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झारखंड के मुख्यमंत्री पर धार्मिक सद्भाव में बाधा डालने का आरोप

प्रतीकात्मक तस्वीर - RV

16/08/2017 16:16

झारखंड, बुधवार, 16 अगस्त 2017 (वीआर अंग्रेजी): झारखंड राज्य के ईसाई मिशनरियों के खिलाफ दिया गया विज्ञापन, ईसाई नेताओं और लोगों को विरोध प्रदर्शन हेतु प्रेरित कर रहा है जो इसे एक बुरे अभियान के हिस्से के रूप में देख रहे हैं।

झारखंड सरकार द्वारा दिये गये इस विज्ञापन को भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेनहास ने शर्मनाक कहा।

विज्ञापन 12 अगस्त को स्थानीय हिन्दी समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया था जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के शब्दों को गलत तरीके से उद्धृत किया गया था। विज्ञापन में महात्मा गाँधी का एक मुस्कुराता हुआ तस्वीर यह कहते हुए लगाया गया था कि ख्रीस्तीय मिशनरी अकसर गरीब लोगों को कुछ उपहार देकर धर्मांतरण करने का प्रयास करते हैं।

विज्ञापन में महात्मा गाँधी को यह कहते हुए दर्शाया गया है कि भोले-भाले, अबोध, अज्ञानी और गरीब वनवासी येसु और मुहम्मद का भेद नहीं कर सकते क्योंकि वे गाय के समान मूक और सरल हैं।

झारखंड एवं देश पर शासन कर रही भारतीय जनता पार्टी तथा कुछ अन्य हिन्दू दलों का मानना है कि ख्रीस्तीयों द्वारा प्रदान की जा रही शिक्षण एवं स्वास्थ्य सेवाएँ धर्मांतरण के मकसद से दी जाती है।

विवादित विज्ञापन प्रकाशित किये जाने के ठीक दूसरे ही दिन धर्मांतरण रोकने के लिए धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक पारित हुआ।

धर्माध्यक्ष मसकरेनहास जो राँची महाधर्मप्रांत के सहाय धर्माध्यक्ष भी हैं उन्होंने ऊका समाचार से कहा कि विज्ञापन ने राजनैतिक एवं सामाजिक विवाद उत्पन्न किया है जिस में राज्य के लोगों को इतना सरल बतलाया गया है कि वे अपने आस्था के बारे निर्णय लेने तक के लिए असमर्थ हैं। 

आलोचकों का कहना है कि धर्मांतरण विरोधी कानून तथा विज्ञापन, ख्रीस्तीय एवं मुसलमानों जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरूद्ध 2014 से ही चलाये जा रहे एक अभियान का हिस्सा है। जब भाजपा सरकार बनी एवं नरेद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने।

धर्माध्यक्ष ने कहा, ″हम जानना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जो ″सबका साथ सबका विकास″ का नारा लगाते हैं, क्या उनका नारा एक मुख्यमंत्री द्वारा सत्ता के अत्यधिक दुरुपयोग के बारे विचार करता है।″

मीडिया के एक वर्ग ने भी अभियान पर धन का दुरुपयोग करने और गांधी को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है।

धार्मिक और नागरिक संगठनों के सामूहिक झारखंड एकता फोरम ने कहा कि राज्य सरकार जानबूझकर धार्मिक सद्भाव में बाधा डाल रही है।

मंच ने कहा, ″महात्मा गाँधी जो कि राष्ट्रपिता माने जाते हैं उन्होंने सभी धर्मों में विश्वास किया तथा वे धर्म के नाम पर लोगों के बीच विभाजन के सख्त खिलाफ थे। 

राज्य की कुल 33 मिलियन की आबादी में से लगभग 25 प्रतिशत आदिवासी लोग हैं, जो 9 मिलियन के करीब है। राज्य में केवल 1.5 मिलियन लोग ईसाई हैं, जिनमें से कम से कम आधे काथलिक हैं, जिनमें से लगभग सभी आदिवासी हैं।


(Usha Tirkey)

16/08/2017 16:16