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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

येसु हमारे जीवन की खोज

देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा - ANSA

31/07/2017 15:53

वाटिकन सिटी, सोमवार 31 जुलाई 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजा घर के प्रांगण में जमा हुए हजारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को रविवारीय देवदूत प्रार्थना के पूर्व  संबोधित करते हुए कहा,

संत मत्ती रचित सुसमाचार के 13वें अध्याय में येसु के सात दृष्टान्तों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा आज के तीन दृष्टान्तों, छिपा हुए खजाना, कीमती मोती और मच्छली पकड़े के जाल द्वारा समाप्त होती है। आज के प्रथम दो दृष्टान्त में हम एक कीमती वस्तु के मिलने पर उसे प्राप्त करे हेतु बाकी सारी चीजों को बिक्री करने की बात सुनते हैं। आज के प्रथम दृष्टान्त में हमारे लिए एक किसान की चर्चा की जाती है जो अपने खेत में काम करने के दौरान खजाना को पाता है। अपना खुद का खेत नहीं होने के कारण वह उस खेत को खरीदने की चाह रखता है जिसे वह उस खजाने को प्राप्त कर सकें। अतः वह जोखिम उठाते हुए अपने जीवन की बाकी अन्य सारी चीजों को बिक्री करने की सोचता है। वह किसी भी कीमत पर उस अनमोल निधि को अपने हाथ से निकलने नहीं देना चाहता है। दूसरा दृष्टान्त हमें मोतियों के एक व्यापारी के बारे में बतलाता है जिसे मोतियों की अच्छी पहचान है वह एक बहुमूल्य मोती की कीमती से वाकिफ है। वह भी उस मोती को पाने हेतु अपने जीवन की सारी चीजों को दाव पर लगा देता है।

संत पापा ने कहा कि ये दोनों एक ही तरह के दृष्टान्त स्वर्ग राज्य की दो विशेष बातों, खोजना और त्यागना को हमारे सामने रखते हैं। यह सत्य है संत पापा ने कहा कि स्वर्ग राज्य हम सभों के लिए एक उपहार के रुप में, एक कृपा के रुप में मिला है लेकिन यह हमारे लिए चांदी की थाली में नहीं परोसा गया है। यह हम से कार्य की मांग करता है। हमें इसे खोजने की जरूर है हमें इसके लिए चलना है, कार्य करने की आवश्यकता है। हमें अपने जीवन में पाने हेतु खोजने की जरूरत है। हमारे लिए यह आवश्यक है कि हमारे दिल में कीमती वस्तु की प्राप्ति हेतु एक चाह उदीप्ति होता रहे जो कि हमारे लिए ईश्वर का राज्य है जो येसु ख्रीस्त में हम सभों के लिए दिया गया है। यह हमारे लिए छुपा हुआ धन के समान है, यह हमारे लिए एक कीमती मोती सदृश है। येसु हमारे जीवन की वह मूलभूत खोज हैं जो हमारे जीवन की सारी चीजों को परिवर्तित कर देते हैं। उन्हें पाने से हमारे जीवन का अर्थ ही बदल जाता है।

किसान और व्यापारी अपनी इस आश्चर्यजनक खोज के कारण अपने में इस बात का अनुभव करते हैं कि उन्हें इस अवसर को अपने हाथों से नहीं जाने देना चाहिए और वे अपनी सारी चीजों को बेचते हैं जिससे वे उस अनमोल धन को प्राप्त कर सकें। उन बहुमूल्य वस्तुओं की प्राप्ति हेतु वे अपनी जीवन की बाकी अन्यों चीजों को त्यागने का निर्णय लेते हैं। वे अपने जीवन की बाकी अन्य सारी वस्तुओं का परित्याग कर देते, अपने को जीवन की अन्य चीजों से विरक्त कर लेते हैं।  संत पापा ने कहा कि जब हम अपने जीवन में खजाने और मोती को पाते हैं जो कि हमारे लिए येसु ख्रीस्त हैं तो हम उन्हें व्यर्थ जाने न दें वरन उनके लिए अपने जीवन की अन्य चीजों का त्याग करें। संत पापा ने कहा कि इसका अर्थ यह नहीं कि हम बाकी सारी चीजों से घृणा करें बल्कि हम येसु को उन चीजों की तुलना में अधिक महत्व दें। हम येसु को अपने जीवन के प्रथम स्थान पर रखें। उनकी कृपा हमारे लिए सर्वप्रथम। येसु का शिष्य वह नहीं जो अपने को जरूरत की चीजों से विरक्त करता है वरन यह वह है जो अपने में यह अनुभव करता है कि उसने अपने लिए एक अमूल्य निधि को प्राप्त कर लिया है। वह अपने में उस खुशी को प्राप्त कर लिया है जिससे केवल येसु ख्रीस्त ही दे सकते हैं। यह चंगाई प्राप्त किये हुए व्यक्ति की खुशी का सुसमाचार है एक पापी का जिसे उसके पापों से मुक्ति मिलती है, उस डाकू का जिसके लिए स्वर्ग का द्वार खोला जाता है।

