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जेस्विट ब्रादर रिचार्ड फेरनान्दो के लिए संत घोषणा का द्वार खुला

प्रतीकात्मक तस्वीर - EPA

09/08/2017 16:15

फिलिपींस, बुधवार, 9 अगस्त 2017 (मैटर्स इंडिया): फिलिपींस में जेस्विट सोसाईटी के प्रमुख फादर अंतोनियो मोरेनो ने कहा कि जेस्विट ब्रादर रिचार्ड फेरनान्दो की संत घोषणा हेतु प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कलीसिया ने अनुमोदन दे दी है।

उन्होंने 30 जुलाई को पत्रकारों से कहा, ″वे अब संत घोषित किये जाने के मार्ग पर हैं, यह संत पापा फ्राँसिस द्वारा जारी उस मानक का प्रतिफल है जिसने उन लोगों के लिए संत घोषणा का द्वार खोल दिया है जिन्होंने स्वेच्छा से अपना जीवन दूसरों के लिए अर्पित किया तथा उसके लिए वे मरते दम तक धीर बने रहे।″ 

जेस्विट फादर मोरेनो ने बतलाया कि ब्रदर फेरनान्दो की संत घोषणा हेतु प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आरम्भिक कार्रवाई की अनुमति उन्हें मिल चुकी है।

जेस्विट ब्रादर रिचार्ड फेरनांदो जेस्विट मिशन में अपनी सेवा देने हेतु सन् 1995 ई में कम्बोडिया पहुँचे थे जहाँ उन्होंने पोलियो, खान अथवा अन्य दुर्घटनाओं द्वारा विकलांग लोगों की सेवा की।

एशिया के जेसुइट सम्मेलन के अनुसार, रिची ने तुरंत अपने युवा छात्रों का भरोसा जीत लिया था क्योंकि उन्होंने उनकी मूल भाषा सीख ली थी और उनकी दुःखद कहानियों को सुनने के लिए समय निकाल लिया करते थे।

ब्रादर रिचार्ड उस समय शहीद हो गये थे जब उन्होंने स्कूल के छात्रों की रक्षा करते हुए अपने को मृत्यु के हवाले कर दिया था।

ब्रादर रिचार्ड का सारोम नामक एक अनाथ विद्यार्थी था जो 16 साल की उम्र में एक सैनिक बन गया था तथा एक बारूदी विस्फोट द्वारा अपंग कर दिया गया था। मिशन के प्रति उसके मनोभाव को कई लोगों ने सही नहीं पाया था किन्तु रिचार्ड के दिल में अब भी उसके लिए जगह थी।

17 अक्तूबर 1996 की घटना है सारोम मिशन स्कूल के निदेशक एवं स्टाफ से मिलने पहुँचा। यद्यपि उसने कक्षाएँ समाप्त कर ली थीं तथापि उसने स्कूल जारी रखने की मांग रखी, जिसकी आग्रह को स्कूल के अधिकारियों ने उसे विध्वंसक मानते हुए अस्वीकार कर दिया।

नाराज, सरोम अचानक अपने बैग से एक ग्रेनेड निकाला और छात्रों से भरा एक कक्षा की ओर बढ़ा। खिड़कियों में छड़ लगे होने के कारण छात्र बाहर नहीं जा सकते थे।

ब्रादर रिचार्ड सारोम के पीछे गया तथा ग्रेनेड फेंकने से रोकने के लिए उसे पकड़ लिया।

सारोम ने कहा, ″मुझे जाने दीजिए, गुरूजी, मैं आपको मारना नहीं चाहता।″ लेकिन उसने ग्रेनेड गिरा दिया और यह उसके और ब्रा. रिची के पीछे गिर पड़ा। इस प्रकार सारोम एवं स्कूल के अन्य छात्रों को बचाने के क्रम में ब्रादर खुद विस्फोट एवं मृत्यु के शिकार हो गये।

ब्रादर रिचार्ड एक अत्यन्त समर्पित व्यक्ति थे। उन्होंने अपनी मृत्यु के चार दिनों पूर्व अपने एक मित्र तोतेत बानायनाल येसु समाजी को, एक लम्बी चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होंने लिखा था, ″मैं जानता हूँ कि मेरा हृदय कहाँ है यह येसु ख्रीस्त के साथ है जिसने ग़रीबों, बीमारों एवं अनाथों के लिए अपना सब कुछ दे दिया। मैं यह दृढ़ विश्वास करता हूँ कि ईश्वर अपने लोगों (हमारे विकलांग भाई बहनों) को कभी नहीं भूलते तथा मुझे खुशी है कि इस सच्चाई को प्रकट करने के लिए उन्होंने मुझे चुना है। मुझे विश्वास है कि यही मेरी बुलाहट है।″

फिलिपींस यदयपि एक ख्रीस्तीय बहुल देश है वहाँ मात्र दो ही संतों को घोषित किया गया है जिनकी मृत्यु 17वीं सदी में हुई थी; संत लोरेंत्सो एवं संत पेद्रो कालुगसोड।

31 जुलाई को संस्थापक संत इग्नासियुस के पर्व दिवस पर फा. मोरेनो ने कहा कि रिचार्ड उन येसु समाजियों में से हैं जिन्होंने संत इग्नासियुस का अनुसरण करते हुए अपने आपका का परित्याग करते हुए ईश्वर तथा उनकी प्रजा की सेवा में समर्पित कर दिया है।

उन्होंने बतलाया कि न केवल फिलिपींस एवं कम्बोडिया में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है किन्तु अन्य स्थलों में भी लोग उनपर श्रद्धा रखने लगे हैं। 


(Usha Tirkey)

09/08/2017 16:15