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प्रेरक मोतीः सन्त अथानासियुस (297-373)

सन्त अथानासियुस (297-373)

02/05/2017 09:28

वाटिकन सिटी, 02 मई सन् 2017

विश्वास के धनी सन्त अथानासियुस का जन्म मिस्र के एलेक्ज़ेनड्रिया में लगभग सन् 296 ई. में हुआ था। स्थानीय धर्माध्यक्ष एलेक्ज़ेनडर की छत्रछाया में अथानासियुस प्रज्ञा एवं सदगुणों में विकसित होते गये। सन् 313 ई. में धर्माध्यक्ष एलेक्ज़ेनडर को एलेक्ज़ेनड्रिया की पवित्रपीठ का कार्यभार सौंपा गया जिनके संरक्षण में अथानासियुस ने सुसमाचार उदघोषणा प्रेरिताई  आरम्भ की। सन् 315 ई. में अथानासियुस उजाड़ प्रदेश में आध्यात्मिक साधना के लिये निकल पड़े जहाँ उन्हें सन्त अन्तोनी का साथ मिला।

सन् 319 ई. में अथानासियुस उपयाजक बने तथा इस लघु पद के बावजूद उन्हें एलेक्ज़ेनड्रिया की कलीसिया में आयरुस नाम के एक पुरोहित द्वारा चलाये जा रहे अपधर्म की जाँच के लिये प्रेषित कर दिया गया। आयरुस, प्रभु ख्रीस्त के ईश्वरत्व से, इनकार करते थे तथा इसका प्रचार सर्वत्र करने पर तुले थे। इस प्रकार, अपधर्म के विरुद्ध संघर्ष ही अथानासियुस के जीवन का मिशन बन गया।

सन् 325 ई. में, अथानासियुस ने नीसेया की महासभा में धर्माध्यक्ष एलेक्ज़ेनडर की सहायता की जहाँ उनका प्रभाव महसूस किया जाने लगा। पाँच माहों बाद, धर्माध्यक्ष एलेक्ज़ेनडर का देहान्त हो गया। मृत्युशैया पर पड़े एलेक्ज़ेनडर ने अथानासियुस को उनका उत्तराधिकारी बनाये जाने का सुझाव दिया जिसके परिणामस्वरूप, सन् 326 ई. में अथानासियुस को सर्वसम्मति से एलेक्ज़ेनड्रिया का प्राधिधर्माध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।

अपधर्मी आयरुस के कारण प्राधिधर्माध्यक्ष अथानासियुस को कई कष्ट भोगने पड़े तथा अपने प्राधिधर्माध्यक्षीय काल के 46 वर्षों में से 17 वर्ष उन्होंने निष्कासन में व्यतीत किये। काथलिक विश्वास के महापुरुष और सर्वजेता अथानासियुस का दो मई सन् 373 ई. को निधन हो गया। वे काथलिक कलीसिया के आचार्य घोषित किये गये हैं।

चिन्तनः सतत् प्रार्थना द्वारा प्रभु ख्रीस्त के प्रेम सन्देश की उदघोषणा का सम्बल प्राप्त करें तथा विश्व में न्याय, प्रेम एवं शांति की स्थापना में योगदान दें। 


(Juliet Genevive Christopher)

02/05/2017 09:28