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रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

हम शांति और जीवन के शिल्पकार बनें

बोगोटा के साइमन बोलिवार पार्क में मिस्सा - AFP

08/09/2017 15:51

वाटिकन रेडियो, 08 शुक्रवार (रेई) संत पापा फाँसिस ने अपनी कोलाम्बिया की प्रेरितिक यात्रा के पहले दिन बोगोटा के साइमन बोलिवार पार्क में मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

मिस्सा बलिदान के दौरान उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि येसु अपने प्रथम शिष्यों को गेनेसरेत झील के किनारे बुलाते हैं जहाँ लोग उनके वचनों को सुनने हेतु जमा हुए थे। यह वह स्थल था जहाँ मछुवारे अपने रोज दिन के कार्यों को पूरा करने के उपरान्त अपने जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए एक सम्मान जनक ज़िंदगी का निर्वाहन करते थे। सुसमाचार लेखक लूकस के अनुसार यही वह स्थान था जहाँ येसु गलीलिया समुद्र के किनारे शिक्षा दिया करते थे। मछुवारे शिष्य रात भर मछली पकड़ने की कोशिश करते लेकिन उनका अथक प्रयास निराशाजनक जान पड़ता है। संत पापा ने कहा कि प्राचीनतम ख्रीस्तीय अनुवाद के अनुसार समुद्र की विशालता लोगों के जीवन की ओर इंगित करती है जहाँ हम उथल-पुथल और अंधकारमय परिस्थिति को पाते हैं। यह मानव जीवन के उन खतरों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करता है जिसमें जीवन को मिटा देने की शक्ति है।

हम मानव जीवन को एक भीड, सागर की लहरों के रुप में परिभाषित करते हैं। उस समय येसु के पीछे समुद्र था और उनके सामने एक भीड़ थी। उनको सुनने वाले अपने में इस बात का अनुभव करते हैं कि येसु उनके दुःख तकलीफों से कितने मर्माहत हैं। वे उनके जीवनदायी वचनों में विश्वास करते हैं क्योंकि येसु के वचनों में कुछ तो खास है जिसके द्वारा भीड़ उनकी ओर आकर्षित हुई जाती है। येसु का वचन लोगों के हृदय को परिवर्तित करता और उनके दैनिक जीवन की परियोजनाओं तथा विचारों में परिवर्तन लाता है। उनके वचन उनके कार्यों में परिलक्षित होते जो लोगों के दुःख दर्द को दूर करते हैं। उनके वचनों को हम समुद्री तट की तरह सुरक्षित और समुद्री लहरों की भांति कोमल पाते हैं।

संत पापा ने कहा कि कोलाम्बिया का मनोरम बोगोटा शहर सुसमाचार के मानवीय दृश्यों से मेल खाता है। यह भी हम लोगों की एक भीड़ को देखते हैं जो ईश्वरीय वचनों से प्रकाशित होने को आतुर हैं जिससे वे अपने जीवन की सुन्दरता को देख सकें। यहां के बच्चे, युवा, जवान, नर और नारी एक अकल्पनीय उर्वरक ज़मीं में निवास करते हैं जो सभों को जीवन प्रदान करती है। लेकिन दूसरी ओर अन्य स्थानों की भांति यहाँ भी हम एक घोर अंधकार को पाते हैं जो जीवन को विनाश करने का एक भय उत्पन्न करता है। अन्याय, सामाजिक असमानता का अंधकार, व्यक्तिगत और कुछेक समुहों द्वारा भ्रष्टाचार जो कि असीमित स्वार्थ से उत्प्रेरित है अच्छे जीवन को कुचल देता है। मानव के प्रति सम्मान की कमी का अंधकार रोज दिन कितने ही निर्दोषों को निगल लेती है। उनका लोहू स्वर्ग की ओर से पुकारता है। घृणा और प्रतिकार रूपी अंधकार उन लोगों के हाथों को गंदा कर देता जो अपने अधिकार का दुरुपयोग करते हैं। वे लोग असंवेदनशीलता के अंधकार में रहते हैं जो अन्यों के दुःख-दर्द से प्रभावित नहीं होते हैं। येसु इन सारे अंधकारों का दमन करते और पेत्रुस को आज्ञा देते हैं कि वह अपनी नाव को गहरे पानी में ले चले।” (लूका.5.4)

