसा को बरदाश्त नहीं किया जा सकता। 

धर्माध्यक्ष ने कहा, ″रघुवरदास तथा उनके सलाहकार विगत कुछ महीनों से आपके द्वारा की गयी उस घोषणा का समर्थन करते नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। अतः मैं पूरी आशा और विश्वास के साथ आप से अपील करता हूँ कि झारखंड में मुख्यमंत्री द्वारा नफरत फैलाने को रोका जाए। झारखंड एवं झारखंड के निवासी बेहतर के हकदार हैं।″

धर्मांतरण विधेयक को पास करने के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा पूरे पृष्ट पर दिये गये एक सरकारी विज्ञापन को रेखांकित करते हुए धर्माध्यक्ष ने कहा कि ″ईसाई समुदाय को बदनाम करने के लिए स्रोत का नाम दिए बगैर महात्मा गांधी का नकली उद्धरण लिया गया था।″

विज्ञापन में गरीब दलितों और आदिवासियों को गाय के समान सरल और मूक बतलाते हुए, ईसाई मिशनरियों को उनके धर्मांतरण हेतु जिम्मेदार ठहराया था। कटाक्ष पूर्वक उन्होंने पूछा कि क्या दास सरकार इन्हीं सरल प्राणियों के वॉट द्वारा सत्ता पर आयी है। विज्ञापन में आदिवासी ख्रीस्तीयों को ″चावल ख्रीस्तीय″ की भी संज्ञा दी गयी थी। 

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस उकसाव भरे विज्ञापन का उत्तर उन्होंने इसलिए नहीं दिया था कि वे भयभीत अथवा कमजोर हैं।

उन्होंने कहा, ″हम अपने लिए नहीं बोल रहे हैं बल्कि झारखंड की जनता के लिए बोल रहे हैं।″ उन्होंने आश्चर्य व्यक्त की क्योंकि इस तरह की नफरत फैलाने वाली पूर्ण पृष्ट विज्ञापन में क्यों इतने रूपये खर्च किये गये जबकि राज्य में बच्चों के स्वास्थ्य के भी ठीक से देखभाल नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने सवाल किया कि झारखंड के नए भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के पीछे छिपा तर्क क्या था, कि धर्म विधेयक के साथ ही बिना चर्चा के उसे पारित कर दिया गया।

सीबीसीआई के महासचिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि राज्य में नफरत फैलाने से रोकने के लिए कड़ा कदम उठाया जाए ताकि सभी लोग सुरक्षित महसूस कर सकें।  

झारखंड 8वाँ राज्य है जहाँ उनके नागरिकों के धर्म मानने की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया है। 


(Usha Tirkey)

16/09/2017 16:04