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भारत ने कपड़ा मजदूरों की मौत के लिए मुआवजे में दोगुना किया है

वस्त्र उद्योग में कार्यरत श्रमिक - AFP

07/06/2017 15:55

वाटिकन रेडियो, बुधवार,7 जून 2017 (रायटर) : श्रम प्रधान क्षेत्र के श्रमिकों की गंभीर समस्याओं को दूर करने के लिए एक लाभ योजना के तहत, भारत ने अपने बिजली द्वारा संचालित वस्त्र उद्योग में कार्यरत श्रमिकों की मौत के लिए मुआवजा दोगुना कर दिया है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा उत्पादकों में से एक है और विदेशी मुद्रा कमाने और रोजगार के मामले में पारंपरिक रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था का एक आधारशिला रहा है। कपड़ा उद्योग में बिजली चालित करघे कुल नौकरियों का लगभग 70 प्रतिशत अर्थात लगभग 6.5 लाख लोगों को रोजगार देता है।

एक व्यक्ति 12 धंटों से भी अधिक समय तक काम करता है अक्सर तंग स्थान के अंदर छह से नौ करघों में काम करता है। बिजली चालित करघों के तेज गति से चलने से उसे चोट भी लगती है और पूरा समय उसे मशीनों के शोर शराबों के बीच काम करना पड़ता है। वे जो कपड़े और वस्त्रों का उत्पादन करते हैं उसका लगभग 60 प्रतिशत भाग निर्यात करते हैं।

‘पावरटेक्स इंडिया’ नामक सरकारी कार्यकर्ता सुरक्षा योजना अप्रैल में शुरू हुई और इसमें श्रमिकों के लिए एक हेल्पलाइन भी शामिल है साथ ही नियोक्ताओं के लिए अपने मशीनों का उन्नयन हेतु आर्थिक सहायता की भी व्यवस्था है।

भारत के कपड़ा आयुक्त कविता गुप्ता ने रायटर को बताया, "हमें कपड़ा मूल्य श्रृंखला विकसित करना और अधिक प्रतिस्पर्धी बनने के लिए प्रौद्योगिकी का उन्नयन करना है सभी योजनाएं कड़ी मेहनत को देखते हुए, काम की स्थिति को बेहतर बनाने और आधारभूत संरचना का आधुनिकीकरण करने के लिए बनाई गई है।"

उन्होंने कहा कि एक कार्यकर्ता की सामान्य मृत्यु के मामले में बीमा 200,000 रुपए ($ 3,100) है और काम के समय दुर्धटना के कारण हुई मृत्यु में बीमा 400,000 रुपये तथा इसके अलावा 200,000 रुपए विकलांगता मुआवजे इस महीने से तय किया गया है।


(Margaret Sumita Minj)

07/06/2017 15:55