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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

पवित्रतम त्रिएक ईश्वर का महापर्व, संत पापा का संदेश

संत पापा देवदूत प्रार्थना के उपरांत आशीष देते हुए - AP

12/06/2017 15:49

वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 जून 2017 (वीआर सेदोक): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 11 जून को, पवित्रतम त्रिएक ईश्वर के महापर्व के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, ″अति प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

पवित्रतम तृत्वमय ईश्वर के महापर्व के इस रविवार का बाईबिल पाठ ईश्वर की पहचान के रहस्य में प्रवेश करने हेतु मदद करता है। इसका दूसरा पाठ संत पौलुस द्वारा कोरिंथ की कलीसिया को दिया गया संदेश है।″ ″प्रभु ईसा मसीह का अनुग्रह, ईश्वर का प्रेम तथा पवित्र आत्मा की साहचर्य आप सब को प्राप्त हो।″ (2 कोरि. 13,13).

संत पापा ने कहा कि इसे हम प्रेरितोँ का आशीर्वाद कहते हैं जो ईश्वर के प्रेम का व्यक्तिगत अनुभव है। वही प्रेम जिसको पुनर्जीवित ख्रीस्त ने प्रकट किया, जिसने उनका जीवन बदल दिया तथा लोगों के बीच सुसमाचार का संदेश देने भेजा। कृपा के इस अनुभव से संत पौलुस ख्रीस्तीयों को इन शब्दों से आमंत्रित करते हैं, ″आप पूर्ण बनें, एकमत रहें, शांति बनाये रखें तथा शांति का ईश्वर आपके साथ होगा।″ (पद. 11).

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय समुदाय अपनी सभी मानवीय सीमाओं के बावजूद, अपनी अच्छाई एवं सुन्दरता से त्रिएक ईश्वर की एकता को प्रतिबिम्बित कर सकता है। इसके लिए स्वयं संत पौलुस ने साक्ष्य दिया है जब वे ईश्वर की दया एवं क्षमा के अनुभव से होकर गुजरे। 

पुराने व्यवस्थान में निर्गमन के समय रास्ते पर यहूदियों के साथ यही हुआ। जब लोगों ने व्यवस्थान को तोड़ दिया, तब प्रभु बादल के रूप में उतरकर मूसा के पास आये और अपना नाम ‘प्रभु’ प्रकट किये। प्रभु ने उसके सामने से निकलकर कहा, ″प्रभु एक करुणामय एवं दयालु ईश्वर हैं।″ (निर्ग. 34.6)  यह कथन प्रकट करता है कि ईश्वर दूर नहीं हैं और न ही अपने आप में बंद बल्कि जीवन है जिसे बांटा जाना चाहिए तथा प्रेम के द्वारा ही मानव की अविश्वसनीयता को जीता जा सकता है। ईश्वर दयालु, कृपालु और अनुग्रह पूर्ण हैं क्योंकि वे हमारी कमज़ोरियों एवं सीमाओं को भर देते हैं। वे हमारी गलतियों को माफ करते हैं ताकि हमें धार्मिकता एवं सच्चाई के रास्ते पर आगे ले सकें। इस प्रकाशना की चरमसीमा हम नये व्यवस्थान में पाते हैं ख्रीस्त एवं उनकी मुक्ति के मिशन में। येसु ने उस ईश्वर के चेहरे को प्रस्तुत किया जो एक है और उसमें तीन जन हैं। ईश्वर सबकुछ से बढ़कर प्रेम हैं जो पिता, पुत्र एवं पवित्र आत्मा द्वारा उनकी सृष्टि, मुक्ति एवं बलिदान के कार्यों में परिलक्षित होता है।

संत पापा ने सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए कहा कि आज का सुसमाचार पाठ निकोदिमुस को प्रस्तुत करता है जो अपने समय के धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पद पर होते हुए ईश्वर की खोज में लगे रहे। उन्होंने यह नहीं सोचा कि वे बड़े पद पर हैं। उन्होंने येसु की आवाज में ईश्वर को पहचान लिया। अंततः रात को हुई वार्तालाप में निकोदिमुस समझ गया कि ईश्वर स्वयं उनकी खोज कर रहे हैं एवं उनके द्वारा प्रेम किये जाने की अपेक्षा करते हैं। संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमेशा हमारे पहले हमारा इंतजार करते हैं तथा उन्होंने हमें पहले प्रेम किया है। येसु निकोदेमुस से कहते हैं, ″ईश्वर ने संसार को इतना प्रेम किया कि उन्होंने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया, जिससे जो उस में विश्वास करता है उसका सर्वनाश न हो, बल्कि अनन्त जीवन प्राप्त करे।(योहन 3:16).

अनन्त जीवन क्या है? संत पापा ने कहा कि यह पिता ईश्वर का मुफ्त प्यार है जिसको येसु ने हमारी मुक्ति हेतु क्रूस पर अपना जीवन अर्पित कर प्रदान किया है। यह प्यार पवित्र आत्मा के कार्यों द्वारा पृथ्वी पर एवं उन्हें स्वीकार करने वाले हरेक व्यक्ति पर नये प्रकाश के रूप में प्रकट होता है। जहाँ अंधकार है तथा उदारता और दया के अच्छे फल उत्पन्न करने नहीं देने वाली कठोरता है वहाँ भी अपनी ज्योति प्रदान करता है।

संत पापा ने प्रार्थना की कि माता मरियम हमें पवित्रतम तृत्वमय ईश्वर की संगति में प्रवेश करने, उनके साथ जीने एवं उनके प्रेम का साक्ष्य देने में हमारी सहायता करे जो हमारे अस्तित्व को अर्थ प्रदान करता है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने कहा, ″कल ला स्पेत्सिया में इताला मेला की धन्य घोषणा हुई। जो युवावस्था में एक नास्तिक थी किन्तु बाद में मन-परिवर्तन के बाद ख्रीस्तीय धर्म अपनाया। उन्होंने काथलिक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया है।″  

उसके बाद संत पापा ने देश-विदेश से एकत्रित तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों को सम्बोधित कर कहा,  ″ प्यारे रोम के निवासियो एवं तीर्थयात्रियो, पल्ली, परिवारों और संगठनों के सदस्यो, मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ, खासकर, मैं मोंटपेलियर, कॉर्सिका, माल्टा तथा इटली के पादुवा, नोरबेल्लो एवं ससुओलो के विश्वासियों का अभिवादन करता हूँ।

संत पापा ने रोम में रह रहे बोलिवियाई समुदाय को विशेष रूप से याद किया जो कोपाकाबाना की धन्य कुँवारी मरियम त्योहार मना रहे हैं।

अंत में संत पापा ने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए उन्हें शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की। 


(Usha Tirkey)

12/06/2017 15:49