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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

ईश्वर, कोलम्बिया और सृष्टि से हम मेल करें

संत पापा फ्राँसिस विल्लाभिनचेन्सिओ में मिस्सा

09/09/2017 16:16

प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन विल्लाभिनचेन्सिओ में अपने मिस्सा बलिदान के दौरान प्रवचन में मेल-मिलाप का संदेश दिया।
″आपका जन्म, ओ कुँवारी ईश्वर की माता, समस्त संसार में आनंद का संदेश लाया। आपसे न्याय के उस सूर्य का उदय हुआ है, जो ख्रीस्त हमारे ईश्वर हैं।″ (जागरी गान-अग्र.) जैसा कि मरियम के जन्म का पर्व हमारे ऊपर चमकता है वैसे ही भोर का कोमल प्रकाश विशाल कोलम्बियाई मैदान के ऊपर फैलता है, इस खूबसूरत परिदृश्य जिसका प्रवेश द्वार विल्लाविचेंसिओ है और अपने आदिवासियों की समृद्ध विविधता पर भी इसका प्रकाश चमकता है।

मरियम पहली रोशनी हैं जो रात का अंत और आने वाले दिन की घोषणा करती हैं।  उनका जन्म हमें ईश्वर के कोमल प्यार और करुणामय योजना को समझने में मदद करता है, जिसके द्वारा ईश्वर हमारे बीच आते हैं और हमारे साथ एक निराला व्यवस्थान स्थापित करते हैं जिसे कुछ भी और कोई भी तोड़ने में सक्षम नहीं होगा।

मरियम ईश्वर के प्रकाश को हस्तांतरित करना जानती थी और उसने अपने घर में उस प्रकाश की किरणों को प्रतिबिंबित करते हुए योसेफ और येसु के साथ साझा किया था। मरियम ने उस प्रकाश की किरणों को अपने लोगों, अपने देश और सारी सृष्टि जो मानवजाति का आम निवास है, पर भी प्रतिबिंबित किया।

संत पाप ने कहा कि सुसमाचार में हम येसु की वंशावली के बारे में सुनते हैं जो केवल नामों की एक सूची नहीं है वरन यह ऐतिहासिक व्यक्ति का जिक्र है जिन्होंने ईश्वर के सानिध्य में अपनी जीवन यात्रा पूरी की है। ईश्वर इसके द्वारा हमारे लिए इस बात को व्यक्त करने की चाह रखते हैं कि मुक्ति के इतिहास में भले और बुरे साथ-साथ चलते हैं जो इस तथ्य को हमारे लिए प्रकट करता है कि मुक्ति हमारे लिए प्रयोगशाला में किया गया कोई शुष्क प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह जीवन की ठोस घटना है जो हमें आगे ले चलती है। यह लम्बी सूची हमें यह बतलाती है कि हम अपनी अखंड मुक्ति का एक छोड़ा-सा अंग हैं। यह हमें अपने जीवन में आध्यात्मिकता के अति-करण से बचे रहने को मदद करती है। यह हमारे लिए इस बात हेतु मददगार सिद्ध होता है कि हम अपने को जीवन की उस हकीकत से अगल न करें। यह हमारे जीवन में उन पन्नों को भी समाहित करने में सहायक होता है जहाँ हम अंधकार और अत्यंत दुःख को देखते, जहाँ हम अपने को निराश और परित्यक्त निर्वासन की तुलनीय स्थिति में पाते हैं।

संत पापा ने कहा कि वंशावली में नारियों की चर्चा जो पुराने विधान में महानतम व्यक्तित्वों की सूची में नहीं रही हमें इस सच्चाई से रूबरू कराती है कि येसु की रगों में गैरख्रीस्तीय खून भी था, साथ ही वे हमारे समक्ष तिरस्कार और गुलामी के इतिहास को रखती हैं। हमारे समुदायों में जहाँ हम आज भी पितृसत्ता और राजनीतिक सीमाओं से अपने को बंधे पाते हैं धर्मग्रंथ हमारे लिए उन नारियों की चर्चा करता है जो प्रभावकारी और इतिहास का महान अंग रहीं हैं।

