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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

विश्वास हमारे जीवन का मार्ग

देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा - AFP

14/08/2017 14:35

वाटिकन सिटी, सोमवार 13 अगस्त 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजा घर के प्रांगण में जमा हुए हजारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को रविवारीय देवदूत प्रार्थना के पूर्व  संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात

आज का सुसमाचार हमारे लिए उस दृश्य की चर्चा करता है जहाँ हम येसु को गलीलिया झील के किनारे सारी रात प्रार्थना करने के बाद पानी पर चलते हुए चेलों के पास नाव की ओर आते हुए सुनते हैं। नाव झील के बीच तूफानी हवा में फाँसी हुई थी। शिष्यों ने जब येसु को पानी पर चलते हुआ अपनी ओर आते देखते तो वे उन्हें प्रेत समझ कर भयभीत हो गये और चिल्लाने लगते हैं। लेकिन येसु ने उन्हें ढाढ़स बाँधते हुए कहा, “ढारस रखो, डरो मत, मैं ही हूँ।” पेत्रुस जो हमेशा की तरह जोशीला है येसु से कहता है, “प्रभु यदि आप ही हैं तो मुझे पानी पर अपने पास आने की आज्ञा दीजिए”। येसु उसे कहते हैं, “आ जाओ”। पेत्रुस नाव से उतर कर पानी पर चलते हुए येसु की ओर बढने लगता है, लेकिन आंधी को देख कर वह डर जाता और पानी में डूबने लगता है, वह येसु को पुकारता और कहता है, “प्रभु, मुझे बचाइए”। येसु तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ लेते हैं।

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार का यह अंश अपने में अति महत्वपूर्ण संकेतिक अर्थ को समाहित करता है और हमें व्यक्तिगत तथा समुदायिक रुप से, हम जो यहाँ इस प्रांगण में जमा हुए हैं प्रत्येक को अपने विश्वास पर चिंतन करने हेतु आहृवान करता है। क्या हमारा समुदाय एक कलीसियाई समुदाय है जहाँ हम विश्वास को पाते हैंॽ हमारा व्यक्तिगत विश्वास और हमारे समुदाय का विश्वास किस तरह का हैॽ संत पापा ने कहा कि नाव हम प्रत्येक के जीवन का प्रतीक है यह कलीसिया में हमारे जीवन की भी एक निशानी है। दूसरी ओर आंधी हमारे जीवन की कठिनाइयों और मुसीबतों को दिखलाती है। संत पेत्रुस का येसु ख्रीस्त की ओर आने की बात, “प्रभु मुझे अपनी ओर आने की अनुमति दीजिए”, और उनकी पुकार, “प्रभु मुझे बचाइए”, ये हमारे जीवन के मनोभावों से मेल खाते हैं जहाँ हम येसु के निकट अपने की चाह रखते लेकिन जीवन में भय और चिंता जिसका अनुभव हम अपने व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में करते हैं हमें आंतरिक रुप से संवेदनशील और बाह्य रुप से एक तरह की कठिनाई में डाल देता है।

संत पापा ने कहा कि पेत्रुस येसु के वचनों में अपने को विश्वस्त नहीं पाता है जो उसके लिए एक रस्सी के समान है जिसे पकड़ कर वह समुद्री तूफान में भी येसु की ओर बढ़ता है। हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है। जब हम अपने को येसु के वचनों से संयुक्त करने के बदले जन्मकुण्डली और हस्तरेखा देखने वालों पर अधिक विश्वास करते तो अपने जीवन में डूबने लगते हैं। इसका अर्थ यही है कि हम अपने विश्वास के जीवन में मजबूत नहीं हैं। आज का सुसमाचार हमें इस बात की याद दिलाती है कि येसु और उनके वचनों में हमारा विश्वास हमारे लिए उस मार्ग को नहीं खोलता जहाँ सदैव चीज़ें सरल और शांत हैं। यह हमारे जीवन में कठिनाई रूपी तूफान भरी हवाओं को दूर नहीं करती है। विश्वास हमारे जीवन में ईश्वर की उपस्थिति का एहसास दिलाती है जिसके द्वारा हम अपने जीवन की सारी मुसीबतों का सामना करने हेतु सबल होते हैं। ईश्वर पर हमारा विश्वास हमारे अंधकारमय जीवन में भी मार्ग प्रशस्त करता है। संत पापा ने कहा कि हम कह सकते हैं कि विश्वास जीवन की कठिनाइयों से बचाव का एक रास्ता नहीं अपितु यह जीवन के मार्ग में अडिग बने रहने हेतु हमारा एक बल है जो हमारे जीवन को एक अर्थ प्रदान करता है।

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार का यह दृश्य हमारे लिए कलीसिया की एक अद्भुत सच्चाई को प्रस्तुत करती है। जीवन रूपी हमारे नाव को, संसार रूपी समुद्र में कई तरह के तूफानों, मुसीबतों का सामना करना है जो हमारे जीवन में हावी हो जाते हैं। अपने जीवन के इस तूफानी दौर में हमारा साहस और हमारी योग्यताएं हमें नहीं बचाती वरन येसु और उनके वचनों पर हमारा विश्वास हमें बचाता है। संत पापा ने जोर देते हुए कहा कि येसु और उनके वचनों में हमारा विश्वास ही हमारे जीवन को सुरक्षित रखता है। हम अपने जीवन की कठिनाइयों और कमजोरियों के बावजूद जीवन रूपी नाव को सुरक्षित रख पाते हैं क्योंकि हम घुटनों के बल झुककर अपने ईश्वर की पूजा आराधना करते हैं जैसे की स्वयं शिष्यों ने किया। उन्होंने यह कहते हुए येसु का दण्डवत् किया, “आप सचमुच ईश्वर के पुत्र हैं”। संत पापा ने इन सुन्दर वचनों पर बल देते हुए विश्वासी समुदाय को इसे दुहराने का आहृवान किया, “आइए हम एक साथ मिल कर कहें, आप सचमुच ईश्वर के पुत्र हैं”।

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि माता मरिया हमारे जीवन की परीक्षाओं, कठिनाइयों और मुसीबतों के बावजूद हमें कलीसिया रूपी नाव में बने रहने हेतु मदद करें। इतना कहने के बाद उन्होंने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।
देवदूत प्रार्थना के उपरान्त संत पापा ने सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासी समुदाय का स्नेहपूर्ण अभिवादन किया, विशेषकर रोम के विभिन्न पल्लियों और समुदायों से आये हुए लोगों का।

उन्होंने त्रेभीसो और वीचेंसा के युवा स्काऊट दलों, राष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागी हो रहे फ्रासिंसकन युवा दल के सदस्यों, नेपल्स की मरिया संतिसिमा सोरेंटो की धर्म बहनों और रोम के सियेना से पैदल आये तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। और अंत में उन्होंने अपने लिए प्रार्थना का नम्र निवेदन करते हुए सभों को रविवारीय मंगलकामनाएँ अर्पित कीं।
 

 


(Dilip Sanjay Ekka)

14/08/2017 14:35