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प्रेरक मोतीः सन्त जॉन फ्राँसिस रेजिस (1597 ई.- 1640 ई.) (16 जून)

सन्त जॉन फ्राँसिस रेजिस - RV

16/06/2017 11:42

वाटिकन सिटी, 16 जून सन् 2017:

जॉन फ्राँसिस रेजिस का जन्म फ्राँस के फोन्टकोवेर में, 31 जनवरी, सन् 1597 ई. को हुआ था। फ्राँस के संघटित युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण उनके पिता जाँ रेजिस को तत्कालीन फ्राँस का राजकीय सम्मान दिया गया था। उनकी माता मार्ग्रेट कुलीन घराने की थी। जॉन रेजिस की शिक्षा-दीक्षा बेज़ियर्स के येसु धर्मसमाजी महाविद्यालय में हुई। 19 वर्ष की आयु में, 08 दिसम्बर, सन् 1616 ई. में उन्होंने, टोलूज़ स्थित येसु धर्मसमाज में प्रवेश किया तथा दो वर्षों बाद समर्पित जीवन की शपथें ग्रहण की।

साहित्यशास्त्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा जॉन रेजिस को येसु धर्मसमाज द्वारा संचालित कई स्कूलों में आध्यापक के पद पर नियुक्त कर दिया गया था। इन स्कूलों में, विशेष रूप से, निर्धन बच्चों एवं युवाओं को शिक्षा प्रदान की जाती थी। आध्यापक रहते समय जॉन रेजिस ने दर्शनशास्त्र और उसके बाद ईश शास्त्र की पढ़ाई जारी रखी तथा 1630 ई. में पुरोहित अभिषिक्त कर दिये गये।

नवाभिषिक्त जॉन रेजिस को सर्वप्रथम टोलूज़ में बुबोनिक प्लेग पीड़ितों की सेवा के लिये प्रेषित किया गया। दो वर्षों तक रोगियों की सेवा के उपरान्त फादर जॉन रेजिस ने ज़रूरतमन्दों पर अपना ध्यान केन्द्रित किया, संकटापन्न युवतियों एवं महिलाओं के लिये उन्होंने आश्रम खोले, अस्पताल में रोगियों की भेंट करना आरम्भ किया तथा बच्चों को धर्मशिक्षा प्रदान करने का कार्य करते रहे। इन सेवाओं के अतिरिक्त, फादर रेजिस ने पवित्र यूखारिस्तीय संस्कार को समर्पित उदारता संगठन की स्थापना की जिसका कार्य निर्धनों की मदद के लिये धनवान लोगों से चंदा एकत्र करना था।

सन् 1633 ई. में विवियर्स के धर्माध्यक्ष के आमंत्रण पर फादर रेजिस ने धर्मप्रान्त के विभिन्न भागों में प्रेरितिक यात्राएँ आरम्भ कीं तथा धर्मोंत्साह के साथ सुसमाचार का प्रचार किया। इन यात्राओं के दौरान फादर रेजिस को भूख, प्यास तथा विपरीत जलवायु एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था जिसके कारण वे प्रायः बीमार रहने लगे थे। सन् 1640 ई. की शीत ऋतु में, फ्राँस के आरदेख प्रान्त की यात्रा के दौरान, 43 वर्ष की आयु में, निमोनिया के कारण, 30 दिसम्बर, 1640 ई. को फादर जॉन रेजिस का निधन हो गया।

फादर जॉन रेजिस की मध्यस्थता से सम्पादित चमत्कारों को मान्यता देकर, सन् 1719 ई. में, सन्त पापा क्लेमेन्त 11 वें ने उन्हें धन्य तथा 1737 ई. में सन्त पापा क्लेमेन्त 12 वें ने, सन्त घोषित कर काथलिक कलीसिया में, वेदी का सम्मान प्रदान किया था। सन्त जॉन रेजिस का पर्व 16 जून को मनाया जाता है। 

चिन्तनः प्रार्थना और मनन चिन्तन से, हम भी भाई एवं पड़ोसी की सेवा हेतु आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करें तथा ख्रीस्त के सुसमाचार के साक्षी बनें। 


(Juliet Genevive Christopher)

16/06/2017 11:42