इन सारी चीजों के मध्य हम येसु, मरियम और योसेफ को देखते हैं। मरियम अपने उदारता पूर्ण हाँ द्वार ईश्वर की कार्यशीलता को अपने जीवन में स्वीकार करती है। योसेफ एक न्यायपूर्ण व्यक्ति हैं जिनमें हम घमंड, उन्माद और जीवन में सर्वश्रेष्ठ स्थिति को प्राप्त करने हेतु एक प्रयास को नहीं पाते हैं। सुसमाचार का अंश हमारे लिए इस बात को बतलाता है कि योसेफ को इस बात का पता चलने से पहले कि मरियम के साथ क्या हुआ है स्वर्गदूत उनके लिए मरियम के जीवन में हो रही घटनाओं के बारे में बतलाते और ईश्वरीय योजना को समझने में उन्हें मदद करते हैं। आज की परिस्थिति में जहां हम नारियों के प्रति मनोवैज्ञानिक, शब्दों और शारीरिक हिंसा को पाते वही योसेफ को हम एक सम्मानजनक और संवेदनशील व्यक्ति के रुप में पाते हैं। वे सभी बातों को पूरी तरह नहीं समझते फिर भी मरियम के नाम की बदनामी न हो इस बात का ख्याल रखते हुए अपने में एक निर्णय लेते हैं। उनकी हिचकिचाहट में ईश्वर उन्हें एक निर्णय लेने हेतु सहायता करते हैं।

संत पापा ने कहा कि कोलाम्बिया के लोग ईश्वर की चुनी हुई प्रजा हैं। हम यहां भी एक वंशावली को लिख सकते हैं जो एक ओर इतिहास और देश प्रेम की एक कहानी होगी, तो दूसरी ओर एक असहमति, अपमान यहां तक की मृत्यु की कहानी बनेगी। उन्होंने कहा कि आप में से कितने अपने दुःख और निर्गमन की बात कहेंगे। आप में से कितनी नारियों ने चुपचाप, अकेले जीवन का सामना किया है और कितने पुरुषों ने न्याय की चाह में अपने ऊपर हो रही घटनाओं को चुपचाप सह लिया है। हम अपने में कैसे ईश्वर की ज्योति को देख सकते हैंॽ हमारे लिए मेल-मिलाप के सच्चे मार्ग क्या हो सकते हैंॽ मरियम की तरह हम हाँ करते हुए सम्पूर्ण इतिहास को स्वीकार कर सकते हैं। योसेफ की भाँति अपने घमंड और भावनाओं को किनारे रखते हुए हम घटनाओं को स्वीकार कर सकते हैं। येसु की भांति हम मानव इतिहास को गले लगा सकते हैं। जब हम हाँ कहते तो ईश्वर सारी चीजों को हमारे लिए संभव बनाते हैं। कोलम्बिया के नागरिकों के रुप में आप सभी इसके योग्य हैं जो आप को एक अस्तित्व प्रदान करती है। हमारे हां करने के द्वारा ईश्वर हमें सच्चाई, अच्छाई और मेल-मिलाप की भावना से भर देते हैं यद्यपि हम अपने जीवन के इतिहास में पाप, हिंसा और अपने को परित्याग पाते हैं।

