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मलाला, सबसे कम उम्र की संयुक्त राष्ट्र की शांति संदेशवाहक

सोमवार 10 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस और मलाला - REUTERS

12/04/2017 16:01

न्यूयोर्क, बुधवार, 12 अप्रैल 2017 (वीआर सेदोक) : पाकिस्तान की किशोर नोबेल पुरस्कार विजेता और बच्चों और लड़कियों के अधिकार की कार्यकर्ता मलाला युसुफजई को लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान को देखते हुए सबसे कम उम्र की संयुक्त राष्ट्र शांति संदेशवाहक घोषित किया गया।

सोमवार 10 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने समारोह के दौरान कहा,″आप दुनिया में शायद सबसे महत्वपूर्ण बात सभी के लिए शिक्षा की एक प्रतीक हैं। संयुक्त राष्ट्र की शांति संदेशवाहक के रुप में आपको पाकर हम सभी अत्यंत खुश हैं।″ महासचिव गुटेरेस ने  ‘लड़कियों तथा महिलाओं की शिक्षा और समानता’ के साथ-साथ सभी लोगों के अधिकारों का साहसपूर्वक रक्षा और ‘शांति के लिए अटूट प्रतिबद्धता’ हेतु उसकी प्रशंसा की।

सम्मान को स्वीकार करते हुए 19 वर्षीय मलाला ने कहा, "परिवर्तन लाना हमारे साथ शुरू होता है और यह अभी शुरू करना चाहिए। यदि आप अपने भविष्य को उज्ज्वल देखना के चाहते हैं तो अभी ही इसपर काम करना शुरु करना चाहिए। किसी और की प्रतीक्षा न करें।″

मलाला को एक मुस्लिम होने का गर्व है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस्लाम का अर्थ है शांति। उन्होंने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया हर दिन इस्लाम के नाम पर ``इस्लामी आतंकवादियों और इस्लामी जिहादियों'' की लड़ाई को संदर्भित करता है और फिर लोग पूरे इस्लाम को दोष देते हैं। उसने कहा, ″लोगों को कुछ आतंकवादियों के देखने के बजाय मुझे और अन्य मुसलमानों को देखना चाहिए जो शांति में जीवन बिताते हैं और शांति में विश्वास करते हैं। मुसलमानों को भी एकजुट होकर ‘आतंकवादियों और जिहादियों' के खिलाफ कदम उठानी चाहिए। वो जो भी करते हैं हम उनके खिलाफ हैं।″

मलाला युसुफजई सबसे कम उम्र की नोबेल पुरस्कार विजेता है और इन्हें ये पुरस्कार पाकिस्तान में नारीअधिकारों और उनकी शिक्षा के लिए आवाज उठाने के लिए दिया गया था |  पाकिस्तान के एक छोटे से इलाके खैबर प्ख्तुन्ख्वा की रहने वाली मलाला युसुफजई को आतंकी संगठन तालिबान द्वारा नारी शिक्षा को प्रतिबंधित कर दिए जाने के बाद उसका विरोध किये जाने के कारण सन् 2012 आतंकियों ने मलाला के सिर में गोली मार दी थी लेकिन किस्मत से सही समय पर इलाज़ उपलब्ध हो जाने के कारण मलाला को बचाया जा सका और इसी वजह से तालिबान द्वारा प्रतिबंधित नारी शिक्षा को अन्तराष्ट्रीय पहचान मिली |

वर्तमान में मलाला ब्रिटेन में रहती है जहां उसे गोली लगने के बाद चिकित्सा उपचार मिला था। जून में अपने माध्यमिक विद्यालय की शिक्षा खत्म करने के बाद, वे विश्वविद्यालय में दर्शन, राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन करने की योजना बना रही हैं।


(Margaret Sumita Minj)

12/04/2017 16:01