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चीले की उम्मीद है कि संत पापा फ्राँसिस की यात्रा 'कोमलता की क्रांति' लाएगी

संत्यागो शहर में जुलूस में खड़े लोग - EPA

17/07/2017 15:33

रोम, सोमवार 17 जुलाई 2017 (सीएनए) : वाटिकन राज्य के संचार विभाग के प्रमुख ने संत पापा फ्राँसिस की आगामी चीले यात्रा के बारे कहा कि देश सामाजिक अशांति की अवधि में है, लेकिन देश को उम्मीद है कि संत पापा की यात्रा से उन्हें प्यार और कोमलता की बुनियाद पर पुनर्निर्माण करने में मदद मिलेगी।

चीले के संत्यागो महाधर्मप्रांत के पुरोहित फिलिप हेर्रेरा ने सीएनए से कहा, ″हमें उम्मीद है कि संत पापा फ्राँसिस का संदेश देश में 'कोमलता की क्रांति' लाएगी। हमारे पास कोई सामाजिक सामंजस्य नहीं है ...लोग सरकार के  खिलाफ गुस्से में हैं। साथ ही वे कलीसिया, कांग्रेस, बड़े उद्यमों, छोटे उद्यमों, यहां तक कि उनके पड़ोसियों के भी खिलाफ हैं। ऐसे महौल में न केवल ख्रीस्तीय परंतु सभी चीले वासी संत पापा के आने के इन्तजार में हैं।”

संत पापा की यात्रा का क्या संदेश होगा, यह तो सिर्फ संत पापा ही जानेंगे पर चीले के लोगों की इच्छा है कि संत पापा उनके लिए मसीह का संदेश लाएंगे, विशेष रुप से सभी ख्रीस्तीयों को समाजिक कार्यकलापों में शामिल होने का आह्वान करेंगे।

उन्होंने कहा,″कभी कभी हम कलीसिया के अंदर ही रहते हैं पर हमें कलीसिया से बाहर सभी लोगों को ईश्वर के प्रेम का साक्ष्य देने की आवश्यकता है और ऐसी परिस्थिति में मैं सोचता हूँ कि हमें अपने देश में भाईचारे के पुनर्निर्माण और एक दूसरे पर भरोसा करने की आवश्यकता है।"

संत पापा की यात्रा का विस्तार से कार्यक्रम प्रकाशित नहीं हुआ है पर वाटिकन ने जून महीने में घोषणा की कि संत पापा फ्राँसिस 15 से 18 जनवरी 2018 को संत्यागो, टेमुको, इक्विक्वे का दौरा करेंगे। वहां से संत पापा 18 से 21 जनवरी पेरू का दौरा करेंगे।

संत पापा का पहला पड़ाव चीले की राजधानी संत्यागो होगा वहां से वे दक्षिण में स्थित टेमुको की यात्रा करेंगे। यह वही क्षेत्र है जहाँ जनवरी 2017 में जंगलों में सप्ताहों तक विनाशकारी आग लगी थी। चीले के इतिहास में यह सबसे भयानक धटना थी जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी। अनगिनत घर, पशु और चरागाह और जंगल नष्ट हो गए थे। आग लगने की घटना के सिर्फ एक साल बाद संत पापा उस क्षेत्र का दौरा करेंगे।

फादर हेर्रेरा ने कहा कि टेमुको बहुत ही सुंदर क्षेत्र है जहाँ मापुचे आदिवासी रहते हैं जो सरकार के साथ दशकों से अपने क्षेत्र के स्वामित्व के अधिकार के लिए कड़े संघर्ष कर रहे हैं।

1990 के दशक में विवादों की शुरुआत के बाद से देश में आग, गोलीबारी और अपहरण के लिए मापुचे जिम्मेदार रहे हैं, क्योंकि पूर्व तानाशाह अगस्टो पिनोशेत ने उनके अधिकार की भूमि वापस करने के लिए वार्ताएं रोक दी थी।

2016 में, अराक्रानिया और बायोबिओ क्षेत्रों में 61 भवनों में आग लगने और 227 हिंसा की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 16 गिरजाघर या अन्य धार्मिक संस्थायें थीं।

फादर हेर्रेरा ने कहा कि वहाँ संधर्ष जारी हैं क्योंकि लोगों को अपनी जमीन वापस नहीं मिली है। संत पापा उस क्षेत्र में युद्धविराम का संदेश लेकर आएंगे।


(Margaret Sumita Minj)

17/07/2017 15:33