संत पापा ने कहा कि मेल-मिलाप अपने में अमूर्त वाक्य नहीं है। यदि ऐसा होता तो यह हमारे जीवन में एक तरह की शुष्कता लाती और हम अपने को एक दूसरे से और भी दूर पाते। मेल-मिलाप का अर्थ हमारे लिए अपने द्वारों को उनके लिए खोलना है जिन्होंने अपने जीवन में युद्ध के एक गहरे सदमे का अनुभव किया है। जब एक शिकार के रुप हम अपने जीवन में अपने प्रतिकार की भावना से बाहर निकलते तो हम शांति निर्माता के सबसे विश्वासी अगुवे बनते हैं। इसके लिए हमें इस बात की आवश्यकता है कि हम दूसरों की प्रतीक्षा किये बिना अपनी ओर से साहस पूर्वक प्रथम कदम लेने का प्रयास करें। हमें एक अच्छे व्यक्ति के रूप में आशावान होने की जरूरत है। हम में से हर कोई वह व्यक्ति हो सकता है। संत पापा ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि हम अपने जीवन में युद्ध और विभिन्नता की स्थिति को नजरंदाज करें। यह हमारे निजी और संरचनात्मक अन्यायों को वैध नहीं करती है। संत पापा जोन पौल द्वितीय मेल-मिलाप के बारे में कहते हैं, “यह भाइयों के बीच एक मिलन है जो अपने अहंकार और मिथ्या-न्याय पर विजय पाने की कोशिश करते हैं। यह भावनाओं का फल है जो मजबूत, महान और उदार है जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए सम्मान और प्रत्येक नागरिक को समाज के उचित मूल्यों के आधार पर एक सह-अस्तित्व स्थापित करने हेतु नेतृत्व प्रदान करता है।”(Letter to the Bishops of El Salvador, 6 August 1982). मेल-मिलाप इस प्रकार सबों के प्रयास से ठोस बन जाता है जो भविष्य के निर्माण हेतु मदद करता और आशा को बढ़ावा देता है। शांति के प्रयास हमारे निःस्वार्थ निष्ठा पूर्ण मेल-मिलाप कार्य के बिना असफल हो जाते हैं।

सुसमाचार की पराकाष्ठा येसु को एम्मनुएल की संज्ञा देने में होती है जिसका अर्थ ईश्वर हमारे साथ हैं। संत मत्ती रचित सुसमाचार की शुरूआत और अंत यही है, “मैं दुनिया के अंत तक सदा तुम्हारे साथ हूँ।” (मती, 28.20) यह प्रतिज्ञा कोलम्बिया में भी पूरी होती है जहाँ हम मान्यवर जीसस एमिलियो जार्मिलो मोंसलेवे, अरौका के धर्माध्यक्ष और अर्मेरो के पुरोहित पेदरो मारिया रामिरेज की शहादत को पाते हैं जिनके द्वारा यहाँ के लोगों अपने हिंसा के दलदल और कटुपन से बाहर निकले की चाह रखते हैं।

संत पापा ने कहा कि इस सुन्दर वातावरण में यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम मेल-मिलाप हेतु हाँ कहें और अपनी हाँ में प्रकृति को भी अपने में समाहित करें। प्रकृति पर हमारा अधिकार और इसका दोहन हमारे द्वारा अनायास ही नहीं होता है। आप के देश में किसी ने इसे एक स्वर देते हुए गाया है, “वृक्ष रो रहे हैं, उन्होंने इतने सालों तक हिंसा देखी है। समुद्र अपने में भूरा है क्योंकि धरती में खून सनी हुई है।” (जुआन, मिनस पिएड्रास) हमारे हृदय में हिंसा की उपस्थिति जो पापों से घायल है, मिट्टी, पानी, हवा और जीवन के सभी रुपों में एक बीमारी-सा दिखलाई देती है।” (लाओदातो सी.2) हमें माता मरियम की भांति हाँ करने की जरूरत है और उनके साथ ईश्वर के महान कार्यों हेतु कृतज्ञता के गीत गाने की आवश्यकता है क्योंकि उन्होंने हमारे पूर्वजों से प्रतिज्ञा की है कि वे पूरे देश और यहाँ के नागरिकों की सहायता करते हैं। वे कोलम्बिया की सहायता करते हैं जो आज मेल-मिलाप करने की चाह रखती है, उनकी यह प्रतिज्ञा हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए भी सदैव बनी रहती है।


(Dilip Sanjay Ekka)

09/09/2017 16:16