संत पापा ने कहा कि हम अपने जीवन में एक तर्क-वितर्क का शिकार हो सकते हैं विशेषकर जब हमें जी तोड़ मेहनत के बाद भी कुछ हासिल नहीं होता है जैसा कि पेत्रुस के साथ हुआ। हमें पता है कि कड़ी मेहनत के बाद भी असफलता होना हमारे लिए किस तरह की अनुभूति लेकर आती है।

यह देश इस बात से भली भांति परिचित है क्योंकि स्वतंत्रता प्राप्ति के छः सालों में यहाँ सोलह राष्ट्रपति हो चुके हैं और देश के विभाजन से पूरे देशवासियों को अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ा है। कोलाम्बिया की कलीसिया फलहीन प्रेरितिक कार्य को जानती है लेकिन पेत्रुस की तरह ही हम अपने स्वामी पर विश्वास करते हैं जिनकी वाणी हमारे जीवन के अंधकार भरे क्षणों में हमें ज्योति प्रदान करती है। पेत्रुस वह व्यक्ति है जो येसु के निमंत्रण को स्वीकारता और सारी चीजों का परित्याग कर उनका अनुसरण करता है। वह एक नया मछुवारा बनता है जो नये उत्साह और खुशी के साथ अपने भाई-बहनों के लिए ईश्वर का प्रेरित बनता है।

येसु पेत्रुस को पानी में जाल डालने मात्र नहीं कहते लेकिन वे उसे गहरे पानी में जाल डालने को कहते हैं। जाल डालने का अर्थ जीवन में उत्तदायित्व को लेना है। बोगोटा और कोलाम्बिया के वृहद समुदाय में हमें एकता रुपी मजबूत जाल डालने की जरुरत है जिसके द्वारा मानव जीवन की सुरक्षा की जा सके विशेष कर बच्चों, बुजुर्गों, माताएं, बीमार और समाज के हाशिये में पड़े लोगों का जोकि अतिसंवेदनशील हैं। हम अपने समुदाय को सजीव, न्यायसंगत और भातृत्व पूर्ण तब बनाते हैं जब हम ईश्वर के वचन को अपने जीवन में स्वागत करते हैं। ऐसे करने के द्वार हम येसु के सच्चे शिष्य बनते और स्वतंत्र हृदय से उनका अनुसरण करते हैं जो हमें अपने जीवन को सकारात्मक रुप में देखने हेतु मदद करता है।

संत पापा ने कहा कि हमें अपने जीवन में एक दूसरों को बुलाने की जरुरत है जैसे कि मछुवारे शिष्यों ने किया जिससे हम एक दूसरे को भाई-बहनों, मित्रों के रुप में देख सकें। बोगोटा और कोलम्बिया अपने में झील के किनारे बसे उस स्थान के समान हैं जहाँ से होकर येसु गुजरते हैं जिससे वे हमें अपनी उपस्थिति और फलदायक शब्दों को दे सकें। हमारे पुकारने पर वे हमें जीवन के अंधकारमय क्षणों से बाहर निकालते हैं। वे हम प्रत्येक को अपने पास बुलाते हैं जिससे कोई भी जीवन रुपी समुद्री तुफान में फँसा न रहे। वे हमें अपने स्वार्थपूर्ण जीवन का परित्याग करने को प्रोत्साहित करते जिससे हम संवेदनशीलों को अपने साथ लेते हुए उनके अधिकारों की रक्षा कर सकें।

पेत्रुस येसु की शक्ति और शब्दों के मध्य अपने में छोटेपन का अनुभव करता है। वह अपनी कमजोरी, अपने जीवन के उतर-चढ़ाव को जानता है उसकी तरह हम भी अपने को जानते हैं। हम अपने देश के हिंसक इतिहास और जन सामान्य में विभाजन के दौरान अपने जीवन की नाव में अन्यों को स्थान नहीं दिया है। लेकिन जिस तरह येसु ने पेत्रुस को गहरे पानी में ले चलने का निमंत्रण दिया उसी तरह वे हमें अपने जीवन में जोखिम उठाने, अपने स्वार्थ का परित्याग कर अपने पीछे आने को कहते हैं। वे हमें भय का परित्याग करने को कहते हैं जो ईश्वर की ओर से नहीं आता है क्योंकि यह हमें लकवाग्रस्त बना देता है जिसके कारण हम शांति के शिल्पकार और जीवन को प्रोत्साहित नहीं कर पाते हैं। 


(Dilip Sanjay Ekka)

08/09/2017 15:51