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ईशशास्त्र विज्ञान लौटा रूसी विश्वविद्यालयों में

सन्त पापा फ्राँसिस के साथ प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल, तस्वीर, 12.02.2016 - AFP

16/06/2017 11:46

मॉस्को, शुक्रवार, 16 जून 2017 (एशियान्यूज़): अब से, ईशशास्त्र विज्ञान रूस के उन सब अकादमिक संस्थानों का एक विशिष्ट शैक्षिक विषय हुआ करेगा जो विशेषज्ञ तथा डॉक्टरेट की डिग्रियाँ जारी करने योग्य हैं।

14 जून को रूसी न्याय मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर ईशशास्त्र विज्ञान में शैक्षणिक डिग्री को अनुमोदन प्रदान कर दिया। इस बात की सूचना रूसी शिक्षा मंत्री ऑल्गा वासीलेवा ने, "मानवतावादी शिक्षा में ईशशास्त्र" शीर्षक से आयोजित प्रथम अखिल रूसी वैज्ञानिक सम्मेलन में दी।

न्याय मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि ईशशास्त्र न सिर्फ इतिहास या दर्शन की एक शाखा है, बल्कि एक विशेष अनुशासन है जिसमें उम्मीदवार छात्र विशेषज्ञता और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल कर सकते हैं। शिक्षा मंत्री वासीलेवा ने इसे "वास्तविक ऐतिहासिक दिवस" निरूपित कर कहा कि  समाज के विकास के लिये ईशशास्त्र में विशेषज्ञों को तैयार करना आवश्यक है।

इस समय रूस में कम से 4,500 छात्र ईशशास्त्र का अध्ययन कर रहे हैं।

ईशशास्त्र को विश्वविद्यालयीन शिक्षा में डिग्री एवं डॉक्टरेड की उपाधि दिलवाने में रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया के शीर्ष प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल की विशिष्ट भूमिका रही है। उन्हीं की बदौलत ईशशास्त्र को एक वैज्ञानिक विषय तौर पर मान्यता मिल पाई है। इस सन्दर्भ में यह रूसी ऑरथोडोक्स कलीसिया की एक महान विजय है।

प्राचीन काल में रूस के उच्च शिक्षण संस्थानों से ईशशास्त्र को इस आशंका से हटा दिया गया था कि बुद्धिवाद एवं तर्कणावाद के साथ उसका मेल न हो जाये तथा कलीसिया प्रशिक्षण द्वारा देश को अपनी ओर अभिमुख न कर ले। 17 वीं शताब्दी में येसु धर्मसमाज द्वारा संचालित ईशशास्त्रीय संस्थानों की स्थापना की गई थी। उस समय रूस में लैटिन भाषा एक अकादमिक भाषा हुआ करती थी किन्तु 19वीं शताब्दी के बाद से ईशशास्त्रीय शिक्षण संस्थानों को राजकीय संस्थानों से बिलकुल अलग कर दिया गया था।


(Juliet Genevive Christopher)

16/06/2017 11:46