Social:

RSS:

App:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

कलीसिया \ एशिया की कलीसिया

पाकिस्तान की कलीसिया ने छात्र की हत्या की निंदा की

मशाल की हत्या की निंदा करने के लिए लाहौर में एक विरोध प्रदर्शन - REUTERS

19/04/2017 17:04

लाहौर, बुधवार, 19 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : शांति और न्याय हेतु गठित पाकिस्तानी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने मरदान शहर के खान अब्दुल वली खान यूनिवर्सिटी के एक 23 वर्षीय छात्र मशाल खान की हत्या की कड़ी निंदा की है और सरकार से अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

 13 अप्रैल को पत्रकारिता का छात्र मशाल खान को अपने छात्रावास के कमरे से उसी के साथ पढ़ने वाले छात्रों ने ईश निंदा के संदेह में मारते हुए बाहर निकाला। उसके कपड़े फाड़ कर उसे नंगा किया और दूसरे मंजिल से नीचे फेंक कर उसे मार डाला। दूसरे विद्यार्थी को भी उन्होंने मारना शुरु किया था पर पुलिस ने उसे बचा लिया और उसे अस्पताल में भर्ती किया गया है।

फैसलाबाद के धर्माध्यक्ष जोसेफ अर्शाद, शांति और न्याय हेतु गठित पाकिस्तानी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष फादर एम्मानुएल युसुफ मानी,  कार्यकारी निदेशक सेसिल शेन चौधरी ने देश की शिक्षा प्रणाली में नफरत और भेदभावपूर्ण सामग्री की मौजूदगी के साथ हत्या को जोड़ते हुए अपने बयान में कहा, ″अगर हम एक शांतिपूर्ण और सहिष्णु समाज बनाना चाहते हैं तो ऐसी सामग्री को हर स्कूल के पाठ्यपुस्तक से हटा दिया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय द्वारा उन विचारों विकसित करने की शिक्षा देनी चाहिए, जहाँ विद्यार्थी अपने धर्म या विश्वास के बावजूद दूसरों की राय को स्वीकार कर सकें और मान सकें। हमें अपने युवा छात्रों को सहिष्णुता, सह-अस्तित्व और स्वीकृति के गुणों को सिखाने की जरूरत है।"

खैबर पख्तुनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री परवेज खट्टक ने प्रांतीय विधानसभा को बताया कि मशाल खान द्वारा इस्लाम के तौहीन या निंदा की कोई भी सबूत नहीं पायी गई है।

‘अल्पसंख्यक अधिकार निगरानी संगठन’ गैर-मुस्लिम संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ने मशाल की हत्या की निंदा करने के लिए लाहौर में एक विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के प्रमुख काशीफ नवाब ने कहा, "हम सरकार से ईश निन्दा के बहाने भीड़ द्वारा हिंसा की संस्कृति को समाप्त कराने की मांग करते हैं।"

कलीसिया के नेताओं ने आरोप लगाया है कि व्यक्तिगत लाभ के लिए कानूनों का दुरुपयोग किया जाता है और धार्मिक चरमपंथी ईश निन्दा कानूनों का दुरुपयोग करके अपने एजेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं।


(Margaret Sumita Minj)

19/04/2017 17:04