Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

कलीसिया \ विश्व की कलीसिया

संत पापा ने दी रोम में अंगलिकन प्रतिनिधि को विदाई

कैंटरबरी के महाधर्माध्यक्ष के प्रतिनिधि एवं रोम में अंगलिकन केंद्र के निदेशक महाधर्माध्यक्ष डेविड मोक्सन से मुलाकात करते संत पापा - AFP

17/06/2017 15:57

वाटिकन सिटी, शनिवार, 17 जून 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 16 जून को कैंटरबरी के महाधर्माध्यक्ष के प्रतिनिधि एवं रोम में अंगलिकन केंद्र के निदेशक महाधर्माध्यक्ष डेविड मोक्सन की विदाई पर उनसे मुलाकात की जो इसी सप्ताह न्यूजीलैंड लौटेंगे।

मोक्सन, जो एंग्लिकन-रोमन कैथोलिक इंटरनेशनल कमिशन के सह-अध्यक्ष भी हैं वे रोम में ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता में चार साल सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने इस कार्यभार को 2013 में स्वीकार किया था। 

काथलिक एवं लुथेरन कलीसियाओं के बीच इस अवधि में ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता के विकास पर नजर डालते हुए महाधर्माध्यक्ष मोक्सन ने वाटिकन रेडियो की पत्रकार फिलिप्पा हेचेन से कहा कि उनके लिए दो बड़ी घटनाओं, खासकर, संत पापा फ्राँसिस के परमाध्यक्षीय पद ग्रहण समारोह एवं कैंटरबरी के महाधर्माध्यक्ष जस्टिन वेलबे के पदास्थापन समारोह के प्रत्यक्षदर्शी बनना महान सौभाग्य की बात है।

उन्होंने विगत चार सालों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए आध्यात्मिकता के क्षेत्र में कहा कि रोम एवं विश्व में काथलिकों एवं अंगलिकनों के बीच संबंध मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब हम रुकावटों की याद करेंगे तो यह हमारे बीच विभाजन लायेगी। हमने व्यवहारिक क्षेत्र में एक दूसरे के आलिंगन, सहयोग और साझेदारी का अनुभव किया है। धर्मविधि एवं ईश शास्त्र के क्षेत्र में भी बहुत अधिक प्रोत्साहन मिला है।

संत पेत्रुस महागिरजाघर में एक साथ संध्या वंदना की प्रार्थना ने महाधर्माध्यक्ष को सबसे अधिक प्रभावित किया, साथ ही 2016 में संत ग्रेगोरियो एल चेलो में संध्या प्रार्थना भी स्मरणीय थी जहाँ संत पापा फ्राँसिस एवं अंगलिकन धर्मगुरू ने काथलिक एवं अंगलिकन धर्माध्यक्षों को जोड़ों में मिशन हेतु भेजने के पूर्व एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर भी किया था।

ईशशास्त्रीय चुनौतियों पर गौर करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि इसमें लगातार प्रगति हुई है जो नाटकीय नहीं है, यह  रातोंरात की घटना भी नहीं है और न ही क्रांतिकारी है बल्कि आपसी समझ और सम्मान में विकास के कारण हुई है।

यह पूछे जाने पर कि रोम से उन्होंने क्या पाया तो उन्होंने कहा कि संत इग्नासियुस, संत क्लारा एवं संत फ्राँसिस की आध्यात्मिकता को जिसको उन्होंने संत पापा फ्राँसिस में देखा। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन को समझने के लिए संत इग्नासियुस की आध्यात्मिक आयाम को समझने की आवश्यकता है साथ ही संत फ्राँसिस के मिशन को भी। 


(Usha Tirkey)

17/06/2017 15:57