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खतौली ट्रेन दुर्घटना, स्थानीय लोगों ने दिया आदर्श उदाहरण

खतौली ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त - AP

22/08/2017 15:56

खतौली, मंगलवार, 22 अगस्त 2017 (मैटर्स इंडिया): दुःख की घड़ी में जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए भारतीय अपनी जाति एवं धर्म को भूल जाते हैं। यह दृश्य पुनः एक बार 21 अगस्त को दिखाई पड़ा जब उत्तर भारत के लोग दुर्घटनाग्रस्त रेल यात्रियों की मदद हेतु आगे आये।

यूपी में मुजफ्फरनगर के पास खतौली में शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस उस समय दुर्घटना ग्रस्त हो गयी जब उसके 14 डिब्बे पटरी से बाहर हो गये। दुर्घटना नई दिल्ली से 100 किलो मीटर की दूरी पर घटी। इस दुर्घटना में 22 लोगों की मृत्यु हो गयी तथा करीब 156 लोग घायल हो गये हैं। 

मैटर्स इंडिया के अनुसार दुर्घटना में फँसे लोगों की मदद हेतु स्थानीय लोगों ने अहम भूमिका निभायी। जब स्थानीय लोगों ने सुना कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन में यात्री डिब्बों में फंसे हैं तो सैंकड़ों, स्त्री एवं पुरूष, युवा एवं वृद्ध तथा  हिन्दू, मुस्लिम और ख्रीस्तीयों ने एकजुट होकर उनकी मदद की।

पीड़ितों तक पहुंचने वालों में पहले थे जगत् कॉलोनी के हिन्दू और इस्लामाबाद गांव के मुसलमान, जो दुर्घटना स्थल के नजदीक है।

उन्होंने अथक रूप से राहत कर्मियों एवं अन्य लोगों के लिए भी भोजन एवं पानी प्रदान किया।

खतौली में अध्यापन का काम करने वाली काथलिक धर्मबहनों ने भी राहत कार्यों में अपना योगदान दिया। वहाँ निष्कलंक मरियम को समर्पित कार्मेल की धर्मबहनें स्कूल चलाती हैं। मेरठ के लोगों ने भी भोजन और दवाई के माध्यम से लोगों की मदद की।

ट्रस्ट ऑफ इंडिया न्यूज़ एजेंसी ने कहा कि संकट की इस घड़ी में यह शहर सौहार्द एवं एकता का मिशाल बन गया।

रेलनाईन के अति करीब परिवार के मनोज ने कहा कि उसने धातु के जोरदार चरमाराहट एवं लोगों के चिल्लाने की आवाज सुनी। एस-2 कोच का आखरी भाग दूसरे डिब्बे के ऊपर चढ़ गया था और मनोज के घर को टक्कर मार दिया था जो केवल रविवार को रेल मरम्मत दल द्वारा सावधानी पूर्वक खींचकर नीचे उतारा गया।

एक अन्य व्यक्ति बालियान ने कहा, ″लोग बड़े संकट में थे तथा ″बचाओ″, ″बचाओ″, ″ईश्वर हमें बचाओ″ कहकर मदद की गुहार कर रहे थे, हमने इस तरह पहले कभी नहीं देखा था।″  

मनोज ने कहा, ″जिस दिन दुर्घटना हुई शहर के सभी ओर से लोग घटना स्थल पहुँचे। वहाँ एक बड़ी भीड़ जमा हो गयी थी।″

 


(Usha Tirkey)

22/08/2017 15:56