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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

संत पापा ने ‘पोन्टिफिकल मिशन सोसाईटी’के सदस्यों से मुलाकात की

‘पोन्टिफिकल मिशन सोसाईटी’के सदस्यों से मुलाकात करतेे संत पापा - EPA

03/06/2017 16:09

वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 जून 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 3 जून को ‘पोन्टिफिकल मिशन सोसाईटी’ की आमसभा में भाग ले रहे प्रतिभागियों से मुलाकात की।

संत पापा ने उन्हें सम्बोधित कर कहा, ″आप पोंटिफिकल मिशन सोसाईटी के बारे मेरी चिंता से परिचित हैं जिसे अकसर संत पापा के नाम पर जरूरतमंद कलीसियाओं की आर्थिक मदद हेतु इकट्ठा एवं वितरण करने वाले एक संगठन तक ही सीमित कर दिया जाता है। मैं जानता हूँ कि आप नये रास्तों की खोज कर रहे हैं जो अधिक उपयुक्त तथा विश्वव्यापी कलीसिया के मिशन में मददगार सिद्ध हो सकेगा।

सुधार के रास्ते पर संत पापा ने यूगांडा के संत कार्लो ल्वांगा की मध्यस्तता द्वारा प्रार्थना करने की सलाह दी।

संत पापा ने नवीनीकरण के आवश्यक तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा, ″नवीनीकरण, मन-परिवर्तन तथा मिशन को ख्रीस्त की घोषण के स्थायी अवसर के रूप में जीने की मांग करता है। उसे साक्ष्य देने योग्य बनाने एवं ख्रीस्त के साथ हमारे व्यक्तिगत मुलाकात में दूसरों को शामिल करने की मांग करता है।″

संत पापा ने आशा व्यक्त की कि कलीसिया को उनकी आध्यात्मिक एवं भौतिक सहायता उसे सुसमाचार पर आधारित होने में मदद देगी तथा कलीसिया में याजक एवं लोकधर्मी की इस एक ही प्रेरिताई में, सभी को ईश्वर के प्रेम के करीब लाने का अवसर प्रदान करेगा, विशेषकर, जिन्हें उनकी दया की अधिक आवश्यकता है।    

संत पापा ने कहा कि प्रथम सुसमाचार प्रचार के प्रति समर्पण, कलीसिया को मिशन में भाग लेने हेतु अधिक से अधिक प्रेरित करे। संत पापा मोनतिनि के शब्दों में, ″कलीसिया को सुसमाचार सुनाने की शुरूआत खुद सुसमाचार सुनने से होती है।″ विश्वासियों के समुदाय को आशा, भ्रातृप्रेम के साथ जीने, लगातार ध्यान देने तथा प्रेम के प्रति नवीकृत प्रतिबद्धता से सुसमाचार को सुनने की आवश्यकता है।

संत पापा ने कहा कि ईश प्रजा संसार में अकसर मूर्ति पूजा से प्रभावित होती है जिसके कारण उसे ईश्वर के पवित्र वचन को लगातार सुनने की आवश्यकता है जो हमें प्रभु की ओर लौटाता है। इसका अर्थ है कि हमें लगातार सुसमाचार सुनने की जरूरत है।

संत पापा ने कहा कि 2019 में जब वे शतवर्षीय जयन्ती मनाने की तैयारी कर रहे हैं तो यह समय उनके लिए प्रार्थना, साक्ष्य देने, मिशन की गूढ़ बातों पर गौर करने एवं पवित्र बाईबिल, ईशशास्त्र एवं मिशनरी उदारता पर चिंतन करने का अवसर है ताकि वे अपने आप को नवीकृत कर सकें एवं क्रूसित एवं पुनर्जीवित ख्रीस्त की घोषणा दुनिया में विश्वसनीयता और अधिक प्रभावशाली ढंग से कर सकें।


(Usha Tirkey)

03/06/2017 16:09