Social:

RSS:

रेडियो वाटिकन

विश्व के साथ संवाद करती संत पापा एवं कलीसिया की आवाज़

अन्य भाषाओं:

कलीसिया \ भारत की कलीसिया

पूर्व सांसद ने कहा, झारखण्ड के आदिवासी विधायक धोखेबाज

सीएनटी एवं एसपीटी अक्ट में संशोधन का विरोध करते आदिवासी - RV

11/03/2017 16:10

राँची, शनिवार, 11 मार्च 2017 (मैटर्स इंडिया): झारखंड के एक पूर्व सांसद ने आदिवासी विधायकों द्वारा भूमि काश्तकारी अधिनियम में संशोधन का समर्थन करने के लिए उन्हें धोखेबाज कहा।

झारखंड सेनगेल अभियान (झारखंड सशक्तिकरण अभियान) के प्रमुख सल्खान मुर्मू ने छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट और संथाल परगना टेनेंसी एक्ट में संशोधन करने के लिए राज्य सरकार के कदम का विरोध किया।

टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट अनुसार झारखण्ड विधानसभा ने पहले ही संशोधनों को पारित कर दिया है, जो अब राज्य के राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

9 मार्च को झारखंड के सिमडेगा जिला में आयोजित एक रैली में उन्होंने कहा, ″ये संशोधन बिल आदिवासी सलाहकार परिषद की सहमति के बिना राज्य विधानसभा में पारित कभी नहीं हो सकता था।″

उन्होंने अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, ″राज्य के मुख्यमंत्री समेत परिषद में 20 सदस्य हैं जिनमें मुख्यमंत्री गैर-आदिवासी हैं किन्तु बाकी 19 आदिवासी। निश्चय ही, 19 सदस्यों में से 15 विधायक हैं। यदि वे संशोधन प्रस्तावों का ईमानदारी से विरोध किये होते, तो मुख्यमंत्री रघुबार दास कभी कुछ नहीं कर पाते।″  

सरकार का दावा है कि संशोधनों में स्वामित्व के अधिकार को खोये बिना आदिवासियों की जमीन को गैर-कृषि उपयोग हेतु सक्षम बनाया जाएगा।

कलीसिया एवं आदिवासियों का मानना है कि संशोधन कंपनियों और व्यापार समूहों को झारखंड के खनिज समृद्ध आदिवासी भूमि का फायदा उठाने की अनुमति देगा।

सलखान मूर्मू ने अपील की कि चूंकि आदिवासी विधायक अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं, व्यक्तिगत हितों के ऊपर उनका कर्तव्य था, समुदाय के हितों की रक्षा करना।

उन्होंने कहा कि यदि रघुवरदास उन्हें मानने से इनकार कर रहे थे तो विधायकों को इस्तीफा दे देना चाहिए था जो स्वतः रघुबार दास सरकार के पतन का कारण बनता और संशोधन बिल विधानसभा द्वारा पारित नहीं किया जाता। वे वास्तविक धोखेबाज हैं। उन्हें एक सीख मिलनी चाहिए। केवल रघुबर दास को दोषी करार नहीं दिया जा सकता।

पूर्व सांसद ने कहा कि अगर सरकार उखाड़कर नहीं फेंकी गयी तो आदिवासी छः महीने के अंदर नष्ट हो जायेंगे।

उन्होंने कहा, ″हमें सरकार को गिराने के लिए हिंसा की आवश्यकता नहीं है किन्तु आदिवासी विधायकों को इस्तीफा दिलवाने हेतु मजबूर करना होगा।″ उनका दावा था कि रैली हेतु करीब 1 लाख लोग जमा थे। प्रशासन ने भी स्वीकार किया कि यह जिला में एक अत्यन्त विशाल रैली थी जिसमें लोग काफी उत्साहित थे। 


(Usha Tirkey)

11/03/2017 16:10