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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

येसु के पवित्र बदन एवं रक्त का महापर्व, संत पापा का संदेश

- REUTERS

19/06/2017 13:40

वाटिकन सिटी, सोमवार, 19 जून 2017 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 18 जून को, येसु के पवित्र बदन एवं रक्त महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, ″अति प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

इटली तथा कई अन्य देशों में इस रविवार को ख्रीस्त के पवित्र शरीर और रक्त का त्योहार मनाया जाता है जिसको लैटिन में ″कोरपुस दोमिनी″ या ″कोरपुस ख्रीस्ती″ के नाम से जाना जाता है। हर रविवार को कलीसिया यूखरिस्त के चारों ओर एकत्रित होती है जिसकी स्थापना येसु ने अंतिम व्यारी के समय की थी। हमें हर साल विश्वास के इस रहस्य की यादगारी मनाने का आनन्द प्राप्त होता है ताकि हम ख्रीस्त की आराधना हमारी मुक्ति हेतु भोजन और पेय के रूप में कर सकते हैं।

आज का सुसमाचार पाठ संत योहन रचित सुसमाचार से लिया गया है जो जीवन की रोटी के बारे बतलाता है। (यो. 6: 51-58) येसु कहते हैं, ″स्वर्ग से उतरी हुई वह जीवन्त रोटी मैं हूँ...जो रोटी मैं दूँगा वह संसार के जीवन के लिए अर्पित मेरा मांस है।"(पद. 51)

येसु के इस कथन का आशय है कि पिता ने उन्हें संसार में अनन्त जीवन के भोजन के रूप में भेजा है। यही कारण है कि येसु हमारे लिए अपने आपको बलिदान के रूप में अर्पित करते हैं। येसु ने सचमुच में क्रूस पर अपना शरीर अर्पित किया एवं अपना खून बहाया। मानव पुत्र पास्का के सच्चे मेमने हैं। उन्होंने हमें पाप के बंधन से निकालकर प्रतिज्ञात देश की यात्रा में संबल बनाया है।

संत पापा ने कहा, ″यूखरिस्त संसार के जीवन के लिए अर्पित उनके मांस का संस्कार है जो इस भोजन से पोषित होती है। इसके द्वारा हम येसु से संयुक्त होते एवं उनके लिए जीते हैं। येसु को ग्रहण करने का अर्थ है उनके साथ रहना तथा पुत्र में ईश्वर की संतान बनना।″  

यूखरिस्त में, येसु जैसा कि उन्होंने एमाऊस के रास्ते पर चेलों के साथ किया, हमारी यात्रा में हमारा साथ देते हैं, हमारे विश्वास, आशा एवं प्रेम को सुदृढ़ करते हैं। परीक्षा की घड़ी हमें सांत्वना प्रदान करते हैं, शांति एवं न्याय के प्रति समर्पण में हमें समर्थन देते हैं। ईश पुत्र की यह एकात्मता हर जगह है, चाहे शहर हो अथवा गाँव, उत्तर हो या दक्षिण, उन सभी देशों में जहाँ ख्रीस्तीय परम्परा है तथा जहाँ सुसमाचार का प्रचार पहले हो चुका है। यूखरिस्त संस्कार में वे हमें अपने आपको एक आध्यात्मिक ताकत के रूप में अर्पित करते हैं ताकि हम उनकी आज्ञाओं का पालन कर सकें। हम प्रेम कर सकें जैसा कि उन्होंने हमें प्रेम किया। हम एक खुले एवं उदार समुदाय का निर्माण कर सकें जो सभी के लिए आवश्यक है खासकर, सबसे कमजोर, गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को शामिल करने के लिए।

यूखरिस्त का अर्थ है साहस से भर जाना तथा येसु द्वारा संचालित होना। यह खुद के बदले येसु को स्थान देना है। इस तरह यूखरिस्तीय समुदाय में पवित्र आत्मा द्वारा येसु ख्रीस्त के मुक्त प्रेम को प्राप्त करते हैं। जो ईश्वर के प्रति हमारे प्रेम को पोषित करता है तथा हम उसे अपने दैनिक जीवन में मुलाकात करने वाले भाई बहनों के बीच बांट सकें। ख्रीस्त के शरीर को ग्रहण करने के द्वारा हम उनके साथ संयुक्ति में बढ़ते हैं ठोस रूप से हम ख्रीस्त के रहस्यात्मक शरीर के अंग बनते हैं। संत पौलुस हमें स्मरण दिलाते हैं। ″क्या आशीष का प्याला जिस पर हम आशीष की प्रार्थना पढ़ते हैं, हमें मसीह के रक्त का सहभागी नहीं बनाता? क्या वह रोटी जिसे हम तोड़ते हैं हमें मसीह के शरीर का सहभागी नहीं बनाती? रोटी तो एक ही है इसलिए अनेक होने पर भी हम एक हैं क्योंकि हम सब एक ही रोटी के सहभागी हैं। "(1 कोरि. 10:16-17)

संत पापा ने माता मरियम की याद कर कहा कि धन्य कुँवारी मरियम जो जीवन की रोटी येसु से संयुक्त हैं हमें यूखरिस्त की सुन्दरता को प्राप्त करने में मदद करे, विश्वास में सुदृढ़ करे तथा ईश्वर एवं भाई बहनों की एकता में जीने हेतु मदद करे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 


(Usha Tirkey)

19/06/2017 13:40