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रेडियो वाटिकन

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महत्त्वपूर्ण लेख \ संतों की जीवनी

प्रेरक मोतीः सन्त जोन ऑफ आर्क (1412-1431 ई.)

सन्त जोन ऑफ आर्क (1412-1431 ई.)

30/05/2017 08:21

वाटिकन सिटी, 30 मई सन् 2017:

सन्त जोन ऑफ आर्क का जन्म फ्राँस के लोरेन प्रान्त में 6 जनवरी, सन् 1412 ई. को हुआ था। बाल्यकाल से जोन को सन्तों की आवाज़े सुनाई दिया करती थीं जिनमें सन्त माईकिल, सन्त कैथरीन तथा सन्त मार्ग्रेट शामिल थे। पहले पहल, सन्तों के सन्देश व्यक्तिगत एवं सामान्य हुआ करते थे किन्तु बाद में ये गम्भीर हो उठे जिनपर देश के निष्कर्ष आधारित हुआ करते थे। सन् 1428 ई. के मई माह में जोन ने सन्त माईकिल, सन्त कैथरीन तथा सन्त मार्ग्रेट की आवाज़ें सुनीं जिन्होंने उनसे फ्राँस के तत्कालीन राजा चार्ल्स सप्तम की मदद के लिये कहा। उस समय इंग्लैण्ड का राजा फ्राँस की गद्दी छीनना चाहता था। फ्राँस के राजा का विरोधी बुरगुण्डी का ड्यूक भी इंग्लैण्ड के राजा जा मिला था। ऐसे समय में जोन ने राजा को सन्तों की आवाज़ों के बारे में बताया।

पहले तो राज दरबार तथा कलीसिया के वरिष्ठ नेताओं ने जोन की बात को मानने से इनकार कर दिया किन्तु बाद में 17 वर्षीय जोन को एक सेना लेकर ओरलिएन्स की लड़ाई के लिये भेज दिया गया। वे विजयी हुई तथा फ्राँस की रक्षा हो सकी इसीलिये कई लेखकों ने अपनी रचनाओं में उन्हें "मेड ऑफ ओरलिएन्स" शीर्षक से पुकारा है। ओरलिएन्स की लड़ाई में सफलता के बाद उन्हें कई सैन्य कार्रवाईयों के लिये भेजा गया जिनमें वे सफल भी हुई किन्तु 1430 ई. में, देशदोह्री बुरगुण्डियों ने घात लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया तथा अँग्रेज़ों को बेच दिया।

इंग्लैण्ड में जोन को कड़ी यातनाएं दी गई किन्तु वे इस बात पर अटल रहीं कि उन्हें अपने सभी कार्यों के लिये सन्तों से मार्गदर्शन मिला था। 19 वर्ष की आयु में जोन ऑफ आर्क पर अपधर्मी, जादूगरनी और कुलटा होने के आरोप लगाये गये तथा प्राणदण्ड दे दिया गया। लोगों की भरी सभा में उन्हें आग के हवाले कर मार डाला गया। जोन के मरने के तीस वर्ष बाद सन्त पापा कलीस्तुस तृतीय ने जोन ऑफ आर्क के मामले की पुनः जाँच पड़ताल का आदेश दिया तथा उन्हें निर्दोष करार दे, शहीद घोषित कर दिया। सन् 1909 ई. में जोन ऑफ आर्क को धन्य तथा सन् 1920 ई. में सन्त घोषित कर वेदी का सम्मान प्रदान किया गया था। सन्त जोन ऑफ आर्क सैनिकों और साथ ही फ्राँस की भी संरक्षिका हैं। उनका पर्व 30 मई को मनाया जाता है।  

चिन्तनः प्रभु ईश्वर में ध्यान लगाकर हम भी अपने अन्तरमन की आवाज़ सुनें तथा विश्व में  न्याय एवं शान्ति की स्थापना हेतु योगदान दें। 


(Juliet Genevive Christopher)

30/05/2017 08:21