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संत पापा फ्राँसिस \ मुलाक़ात

‘दिव्य मास्टर के पवित्र शिष्य’धर्मसमाज के प्रतिनिधियों को संत पापा का सम्बोधन

संत पापा फ्राँसिस - ANSA

22/05/2017 15:24

वाटिकन सिटी, सोमवार, 22 मई 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने 22 मई को ‘दिव्य मास्टर के पवित्र शिष्य’ धर्मसमाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात की जो धर्मसमाज की 9वीं आम सभा में भाग ले रहे हैं।

आम सभा रोम में 10 अप्रैल से 28 मई तक चल रहा है जिसकी विषय वस्तु है ″नई अंगुरी को नई मस्कों में।″ 10 मई को आम सभा ने नई मदर जेनेरल का चुनाव किया, जिनका नाम है सि. एम. मिकाएला मोनेत्ती जो 2017 से 2023 तक धर्मसमाज की सर्वोच्च अधिकारिणी का पद भार संभालेंगी।

संत पापा ने नई मदर जेनेरल के साथ सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए शुभकामनाएँ दी  कि आम सभा द्वारा संस्था के जीवन में सुसमाचार का प्रचुर फल उत्पन्न हो।

संत पापा ने कहा, ″सर्वप्रथम यह एकता का फल उत्पन्न करे। पवित्र आत्मा के प्रति उदारता जो विविधता में एकता के स्वामी हैं।″ उन्होंने कहा कि वे कमजोर धर्मबहनों के प्रति विशेष ध्यान दें एवं उनका सम्मान करें। एक-दूसरे के साथ मिलकर रहने की भावना का विकास करें, समुदाय में विभाजन, ईर्ष्या तथा बेकार की बातों से दूर रहने का प्रयास करें। विचारों को खुलेपन एवं विनम्रता के साथ प्रस्तुत करें।  

संत पापा ने सलाह दी कि सभा के दौरान वे समय के चिन्हों के माध्यम से प्रभु की पुकार सुनें। उन्होंने कहा, ″आम सभा प्रभु को सुनने का समय है जो समय के चिन्हों द्वारा बोलते हैं। हम उनकी आवाज को एक दूसरे में भी सुन सकते हैं अतः भाई बहनों के द्वारा प्रभु जो प्रकट करना चाहते हैं उन्हें सुनने का प्रयास करें।″ उन्होंने कहा कि इसके लिए मन और हृदय को खोलने की आवश्यकता है। सुनने एवं बांटने की कला से कभी न थकें, यदि हम आपस में लोगों के साथ मिल जुलकर रहना चाहते हैं, विशेषकर, ऐसे समय में जब चुनौतियों हैं, जो रचनात्मक निष्ठा तथा जो उत्साहपूर्ण खोज की मांग करता है।

संत पापा ने आत्म निरीक्षण करने की सलाह दी ताकि हम परख कर सकें कि कौन पवित्र आत्मा से और कौन दूसरी आत्माओं से आता है। 

संत पापा ने स्मरण दिलाया कि आमसभा का समय पवित्र आत्मा के प्रति विनम्र बनने का समय है जो भविष्यवाणी को प्रकट करता है। यह समर्पित जीवन के लिए अपरिहार्य मूल्य है क्योंकि यह ख्रीस्त के नबी की प्रेरिताई में भाग लेना है। इसके लिए साहसी और विनम्र बनकर बुराई एवं पाप के खिलाफ आवाज उठाने हेतु ईश्वर के प्रवक्ता बनना है। 


(Usha Tirkey)

22/05/2017 15:24