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विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ मिस्सा व प्रवचन

पास्का रविवार को संत पापा का प्रवचन

संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में संत पापा - AP

17/04/2017 16:54

संत पापा फ्राँसिस ने 16 अप्रैल को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में पास्का महोत्सव के उपलक्ष्य में समारोही मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

उन्होंने ख्रीस्तयाग के दौरान अपने प्रवचन में कहा, “आज कलीसिया येसु के पुनरुत्थान की घोषणा करती है।”येसु के चेले पेत्रुस, योहन और कुछ धर्मी नारियाँ कब्र के पास गये लेकिन वे कब्र को खाली पाये। वे बोझिल मन और हताशी भरे दिल से वहाँ से चले गये क्योंकि उनके प्रभु जिन्हें वे प्यार करते थे वे मार डाले गये। यह एक हार के समान लगती जो उन्हें कब्र की ओर ले गयी लेकिन दूत ने उनसे कहा, “वे मुर्दों में से जीव उठे हैं।”यह उनके लिए घोषित किया जाता है जो उन्हें आश्चर्यचकित और विस्मित कर देता है। शिष्य येसु के ऊपर घटित घटना को लेकर भयभीत होने के कारण अपने कमरे में बंद थे कि कहीं उनके साथ भी वैसी ही घटना न हो। कलीसिया उनके बंद हृदय, भय और हार को व्यक्त करने से नहीं हिचकिचाती है और कहती है कि हम अपने भय की स्थिति से बाहर निकले क्योंकि येसु जी उठे हैं।

हमारे जीवन में दुर्घटनाएं, बीमरियाँ, मानव व्यापार, युद्ध, विध्वंस, संहार, बदला और घृणा जैसी बहुत सारी घटनाएँ घटती हैं, इस सारी घटनाओं में ईश्वर कहाँ रहते हैं? संत पापा ने एक घातक रोग से पीड़ित एक इंजीनियर से हुई अपनी वार्ता को साझा करते हुए कहा, “आप की बीमारी और आप को क्या होगा इसके कोई नहीं जानता। आप येसु के क्रूस की ओर देखे, यहाँ आप के लिए कोई उत्तर होगा।”उसने उत्तर दिया, “जीहाँ लेकिन पिता ने अपने बेटे से पूछा और बेटे ने हाँ में उत्तर दिया। उन्होंने मुझ से यह नहीं पूछा कि मैं इस बीमारी को लेना चाहूँगा अथवा नहीं?”

संत पापा ने कहा कि यह हमें प्रभावित करता है क्योंकि हममें से किसी को नहीं पूछा जाता हैं, “लेकिन विश्व में जो हो रहा है क्या आप उससे खुश है? क्या आप इस क्रूस को ढ़ोने के लिए इच्छुक हैं? यह क्रूस हमारे जीवन में सदैव बना रहता है और येसु ख्रीस्त में हमारा विश्वास कम हो जाता है। आज माता कलीसिया हम से आग्रह करती है कि हम अपना साहस जुटाये क्योंकि येसु ख्रीस्त मृतकों में से जी उठे हैं। यह हमारे लिए कोई स्वप्न नहीं है, येसु का पुनरुत्थान फूलों से भरा सेज नहीं है। यह अच्छा है लेकिन हम इतने से सीमित होकर नहीं रह सकते। यह हमारे लिए इससे भी बढ़कर है येसु हमारे लिए एक नींव के समान हैं जिसे कारीगरों ने नकार दिया था। समाज में जिन चीजों की आवश्यकता नहीं होती उन्हें फेंक दिया जाता है येसु हमारे लिए जीवन के उद्गम एक विशाल पत्थर हैं।

संत पापा ने कहा कि हम भूमि में कंकड़ की भाँति हैं जहाँ येसु में अपने विश्वास के कारण हमें दर्द, दुःख कठिनाईयों का अनुभव होता है। अपने जीवन की क्षितिज की ओर दृष्टि करते हुए हम कह सकते हैं, “देखो एक दीवार है, एक क्षितिज, एक जीवन है जहाँ खुशी के साथ क्रूस की छाया भी है। हम निराश होकर अपने को बंद न करे लेकिन साहस पूर्वक आगे बढ़ें। आप के जीवन में कंकड़ है लेकिन यह अर्थ पूर्ण हैं क्योंकि आप चट्टान के एक छोटे अंश हैं।”इन सारी कठिनाइयों के बीच कलीसिया की स्थिति कैसी है? परित्यक्त पत्थर त्यागा हुआ नहीं है। कंकड जो पत्थर पर विश्वास करते और उस से संलग्न रहते हैं अपने में एक अर्थ रखते हैं क्योंकि वे अपने आन्तरिक जीवन में पुनर्जीवित येसु को घोषित करते हैं।

संत पापा ने भक्त समुदाय का आह्वान करते हुए कहा, “ हम थोड़ा चिंतन करें, हम में प्रत्येक अपने जीवन में मुश्किलों, बीमारियों के दौर से हो कर गुजरते हैं, हमारे प्रियजनों को युद्ध और मानवीय त्रासदी का सामना करना पड़ता है और हम नम्रता पूर्वक ईश्वर के सम्मुख आते हैं।”संत पापा ने कहा, “मैं इन सारी बातों को नहीं समझता हूँ लेकिन यह निश्चित है कि प्रभु येसु ख्रीस्त मृतकों में से जी उठे हैं जिसे मैं दावे के साथ कह सकता हूँ।”संत पापा ने कहा, “प्रिय भाई और बहनो, मैं आपको यही बतलाना चाहता हूँ कि अपने हृदय और अपने घरों में इस बात की घोषणा करते हुए जायें कि “येसु पुनर्जीवित हैं।”   

 

17/04/2017 16:54