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संत पापा फ्राँसिस \ आमदर्शन व धर्मशिक्षा

कोलोम्बियाई प्रेरितिक यात्रा का संक्षिप्त विवरण

संत पापा फ्राँसिस, बुधवारीय आमदर्शन समारोह - ANSA

13/09/2017 15:05

वाटिकन सिटी, बुधवार 13 सितम्बर 2017, (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को कोलोम्बिया की अपनी प्रेरितिक यात्रा के बारे में संक्षिप्त विवरण देते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात,

 

पिछले दिनों मैंने अपनी कोलोम्बिया की प्रेरितिक यात्रा पूरी की। इस यात्रा के उपहार हेतु मैं सारे दिल से ईश्वर का धन्यवाद अदा करता हूँ। मैं प्रजातंत्र कोलोम्बिया के राष्ट्रपति के आलावे कोलोम्बिया के सभी धर्माध्यक्षों, देश के सभी सरकारी राजनायिकों और इस यात्रा को सफल बनाने में योगदान देने वाली सभी लोगों के प्रति भी अपनी कृतज्ञता अर्पित करता हूँ जिन्होंने गर्मजोशी से  मेरा स्वागत किया। मैं विशेष रुप से कोलोम्बिया देशवासियों के प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव व्यक्त करता हूँ जिन्होंने अति प्रेम और खुशी पूर्वक मेरा स्वागत किया। कोलोम्बिया की मेरी इस प्रेरितिक यात्रा में मैंने अपने भूतपूर्व कलीसिया के चरवाहों विशेष कर संत पापा पौल छःवें जिन्होंने सन् 1968 और संत पापा जोन पौल द्वितीय जिन्होंने सन् 1986 में कोलोम्बिया का यात्रा की थी एक निरन्तरता के रुप में पाया क्योंकि यह पवित्र आत्मा से उत्प्रेरित हुई, जहाँ ईश्वर के सानिध्य में ऐतिहासिक विन्दुओं पर देशवासियों के लिए एक मार्गदर्शन संपन्न हुआ।

इस यात्रा की शुरूआत संत पापा ने कहा कि “आइए हम पहला कदम लें” विषयवस्तु से हुई जिसका मुख्य उद्देश्य कोलोम्बिया में एक अर्द्ध शतक से चली आ रही आन्तरिक युद्ध की स्थिति में मेल-मिलाप स्थापित करना था जहाँ हम शत्रुता के बीज को पाते हैं जिसके द्वारा कितने ही लोग घायल हैं और अपनी चंगाई हेतु कठिनाई का अनुभव करते हैं। संत पापा ने कहा कि लेकिन अब ईश्वर की सहायता द्वारा हम उस मार्ग में अग्रसर हैं। अपनी इस प्रेरितिक यात्रा के द्वारा मैं लोगों के प्रयासों को आशीष देना चाहता था और उनके विश्वास और आशा को पुख्ता बनाते हुए उनके साक्ष्य का एक अंग होना चाहता था जो कि मेरी प्रेरिताई और पूरी कलीसिया की एक अनमोल निधि है।

कोलोम्बिया, लातीनी अमेरीका के उन देशों में एक है जहां हम ख्रीस्तीयता की जड़ों को मजबूत पाते हैं। लेकिन देश में युद्ध की स्थिति हमारे लिए एक दुःख का कारण बनती है यद्यपि हम ऐसी परिस्थिति में भी देश के पुनर्निमाण और शांति स्थापना तथा इस स्थिति से बाहर निकलने की एक मजबूत और अपराजेय आशा को अपने में देखते हैं। हम इस बात को प्रत्यक्ष रुप में देखते हैं कि हानिकारक चीजों ने देश के नागरिकों और ईश्वर के द्वारा किये गये कार्यों को तहस-नहस करना चाहा लेकिन दूसरी ओर ख्रीस्त का प्रेम, उनकी अनंत करुणा का हम प्रत्यक्ष दर्शन करते हैं जो पाप और मृत्यु से अधिक शक्तिशाली है।

संत पापा ने कहा कि इस प्रेरितिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य कलीसिया द्वारा देश में ईश्वर की कृपा को लाना था जो इस देश के हृदय से लोगों के जीवन में शांति स्वरूप प्रवाहित होती है। मैंने हजारों की संख्या में उपस्थित बच्चों की आंखों में और युवाओं में, जो बागोटा के प्रांगण में जमा हुए थे जीवन के प्रति उत्साह को देखा जो कि प्रकृति के द्वारा स्वतः ही हमारे लिए प्रवाहित होती है। बागोटा में मैंने कोलांबिया के सभी धर्माध्यक्षों और साथ ही लातीनी अमेरीका धर्माध्यक्षीय सम्मेलन से संचालक समिति से भी मुलाकात की। मैं ईश्वर का शुक्रगुजार हूँ क्योंकि मैंने प्रेरिताई उत्साह से उनका आलिंगन कर पाया जिसे वे ईश्वरीय शांति और आशा को येसु ख्रीस्त के संस्कारों द्वारा कलीसिया की सेवा में विश्वासियों के बीच प्रसारित कर सकें। 

