Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

कलीसिया \ एशिया की कलीसिया

बाढ़ के दो महीनों बाद भी मिजोराम में राहत की कोई सुविधा नहीं

बाढ़ में डूबा घर एवं बाढ़ में फंसे लोग - AFP

17/08/2017 16:30

लुंगलेई, बृहसपतिवार, 17 अगस्त 2017 (ऊकान): भारी बारिश के कारण बाढ़ के दो महीनों के बाद भी तलबुंग के कई गांवों में संकट की स्थिति बनी हुई है, स्थानीय समुदाय के लोग सामान्य स्थिति में लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

13 से 15 जून के बीच आये ″मोरा″ साईक्लोन ने बंगलादेश और भारत के उत्तरपूर्वी हिस्से के कई घरों एवं लोगों के जीवन को नष्ट कर दिया है। इससे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में मिजोराम एक है जो बाढ़ से त्रस्त है, खासकर, मिजोराम-बंगलादेश की सीमा तलबुंग उपखंड।″  

शहर के अधिकांश हिस्सों को में कुछ सुधार हो रहा है किन्तु नदी के किनारे स्थित गांव जो बाढ़ के सबसे अधिक प्रभावित थी स्थिति अभी भी बदतर है।

तालाबाघ गांव में जहां करीब 1,500 की आबादी है, बहुत अधिक नुकसान हुआ है और राहत बहुत कम। अधिकांश घर तीन दिनों तक जलमग्न थे। बाढ़ के बाद कुछ घर बच गए किन्तु बहुत से घर ढह गये। कुछ परिवार, जो रोजाना मजदूरी करते हैं, अभी भी अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं और अपने घरों के पुनर्निर्माण के लिए सक्षम नहीं हैं।

बाढ़ पीड़ित चकमा ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, ″हम तीनों एक परिवार के हैं जब आधी रात के आसपास पानी शुरू हो गया, हमें पता नहीं था कि यह अगले दिन पूरे गांव को ढंक लेगा। किसी तरह हम अपने कुछ सामानों के साथ बच गए लेकिन बाढ़ ने अपने साथ हमारे घरों को बहा लिया। मैं काम पर वापस नहीं लौट पाया हूँ।″

यही दृश्य एक अन्य गांव सेरहुआन में भी है, जो तलबुंग से नदी के पार स्थित है। बाढ़ के दौरान पूरा गांव जल हो गया था। ग्रामीणों ने ऊंचे स्थलों पर अस्थायी तंबू में शरण ली। जब बाढ़ का पानी घटा तो  ज्यादातर घर बने रहे, लेकिन बहुत कुछ पानी में बह गया।

वाईसीए और यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) दो स्थानीय गैर-सरकारी संगठन थे जिन्होंने बाढ़ से राहत दिलाने हेतु सबसे पहले आगे आये। बीएसएफ कर्मियों के साथ, उनके स्वयंसेवकों ने लोगों को निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में मदद की।

प्रायोजकों को खोजने और बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए चावल, दाल, तेल, नमक, सेनेटरी पैड और सिलोपोलिन (एक विशेष प्रकार का तिरपाल) जैसे सामग्री प्रदान करने के लिए, जमीनी स्तर पर मानवतावादी ईसाई संगठन, विश्व विजन भारत, को लगभग 15 दिन लगे। एनजीओ नौ गांवों में कुल 833 परिवारों तक पहुंची और 3,536 परिवारों के सदस्यों की मदद की, जिनमें से 44 प्रतिशत 18 साल से नीचे के हैं।

एनजीओ ने बाढ़ के 30 दिनों के भीतर गांवों को राहत सामग्री दी है लेकिन पिछले 50 सालों में सबसे विनाशकारी बाढ़ से निजात पाने के लिए, सहायता का यह स्तर पर्याप्त नहीं लगता।


(Usha Tirkey)

17/08/2017 16:30