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गिरजाघर ध्वस्त किये जाने के खतरे के बीच, विश्वासियों ने की जागरण प्रार्थना

चांगज़ही के वांगकुन स्थित गिरजाघर - RV

31/08/2017 16:55

चांगज़ही, बृहस्पतिवार, 31 अगस्त 17 (एशियान्यूज़): चांगज़ही के वांगकुन स्थित गिरजाघर में इन दिनों तनाव का माहौल है जो भूमि सुधार और उसके ध्वस्त किये जाने के खतरे के कारण उत्पन्न हुआ है तथा विगत दिनों के संघर्ष और बुलडोजर के नाकाबंदी (अस्थायी) के बाद तेज हो गया है।

एशियान्यूज़ की जानकारी के अनुसार धर्मप्रांत के सैंकड़ों विश्वासियों ने रातभर खुले आसमान के नीचे बैठकर प्रार्थना एवं रोजरी माला का जाप करते हुए जागरण में बिताया ताकि गिरजाघर के परिसर पर हस्तक्षेप को रोका जा सके। विश्वासियों के साथ कुछ पुरोहित भी उपस्थित थे जिन्होंने धारणा में भाग लिया था और उनमें से कई घायल हो गये थे। अपने अधिकारों की मांग हेतु कई लोग दूर-दूर के पल्लियों से आये थे तथा चांगज़ही में ठहरे हुए थे। 

चांगजही के धर्माध्यक्ष पीटर डिंग लिंगबिन ने ख्रीस्तयाग के दौरान न्याय की मांग करते हुए सरकार पर आरोप लगाया था कि 10 सालों पहले अधिकारियों ने गिरजाघर को लौटा दिया था तथा उसके आस-पास की जमीन धर्मप्रांत को दे दिया था। अब वे इसका प्रयोग सार्वजनिक मैदान के रूप में करने हेतु मांग कर रहे हैं। उन्होंने उन पुरोहितों एवं विश्वासियों की याद की जिन्हें धारणा के दौरान हिंसा का शिकार होना पड़ा था।

वांगकुन गिरजाघर 100 साल पुराना एक स्मारक है तथा उसके परिसर की जमीन काफी लम्बे समय से कलीसिया के अधीन है। 1980 के दशक में देंग जियाओपिंग द्वारा अनुमोदित एक कानून के मुताबिक, जमीन को वैध मालिकों को लौटा दिया जाना चाहिए था किन्तु 2012 तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं किया गया है जब स्थानीय सरकार ने सम्पति लौटाने हेतु दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया।

कुछ महीनों पहले उसी सरकार ने गिरजाघर के परिसर को सार्वजनिक मैदान बनाने की मांग की है इस तरह विश्वासियों का कहना है कि वहाँ कलीसिया द्वारा कोई क्रिया-कलाप नहीं किया जा सकता है तथा एक खतरा बना हुआ है कि देर अथवा जल्दी, उस पवित्र गिरजाघर को ढाह दिया जाएगा।

कल स्थानीय सरकार ने उसे ढाहने की शुरूआत करना चाहा तथा गिरजाघर के चारों ओर बने घेरे को ढाह दिया। जिसके लिए कई बुलडोर लाये गये थे। मजदूर, सरकारी अधिकारियों, पुलिस, आक्रमणकारियों और सैन्य बलों के साथ करीब 400 की संख्या में आये थे।

दूसरी ओर अपने पवित्र स्थल की रक्षा में हज़ारों विश्वासी जमा हुए थे और दर्जनों पुरोहितों ने भी लोगों के साथ धारना में भाग लिया था।  

अधिकारियों के आदेश पर आक्रमणकारी, पुरोहितों एवं विश्वासियों को पीटने लगे। पीटने वालों में से किसी ने चिल्लाया पहले पुरोहितों को मार डालो। पीटना घंटों तक जारी रहा तथा भीड़ ने विश्वासियों के कई कार नष्ट कर दिये। इस दौरान दूसरे काथलिकों को घटना स्थल तक पहुँचने से रोकने के लिए सभी रास्ते को बंद कर दिये गये थे।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ अपराधी और कुछ घायल विश्वासी अब भी पुलिस स्टेशन में हैं। 

संघर्ष के दौरान धर्माध्यक्ष डिंग ने स्थानीय सरकार से बात करते हुए हिंसा रोकने एवं मामला को सुलझाने की बात कही। धर्माध्यक्ष के लिए यह मामला न केवल आर्थिक है किन्तु धार्मिक दबाव तथा काथलिकों के विरूद्ध भेदभाव एवं उनके मानव अधिकार का हनन है। उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि वे पुरोहितों एवं विश्वासियों पर की गयी हानि की भरपाई करें, जिन्हें बड़ी निर्दयता से पीटा गया तथा कईयों के कार को नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने हिंसा के अपराधियों को दण्ड दिये जाने की भी मांग की है।

एक पुरोहित ने कहा कि ये सब राष्ट्रपति सी जिंगपिंग के धोखापूर्ण शब्दों के कारण हो रहा है जिन्होंने कहा था कि वे धर्मों को राष्ट्र निर्माण हेतु एक माध्यम के रूप में मानते हैं ″यदि लोगों में विश्वास है, तब देश में आशा है, देश में ताकत है।″

कुछ लोगों के अनुसार भूमि का उपयोग किसी नये परियोजना के लिए करने की योजना बनायी गयी है जिसे छिपाया जा रहा है। यह क्षेत्र हवाई अड्डा से कुछ ही दूरी पर है अतः इसे बेचना बहुत कीमती होगा।

कलीसिया चाहती है कि उस स्थान की रक्षा उदार कार्यों एवं सुसमाचार प्रचार में प्रयोग हेतु किया जाना चाहिए।   

एक पुरोहित ने बतलाया कि बुलडोजर रोक दिया गया है किन्तु उसे अब भी उसी स्थान पर रखा गया है। उच्च अधिकारियों ने अब भी कुछ जवाब नहीं दिया है।


(Usha Tirkey)

31/08/2017 16:55