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रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

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संत पापा फ्राँसिस \ अंजेलुस व संदेश

क्रूस पुनरुत्थान का द्वार

- ANSA

13/03/2017 17:25

वाटिकन रेडियो, सोमवार, 12 मार्च 2017 ( सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने 12 मार्च को अपने  रविवारीय देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा, प्रिय भाई एवं बहनो, सुप्रभात।

चालीसा का द्वितीय रविवार हमारे लिए येसु के रुपान्तरण की घटना का जिक्र करता है। येसु अपने साथ अपने तीन शिष्यों पेत्रुस, याकूब और योहन को ले कर एक ऊँचे पर्वत पर चढ़ते और वहाँ यह विचित्र घटना घटती है। येसु का चेहरा सूर्य के समान प्रदीप्त हो गया और उसके वस्त्र हिम की भाँति श्वेत हो गये। हम इस बात का अनुमान लगाते हुए चिंतन कर सकते हैं कि येसु कैसे मानव के रुप में अपने पिता के कार्यों को करते हुए लोगों को शिक्षा देते और चमत्कार करते हुए अपनी दिव्य महिमा में सुशोभित होते हैं। येसु के इस रुपान्तरण की घटना में येसु के साथ पर्वत पर नबी एलियस और मूसा दिखाई देते हैं जो येसु से बातें करते हैं।

संत पापा ने कहा कि इस अति विशेष घटना में येसु की चमक का अर्थ अपने शिष्यों के मन और दिल को ज्योतिमय करना है जिससे वे अपनी स्वामी येसु को पूर्णरूपेण पहचान और समझ सकें। यह आकस्मिक देदीप्यमान प्रकाश येसु के व्यक्तिगत और उनके इतिहास का रहस्योद्घाटन करता है।

इस तरह येरुसलेम की राह में जहाँ उन्हें घोर दुःख उठाते हुए क्रूस पर मरना होगा वे अपने शिष्यों को क्रूस पर अपमान, क्रूस की मूर्खता को समझने और विश्वास में मजबूत होने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। यह उन्हें येसु, ईश्वर के पुत्र के पुनरुत्थान की ओर भी उनका ध्यान आकृष्ट करता है। येसु अपने शिष्यों को उस दुःखद और दर्द भारी घटना का सामना करने हेतु तैयार करते हैं। वास्तव में, येसु उस समय लोगों की आशा के विपरीत एक ऐसे मसीह की छवि प्रस्तुत करते हैं जो दुनियावी दृष्टिकोण से एकदम भिन्न है। वे अपने को शक्तिशाली और महिमान्वित राजा के रूप में प्रस्तुत नहीं करते हैं लेकिन वे अपनी छवि एक नम्र निशस्त्र सेवक के रुप में प्रस्तुत करते हैं। वे अपने को एक धनवान, संपन्न व्यक्ति के माफिक नहीं वरन् एक गरीब के रुप में व्यक्त करते हैं जिसके लिए सिर छुपाने को भी जगह नहीं है। वे एक कुलपति नहीं जिसकी ढेर सारी संतान हैं वरन वे अपने में आश्रयहीन, घरविहीन एक कुंवारे हैं। क्रूस सचमुच में हमारे लिए ईश्वर का एक उलटा, अपमानजनक रहस्य है। लेकिन यह क्रूस है जिसके द्वारा येसु अपने पुनरुत्थान में महिमान्वित किये जायेंगे जो इस क्षणिक रुपान्तरण से भिन्न हमेशा-हमेशा के लिए होगा।

टबोर पर्वत पर येसु अपने रुपान्तरण के द्वारा अपने चेलों को यह दिखलाना चाहते हैं कि वे क्रूस की राह में चलने से न डरे वरन् अपने जीवन में क्रूस का वहन करें जो येसु के साथ मरते हैं वे उनके साथ पुनर्जीवित होंगे और यह हमारा क्रूस है जो हमारे लिए पुनरुत्थान का द्वार है। संत पापा ने कहा कि जो येसु के साथ संघर्ष करते हैं वे उनके साथ विजयी होंगे। यह हमारे लिए आशा का संदेश है जिसे येसु का क्रूस हमें देता है। उन्होंने कहा कि क्रूस हमारे घरों की दीवार पर टाँग कर रखी जाने वाली चीज नहीं है और न ही गले में पहने जाने वाला शृंगार। हम ख्रीस्तियों के लिए यह क्रूस उस प्रेम की यादगारी है जिसके द्वारा येसु ने मानव को पाप और मृत्यु से बचाने हेतु अपने को बलिदान कर दिया। इस चालीसा काल में हम भक्तिपूर्वक क्रूसित येसु की प्रतिमा पर मनन ध्यान करें। यह हमारे ख्रीस्तीय विश्वास की निशानी है। यह येसु के प्रेम की निशानी है जो हमारे लिए मर गये। हम अपने लिए निश्चित करें कि चालीसा काल में हम और अधिक गहराई से अपने पापों के गंभीर परिणामों को जान सकें जिसके कारण येसु को हमें बचाने और मुक्ति दिलाने हेतु क्रूस पर बलिदान होना पड़ा।

माता मरियम अपनी नम्रता में येसु की महिमा को सदैव मनन-चिंतन करती रही। वह हमारी सहायता करे जिससे हम अपने शांतिमय प्रार्थना में उनकी उपस्थिति से अपने हृदयों के अंधकारमय क्षणों में अपने को प्रकाशमान पाये, जो हमारे लिए उनकी महिमा की प्रतीक है।
इतना कहने के बाद संत पापा ने विश्वासी समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने गुआतेमाला में लगी आग में घायल और मारे गये युवतियों की विशेषकर, याद करने हुए उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की। उन्होंने विभिन्न प्रकार के हिंसा, युद्ध और अत्याचार के शिकार बच्चे-बच्चियों और उनके परिवारों की भी याद करते हुए सबों से प्रार्थना का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह महामारी, एक गुप्त रुदन के सामान है जिसे हम सभों को सुनने की जरूरत है।  इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया और अपने लिए प्रार्थना की याचना करते हुए रविवारीय मंगलकामनाएँ अर्पित की।

 

13/03/2017 17:25