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कंधमाल के नये मरियम तीर्थ पर जमा हुए हज़ारों श्रद्धालु

उड़ीसा के काथलिक

06/03/2017 15:36

भुनेश्वर, सोमवार, 6 मार्च 2017 (मैटर्स इंडिया): उड़ीसा के कंधमाल जिला स्थित एक नये मरियम तीर्थ पर 5 मार्च को, आयोजित एक उत्सव में करीब 13 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

समारोह के मुख्य अनुष्ठाता कटक भुनेश्वर के महाधर्माध्यक्ष जोन बारवा ने कहा, ″माता मरियम हम सभी से स्नेह करती हैं वे चाहती हैं कि हम विश्वास, प्रेम एवं स्नेह में बढ़ें।″

पारथोमाह का मरियम तीर्थ दारिंगबादी पल्ली में पड़ता है जो उड़ीसा के कटक भुनेश्वर महाधर्मप्रांत का हिस्सा है। समारोह में करीब 30 पुरोहित तथा 25 धर्मबहनें भी उपस्थित थे।

महाधर्माध्यक्ष ने प्रवचन में कहा कि ईशवचन हमें प्रार्थना, उपवास एवं आराम से परहेज करने का निमंत्रण देता तथा आध्यात्मिक यात्रा में विशेष ध्यान देने का अवसर देता है। उन्होंने गौर किया कि समारोह चालीसा काल के प्रथम सप्ताह में पड़ा जो ख्रीस्तीयों के लिए पास्का के पूर्व 40 दिनों तक प्रार्थना और उपवास करने का समय है।

उन्होंने कहा कि धन्य कुवाँरी मरियम कंधमाल के लोगों की मध्यस्थता करने हेतु सदा तैयार रहती हैं जिन्हें 2008 में ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा का सामना करना पड़ा था।

पल्ली पुरोहित फा. अंजेलो रानासिंह ने श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए तीर्थस्थल के शुरूआत की जानकारी दी। उनके अनुसार 5 मार्च 1994 को एक हिन्दू विधवा कामोदा देवी जलावन की लकड़ी जमा करने हेतु पहाड़ गयी हुई थी। तब उसने श्वेत वस्त्र धारी एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी थी और लम्बे बाल थे। उसके करीब आते ही वह व्यक्ति ओझल हो गया। तब कामोदा देवी ने एक सुन्दर महिला को देखा जो कुछ ही दूरी पर खड़ी थी और उसका नाम पुकारते हुए कह रही थी कि वह स्थानीय काथलिक पुरोहित से, एक गिरजा का निर्माण करने हेतु आग्रह करे जहाँ समाज के लिए प्रार्थना की जा सके।

देवी ने इस घटना की चर्चा सबसे पहले अपने पड़ोसियों से की जिन्होंने इसका मजाक उड़ाया। एक दिन 12 साल के एक लड़के ने देवी को फिर उसी पहाड़ की ओर बुलाया और अंतर्ध्यान हो गया। तब पुनः एक बार वह सुन्दर महिला प्रकट हुई तथा अपना परिचय दिया कि मैं येसु की माता हूँ, समाज के परिवर्तन हेतु निरंतर प्रार्थना करो।

तब उस विधवा ने स्थानीय पल्ली पुरोहित फादर अल्फोंस बालारसिंह के पास जाकर ये सारी बातें बतायी। पल्ली पुरोहित ने एक समिति का गठन किया तथा जहाँ माता मरियम का दर्शन हुआ था वहीं बरगद के पेड़ के निकट एक छोटा ग्रोटो का निर्माण किया गया।

तब लोग पहाड़ पर पारथामा मरियम तीर्थ की ओर आने लगे। बाद में वह विधवा अग्नेस नाम से बपतिस्मा ग्रहण की। माता मरियम की भक्ति बढ़ती गयी। पल्ली पुरोहित ने कहा कि तब से लेकर आज तक कई चमत्कार हुए हैं।

महाधर्माध्यक्ष बारवा इस तीर्थस्थल पर 2011 और 2015 में ख्रीस्तयाग अर्पित कर चुके हैं।

मरियम तीर्थ का नियमित भेंट करने वाली अनिता साहू ने कहा कि उन्होंने पारथामा की माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा सब कुछ प्राप्त किया है। ″मैं यहाँ अपनी भक्ति प्रदर्शित करने आयी हूँ।″  

एक अन्य श्रद्धालु अलादो दिगल ने कहा कि उस तीर्थ पर प्रार्थना करने के द्वारा उन्हें दृष्टि मिली है जबकि वे दवाई लेने के बाद भी नहीं देख पा रहा था। 


(Usha Tirkey)

06/03/2017 15:36