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दक्षिण एशिया में 1.8 मिलियन बच्चे बाढ़ से प्रभावित

प्रतीकात्मक तस्वीर - AP

02/09/2017 15:51

एशिया, शनिवार, 2 सितम्बर 2017 (वीआर अंग्रेजी): दक्षिण एशिया में अगस्त माह में आये भयंकर बाढ़ ने कुल 18,000 स्कूल घरों को ध्वस्त कर दिया है जिसे कई वर्षों के बाद सबसे खतरनाक बाढ़ माना जा रहा है। ″सेभ चिलड्रेन″ यानी ‘बच्चे बचाओ’ की 31 अगस्त की रिपोर्ट में कहा गया है कि बाढ़ ने बच्चों की शिक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित किया है एवं इससे बच्चों के भविष्य में भी दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका है।

‘बच्चे बचाओ’ संगठन ने अपनी चिंता व्यक्ति की है कि न केवल स्कूल घरों के ध्वस्त होने के कारण बच्चे स्कूल जाने में असमर्थ हैं किन्तु उन स्थानों को खाली किये जाने के कारण भी बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इस तरह बांग्लादेश, नेपाल और भारत के उत्तर-पूर्व में लगभग 1.8 मिलियन बच्चे स्कूलों से वंचित हैं।

‘बच्चे बचाओ’ का कहना है कि यदि राहत प्रयास में शिक्षा विभाग उन बच्चों को प्राथमिकता न दे तो लाखों बच्चे स्कूलों से हमेशा के लिए वंचित हो जायेंगे। 

भारत में ‘बच्चे बचाओ’ के महाप्रबंधक राफे हुस्साईन ने कहा, ″शिक्षा के महत्व को मानवीय संकट की स्थिति में कम महत्व दिया जाता है। यदि बच्चे लम्बी अवधि के लिए स्कूल से बाहर होते हैं तो इसकी संभावना कम रहती है कि वे स्कूल वापस लौटेंगे, इसीलिए यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि बच्चों के भविष्य की रक्षा हेतु बच्चों की शिक्षा को भी प्राथमिकता दी जाएँ ताकि वे जल्द स्कूलों में लौट सकें।″  

उन्होंने बतलाया कि इस क्षेत्रीय में बाढ़ में 1,200 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गयी है और करीब 40 मिलियन लोग प्रभावित हैं। भारत में 12,000 से अधिक स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं  नेपाल में 2,000 और बांग्लादेश में 4,000 स्कूल घरों के ढाह जाने के साथ इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में स्कूल को कई हफ्तों तक बंद कर दिया गया है, जबकि अन्य विद्यालयों को खुला रखने पर भी वहाँ या तो शिक्षण कर्मचारियों की कमी है अथवा शिक्षण सामग्रियों का अभाव है। विद्यार्थियों की उपस्थिति भी बहुत कम है क्योंकि कई बच्चे अपने परिवारों के साथ बाढ़ से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

‘बच्चे बचाओ’ तीनों देशों के बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में शिक्षण प्रणाली को ठीक करने हेतु सहायता कर रही है। सहायता एजेंसी ने सीखने की अस्थायी जगह स्थापित की है ताकि कक्षाएं तुरंत शुरू हो सकें। वह बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षण सामग्रियों का वितरण कर रही है और बाढ़ से प्रभावित छात्रों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने की कोशिश कर रही है। सहायता एजेंसी बच्चों के बीच अस्थायी आश्रय हेतु तिरपाल का वितरण भी कर रही है।


(Usha Tirkey)

02/09/2017 15:51