सुसमाचार की खुशी हमारे हृदय को और हमारे पूरे जीवन को भर देती है विशेष कर उस व्यक्ति को जिसका मिलन येसु से हुआ है। वे अपने जीवन में येसु की अनंत खुशी का एहसास करते हैं जो येसु द्वारा बचाये गये हैं जिन्हें अपने पापों से, दुःख, आंतरिक खालीपन और अपने जीवन के अकेलापन से मुक्ति मिली है। येसु ख्रीस्त में हमारी खुशी की उत्पत्ति और पुन-उत्पत्ति होती है। आज हमें किसान और मोती के व्यापारी की खुशी पर चिंतन करने हेतु निमंत्रण दिया जा रहा है। हम सभों को खुशी का एहसास तब होता है जब हम अपने को येसु की उपस्थिति, उनकी निकटता में पाते हैं। उनकी उपस्थिति हमारे जीवन को परिवर्तित करती और हमें कमजोर और आवश्यकता में पड़े अपने भाई-बहनों को स्वीकारते हुए उनके लिए अपने हृदयों को खोलते हेतु प्रेरित करती है।  

हम माता मरियम से अपने लिए और दूसरों के लिए प्रार्थना करें कि वे हमें ईश्वरीय राज्य, खुशी रूपी धन को खोजने में मदद करें जिसे पिता ने हमें प्रेम के रुप में येसु ख्रीस्त में प्रदान किया है। इतना कहने के बाद संत पापा ने विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के संग देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरान्त संत पापा फ्रांसिस ने कहा आज विश्व में मानव व्यापार विरोध दिवस मनाया जा रहा है जो संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित किया गया है। हर साल हज़ारों की संख्या में स्त्री-पुरुष और निर्दोष बच्चों को दुराचार और मानव अंग व्यापार का शिकार होना पड़ता है और यह देखने में हमें ऐसा लगाता है मानो एक साधारण-सी बात हो। यह एक घृणित अपराध है। हम इसे देख कर अपने में अभ्यस्त-सा हो गये हैं। मैं आप सबों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करना चाहूँगा कि हमें इस आधुनिक गुलामी का विरोध करने की जरूरत है। इस तरह संत पापा ने देह व्यापार के शिकार सभी व्यक्तियों के लिए और इस कार्य में संलिप्त लोगों के हृदय परिवर्तन हेतु माता मरियम से बिचवाई करते हुए विश्वसियों और तीर्थयात्रियों के साथ मिलकर दूत संवाद का पाठ किया।

देवदूत प्रार्थना के उपरान्त संत पापा फ्राँसिस ने विशेष रूप से संत जोसेफ मौरियालदिन की धर्मबहनों, मरियम ख्रीस्तियों की सहायता की नव शिष्य धर्मबहनों, इटली के विभिन्न पल्लियों से आये पुरोहितों और बोनेस आयर्स के फेमेनीनो हॉकी क्लब के सदस्यों का अभिवादन किया। अंत में उन्होंने अपने लिए प्रार्थना का नम्र निवेदन करते हुए सभों को रविवारीय मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Dilip Sanjay Ekka)

31/07/2017 15:53