विलाभिन्चेसीओ में हमारे मिलन की विषयवस्तु मेल-मिलाप थी जो प्रेरितिक यात्रा की पराकाष्ठा रही। प्रातःकालीन एक धूमधाम समारोही मिस्सा का आयोजन हुआ जहां हमने शहीद धर्माध्यक्ष जेसु ऐमिलियो मोनसाल्भे और पुरोहित प्रेदो मरिया रामिरेज रमोस को धन्य घोषित किया। दोपहर को एक विशेष मेल-मिलाप की धर्मविधि का आयोजन किया गया था जो कि बकाया में येसु ख्रीस्त को समर्पित है जो हाथ और पैरों विहीन प्रताड़ित लोगों की निशानी हैं।

दो शहीदों को धन्य घोषित करना हमें इस बात की याद दिलाती है कि शांति उस विश्वास की निशानी है जिसके कारण लोगों ने सत्य, न्याय और प्रेम का जीवन जीते हुए अपना रक्त बहाया है। संत पापा ने कहा कि लोगों का जीवन वृतांत सुनते हुए हम सभी भाव-विरोह हो उठे थे और हमारी आंखों में दुःख-दर्द और खुशी के आंसू छलक आये थे। शहीदों की निशानी और चेहरे के आगे ईश भक्त विश्वासियों ने अपने जीवन के महत्व को गहराई से समझा क्योंकि ईश्वर की दया अपने श्रद्धालु भक्तों पर सदा बनी रहती है।

“दया और सच्चाई न्याय और शांति ये एक दूसरे से मिल गये।” (स्त्रोत 85.11) स्तोत्र ग्रंथ की ये भविष्यवाणी विगत शुक्रवार को कोलोम्बियावासियों के जीवन में उस समय खरी उतरी जब उन्होंने अपने मध्य लोगों को ईश्वरीय प्रेम में घटित घटनाओं का साक्ष्य देते सुना जहाँ उन्होंने उन घटनाओं के प्रति खेद प्रकट किये और पश्चाताप की भावना व्यक्त करते हुए क्षमा की याचना की।

मेडलिन में हमारे मिलन की विषयवस्तु येसु के शिष्यों के रूप में हमारा जीवन और प्रेरिताई था। ख्रीस्तियों के रूप में जब हम येसु का अनुसरण करते तो हम सच्चे रूप में संसार के लिए नमक, ज्योति और खमीर बनते हैं जिसका प्रतिफल असंख्य होता है। इसका एक प्रत्यक्ष फल होगारेस अर्थ उन घरों के रुप में देखने को मिला जहाँ बच्चे और युवा जो अपने को घायल पाते उनका स्नेहपूर्ण स्वागत किया जाता और उनकी देखभाल की जाती है। वहाँ उन्हें सुरक्षा मिलती और उन्हें मित्रता की अनुभूति दी जाती है। दूसरा फल हमें बुलाहटीय जीवन के रुप में देखने को मिला जहाँ पुरोहितों और धर्मसमाजियों ने अपने को ईश्वर की सेवा हेतु समर्पित किया है। मैंने उन्हें आशीर्वाद देते हुए खुशी में जीवन जीने हेतु प्रोत्साहित किया। 

संत पापा ने कहा कि अंत में कार्ताजेना, संत पीटर क्लावेर के शहर में जो अपने को एक गुलाम प्रेरित की भांति प्रभु सेवा में समर्पित कर दिया, हमने मानव जीवन और मौलिक अधिकारों को प्रोत्साहित करते हुए पाया। संत पीटर क्लावेर ने संत माईकेल बारडेर की भांति अपने जीवन को दीन-हीन और गरीबों की सेवा में अर्पित कर दिया। अपने कार्यों के द्वारा उन्होंने सच्चे अर्थ में क्रांति और सुसमाचार का प्रचार किया जो आज भी लोगों को समाज में गुलामी से छुटकारा दिलाने हेतु हमें प्रेरित करता है। संत पापा ने कहा कि इस तरह “प्रथम कदम बढ़ाने” का अर्थ आगे आना, झुकना, घायलों और अपने  परित्यक्त भाई-बहनों का स्पर्श करना है। इस कार्य को करने हेतु ईश्वर सेवक बने। हम उन्हें धन्य कहते हैं क्योंकि वे हमारी आशा, करुणा और शांति हैं।

संत पापा ने कहा कि मैं पुनः कोलोम्बिया के लोगों को माता मरिया के स्नेह में सुपुर्द करता हूँ जिससे वे अपने रोज दिन के जीवन में अपने भाई-बहनों की ओर अपना पहला कदम बढाये जिससे वे दिन-व-दिन शांति, प्रेम, धार्मिकता और सच्चाई को उनके लिए स्थापित कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने कोलोम्बिया की अपनी प्रेरितिक यात्रा का वृतांत समाप्त किया और सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 


(Dilip Sanjay Ekka)

13/09/2017 15:05